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पीएम मोदी कैसे निपटेंगे इन 6 बाधाओं से?


नई दिल्ली,(एजेंसी)22 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने 2022 तक सभी के लिए मकान का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सात वर्ष रह गए हैं। इसका मतलब है कि हर रोज करीब 44 हजार या हर साल 1.6 करोड़ मकान बनाने होंगे।

इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की राह में छह प्रमुख बाधाओं की पहचान आसानी से की जा सकती है, जिसकी ओर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है नहीं मुश्किल ही हैं कि कभी सबके सर के ऊपर छत हो पाए।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

1. बढ़ते शहर?
देश के दो महानगर दिल्ली और मुंबई दुनिया के सबसे बड़े 10 महानगरों में शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े के मुताबिक कोलकाता 2030 तक दुनिया के 15 सबसे बड़े महानगरों में शामिल हो जाएगा। 2011 की जनगणना के मुताबिक शहरों में नौ लाख बेघर लोग रहते हैं। इसके साथ ही शहरों की झुग्गियों में 6.5 करोड़ लोग रहते हैं। सरकारी आंकड़े के मुताबिक शहरों में जितने लोगों को मकान चाहिए, उनमें से 90 फीसदी बेहद गरीब हैं।

2. शहरों की ओर पलायन और मैनेजमेंट?
कृषि क्षेत्र की कम विकास दर के कारण गांवों से शहरों की ओर बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। गांवों में करीब 67 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनकी दैनिक आय 33 रुपये से कम है। 2031 तक शहरों की आबादी 38 करोड़ से 60 करोड़ हो जाएगी। ऐसे में खराब मैनेजमेंट सारा खेल बिगाड़ सकता हैं।

3. स्लमों में है बड़ी आबादी?
जनगणना के मुताबिक आज शहरों की करीब 17 फीसदी या करीब 6.5 करोड़ की आबादी स्लमों में रहती है। ऐसे में सभी को विस्थापित किर मकान बनाना टेढ़ी खीर होगी।

4. कहां से आएगी जमीन?
मकानों की कमी पूरी करने के लिए करीब दो लाख हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। इस कमी से निपटने के लिए कुछ विशेषज्ञों की सलाह है कि इमारतों की ऊंचाई बढ़ाई जाए और इसके लिए फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) के नियम सरल किए जाएं। मुंबई में इस दिशा में कुछ सुधार हाल में हुए हैं। देश के अधिकतर शहर काफी सघन हैं, जहां प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में दस हजार से भी अधिक लोग रहते हैं। पर सवाल हैं क्या सरकार इसके लिए तैयार हैं?

5. मानक पर कैसे खरा उतरेंगे?
सभी के लिए आवास योजना के अंदर और भी चीजें शामिल होंगी जैसे, नई इकाइयां, क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी, लाभार्थियों द्वारा किया जाने वाला निर्माण और झुग्गियों में स्थित घरों कापुनर्विकास। मकान बनाने की होड़ में गुणवत्ता कायम रखना चुनौती होगी। एक आंकड़े के मुताबिक अभी देश में हर तीसरे मकान की गुणवत्ता खराब है। ऐसे में सरकार क्या खुद सारे मानकों पर खरी उतर पाएगी जब उसे यह काम सात साल में ही पूरा करना हैं।

6. नियमों के संजाल से निपटना
प्रधानमंत्री मोदी की आवासीय योजना के सामने सबसे बड़ी बाधा होगी सरकारी नियमों के जंजाल से निपटना, जिनमें शामिल हैं निर्माण मंजूरी प्रक्रिया, जिसे विश्व बैंक ने दुनिया में सबसे खराब कहा है। रियल एस्टेट परामर्श कंपनी जोंस लैंग लसाल के मुताबिक देश में भूमि अधिग्रहण से लेकर निर्माण शुरू करने तक की प्रक्रिया में दो साल तक लग सकते हैं।


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