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ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए चूड़ी एवं पेठा उद्योग को हटाने की सिफारिश


लखनऊ,(एजेंसी)21 जुलाई। विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी मंत्रालय की संसदीय समिति ने ताजहमल को प्रदूषण से बचाने के लिए आसपास के क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाकर चल रहे डीजल जनरेटरों पर तुरंत रोक लगाने की सिफारिश की है। समिति ने पेठा और चूड़ी उद्योग को भी ताज ट्रैपेजियम जोन (टीटीजेड) से हटाने की सिफारिश की है ताकि इन उद्योग से होने वाले प्रदूषण से संगमरमर की इस ऐतिहासिक विरासत को बचाया जा सके।

कांग्रेस सांसद अश्विनी कुमार की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट मंगलवार को राज्यसभा में पेश की गई। रिपोर्ट में ताजमहल की फीकी पड़ती चमक पर चिंता जताते हुए आसपास के क्षेत्रों लगे डीजल जनरेटरों, समीप स्थित श्मशान स्थल तथा आगरा में बढ़ते परिवहन के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को भी जिम्मेदार ठहराया है।

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समिति ने कहा कि टीटीजेड क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के विस्तार की जांच होनी चाहिए तथा इन उद्योगों में वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणालिया स्थापित करना अनिवार्य किया जाना चाहिए। समिति ने कहा कि आसपास के चूड़ी और पेठा उद्योग समेत उन सभी औद्यौगिक इकाइयों को वहां से हटाए जाने की जरूरत है जो नाइट्रोजन डाई आक्साइड, सल्फर और पेट्रो कोक का उर्त्सजन करते हैं।

समिति ने कहा कि ताजमहल के करीब स्थित श्मशान घाट से उत्पन्न होने वाला वायु प्रदूषण इस ऐतिहासिक इमारत को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। समिति ने तत्काल इस श्मशान घाट को अन्यत्र स्थानांतरित करने, एक इलेक्ट्रिक शवदाह गृह स्थापित करने और इस बारे में जागरूकता फैलाने की सिफारिश की है। समिति ने यह भी कहा है कि आगरा में बढ़ते वाहनों के यातायात का भी ताज महल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

समिति ने कहा कि टीटीजेड में स्थित उद्योगों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं यहां तक की घरों में भी बड़े पैमाने पर डीजल जनरेटर लगे हुए हैं जो वायु प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद हो रहा है। वजह यह है कि वहां बिजली की आपूर्ति सुचारू नहीं है। समिति ने जेनरेटर सेटों को बंद करने के साथ-साथ चौबीस घंटे सुचारू बिजली आपूर्ति पर भी जोर दिया है।

समिति ने इस मामले में उप्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया। समिति का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को टीटीजेड क्षेत्र में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति का निर्देश दिया था जिसमें सरकार विफल रही है। समिति ने कहा कि टीटीजेड प्राधिकरण इस आदेश का पालन नहीं करके न्यायालय के आदेश की अवमानना भी कर रहा है।

समिति ने सिफारिश की है कि इन तमाम बिंदुओं को देखते हुए टीटीजेड प्राधिकरण को उच्चतम न्यायालय से संपर्क कर बताना चाहिए कि टीटीजेड क्षेत्र को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति करने में क्या अड़चनें हैं। समिति के अनुसार, टीटीजेड को न्यायालय से तब तक के लिए कोई समाधान के लिए भी आग्रह करना चाहिए जब तक वह इलाके में 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हो जाता। टीटीजेड प्राधिकरण ने समिति को बताया था कि उत्तर प्रदेश में बिजली की किल्लत होने की वजह से टीटीजेड को हर दिन 18 से 19 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।


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