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पॉल रूड हैं और मुझे विलेन बनाना चाहते हैं: नरिंदर बत्रा


नई दिल्ली,(एजेंसी)22 जुलाई। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच पॉल वान ऐस के पद से बर्खास्त करने का दावा करने के एक दिन बाद हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने मंगलवार को नीदरलैंड के इस कोच पर पलटवार करते हुए कहा कि वह अच्छा कोच नहीं है और उनके भाग्य का फैसला शुक्रवार को विशेष समिति करेगी।

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नरिंदर बत्रा

बत्रा ने पुष्टि की कि बेल्जियम के एंटवर्प में वर्ल्ड हॉकी लीग सेमीफाइनल्स में मलेशिया के खिलाफ भारत के मैच के बाद उनकी रूखा रवैया अपनाने वाले वान ऐस के साथ बहस हुई थी, लेकिन उन्होंने ने कभी उसे बर्खास्त नहीं किया। वान ऐस ने सोमवार को यह दावा किया था कि हॉकी इंडिया ने बत्रा के साथ सार्वजनिक बहस के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया है।

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि कोच के भविष्य पर फैसला करने के लिए समिति का गठन कर दिया गया है जो शुक्रवार को फैसला करेगी। बत्रा ने कहा कि उन्हें अहंकार की कोई समस्या नहीं है और अगर समिति को लगता है कि कोच को बरकरार रहना चाहिए तो वह खुद नीदरलैंड जाकर कोच को वापस लाएंगे।

‘भारत में प्रणाली बिल्कुल अलग’
बत्रा ने कहा कि वान ऐस ने महसूस कर लिया था कि उसके लिए भारत में अच्छे नतीजे देना मुश्किल है क्योंकि यहां की प्रणाली अलग है। बत्रा ने कहा, ‘पाल अच्छा मैनेजर और अच्छा प्रेरक है लेकिन अच्छा कोच नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि उसने महसूस कर लिया था कि हॉलैंड, जहां वह फॉरवर्ड कोच, डिफेंडर कोच, मिडफील्ड के लिए कोच, रणनीतिकार, वीडियो एनालिस्ट आदि था, के विपरीत यहां उसे अपने दम पर प्रदर्शन करना होगा. उसने यह महसूस कर लिया था।’

‘तानाशाह लगता हूं तो चला जाऊंगा’
बत्रा ने साथ ही कहा कि अगर सभी को लगता है कि मैं तानाशाह हूं, तो मैं चला जाऊंगा। बहस पर अपना पक्ष रखते हुए बत्रा ने कहा कि उन्होंने पहले कोच से पूछा था कि क्या वह खिलाड़ियों से बात कर सकते हैं।

घटना को याद करते हुए बत्रा ने कहा, ‘मलेशिया के खिलाफ भारत का मैच खत्म हो गया था और टीम ने विजयी लैप पूरा कर लिया था। प्रायोजक और आयोजकों ने कहा कि टीम आपसे मिलना चाहती है और मैंने उनसे पूछा कि क्या मुझे मैदान पर जाना है। उन्होंने कहा हां और मैं मैदान पर चला गया। मैं सबसे पहले पॉल से मिला और इसके बाद टीम से। हमने एक गोला बनाया और मैंने कोच से पूछा कि क्या मैं खिलाडि़यों से बात कर सकता हूं। पॉल ने हां कहा और इसके बाद मैंने उनसे बात करनी शुरू की।

उन्होंने कहा, मैं उनसे हिंदी में बात कर रहा था। मैंने 45 से 50 सेकेंड बात की और उनसे कहा कि आपके प्रदर्शन में निरंतरता की जरूरत है। आपने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराया। आपको प्रदर्शन में अधिक निरंतरता लाने की जरूरत है क्योंकि आप पिछले चार साल से एक साथ खेल रहे हो। किसी को हार पसंद नहीं है, यहां तक कि प्रायोजकों को भी नहीं। इसलिए आपको अधिक जीत दर्ज करनी होंगी।’

‘पॉल का बर्ताव रूखा था’
बत्रा ने कहा, ‘मेरा अगला वाक्य यह होता कि पिछले सभी मैचों को भूल जाइए और आने वाले मैचों के बारे में सोचिए और फाइनल में जगह बनाने की कोशिश कीजिए, लेकिन पॉल ने हस्तक्षेप करते हुए बीच में ही कहा मैं कोच हूं और आप जा सकते हैं। उसका बर्ताव काफी रूखा था।’ उन्होंने कहा, ‘इसके बाद मैं यह कहते हुए चला गया कि हम इस बारे में बाद में बात करेंगे, हमें इस बारे में बात करने की जरूरत है पॉल। इसके बाद भारत ने दो और मैच खेले. यहां तक कि महिला टीम भी खेल रही थी।। मैंने वे मैच देखे लेकिन पॉल के पास मुझे मिलने के लिए आने का समय नहीं था।’


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