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मोदी राज में हुआ साम्प्रदायिक दंगों में भारी इज़ाफा


नई दिल्ली,(एजेंसी)22 जुलाई। विपक्ष नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार ये आरोप लगाती रही है कि वे साम्प्रदायिक ताकतों को बढ़ावा देते हैं और अब खुद गृह मंत्रालय के आंकड़े विपक्ष के दावों की पुष्टी कर रहे हैं।

Communal violence

प्रतीकात्मक फोटो

गृहमंत्रालय की एक रिपार्ट में कहा गया है कि देश में पिछले पांच महीनों में साम्प्रदायिक दंगों में 24 फीसद का इजाफा हुआ है। केवल इतना ही नहीं दंगों से जुड़ी मौत में 65 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

ये आंकड़े इसी साल के शुरुआती पांच महीने (जनवरी से लेकर मई तक) और पिछले साल के पहले पांच महीने (जनवरी से लेकर मई तक) के तुलनात्मक अध्ययन से सामने आए है। गौरतलब है कि पिछले साल पहले पांच महीने (जनवरी से मई) यूपीए की सरकार थी।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों में साल 2015 में जनवरी से मई के बीच कुल 287 साम्प्रदायिक हिंसा मामले सामने आए है जो पिछले साल के 232 साम्प्रदायिक मामलों से करीब 24 फीसद ज्यादा है। वहीं इसी अवधि में साम्प्रदायिक दंगों में जान गंवाने वालों की तादाद 43 हो गई है जो पिछले साल 26 थी। पिछले साल दंगों में घायलों की संख्या 701 थी जो इस साल बढ़कर 961 हो गई है।

इस दौरान साम्प्रदायिक दंगों के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में सामने आए हैं। मोदी के शासनकाल में साम्प्रदायिक सद्भाव से जुड़ा यह पहला आंकड़ा है, जिसमें साम्प्रदायिक सद्भाव में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है।

साम्प्रदायिक दंगों के 2013 और 2014 के बीच के तुलनात्मक आंकड़ों में साल 2104 में 2013 की तुलना मे कम दंगे हुए। साल 2013 मे 823 साम्प्रदायिक मामले सामने आए वहीं 2014 मे 644 मामले सामने आए। 2013 में दंगों में मरने वालों की संख्या 133 थी, जो 2014 मे घटकर 95 रह गई। 2013 मे साम्प्रदायिक दंगों में घायलों की संख्या 2269 थी जो साल 2014 घटकर 1961 हो गई थी।

कई लोगों का मानना है कि 2013 की तुलना में 2014 में दंगो की कमी का श्रेय यूपीए सरकार की देते हैं ना कि मोदी सरकार के ‘गुड गवर्नेंस’ को, क्योंकि उनका मानना है कि मई 2014 के मध्य तक यूपीए की सरकार थी।


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