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वरिष्‍ठ लेखक व पत्रकार खुशवंत सिंह नहीं रहे , प्रधानमंत्री ने शोक जताया


khushwant singh

नई दिल्ली,एजेंसी-20 मार्च। देश के जाने-माने वरिष्‍ठ पत्रकार खुशवंत सिंह का निधन हो गया है. उन्होंने दिन के 12:55 मिनट में अंतिम सांस ली. उनके पुत्र राहुल सिंह ने उनके निधन की जानकारी दी. उनके पुत्र और पत्रकार राहुल सिंह ने बताया कि उन्होंने सुजान सिंह पार्क स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली. राहुल ने बताया कि उन्होंने जीवन को पूरी जिंदादिली से जिया.उन्हें सांस लेने में कुछ परेशानी थी.

पत्रकार के तौर पर खुशवंत सिंह ने ‘इलस्ट्रेटेड वीकली आफ इंडिया’ का संपादन किया जिसका प्रकाशन अब बंद हो चुका है. इसके बाद वह ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ अखबार के भी संपादक रहे. उनका साप्ताहिक स्तम्भ ‘विद मैलिस टुवर्ड्स वन एंड ऑल’ काफी लोकप्रिय हुआ और कई समाचारपत्रों में छपता रहा. दिवंगत इंदिरा गांधी की सरकार की ओर से सिंह को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था.वह 1980 से 86 तक सांसद रहे.

खुशवंत सिंह को 1974 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.1984 में स्वर्ण मंदिर में सेना के प्रवेश के विरोध में उन्होंने यह सम्मान लौटा दिया था.2007 में उन्हें पद्म विभूषण से विभूषित किया गया.सिंह ने ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ और ‘आई शैल नाट हियर द नाइटिंगल’ जैसी लोकप्रिय पुस्तकें लिखीं.

खुशवंत सिंह ने दिल्ली में आखिरी सांस ली. अंतिम समय में उनके पुत्र राहुल सिंह और पुत्री उनके साथ थे. एक पत्रकार, स्तंभकार और एक बेबाक लेखक के रुप में उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली और अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुस्कारों से सम्मानित भी किया गया.

खुशवंत सिंह का जन्म 2 फरवरी, 1915, हदाली, पंजाब, पाकिस्तान में हुआ था. वे एक प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक, उपन्यासकार और इतिहासकार थे. एक पत्रकार के रूप में इन्हें बहुत लोकप्रियता मिली भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में विदेश सेवा के सम्माननीय पद पर भी खुशवंत सिंह ने काम किया.

उन्हें 1974 पद्म भूषण और 2007 में ‘पद्म विभूषण’ से भी इन्हें सम्मानित किया गया था. खुशवंत सिंह के पिता का नाम सर सोभा सिंह था, जो अपने समय के प्रसिद्ध ठेकेदार थे. खुशवंत सिंह ने गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर और कैम्ब्रिज यूनिर्विसटी से शिक्षा पायी थी. इसके बाद लंदन से ही कानून की डिग्री ली. उसके बाद तक वे लाहौर में वकालत करते रहे. खुशवंत सिंह का विवाह कंवल मलिक के साथ हुआ.

इनके एक पुत्र और एक पुत्री हैं. एक पत्रकार के रूप में भी खुशवंत सिंह ने अच्छा नाम अर्जित किया और पत्रकारिता में बहुत ख्याति अर्जित की. 1951 में वे आकाशवाणी से जुड़े थे और 1951 से 1953 तक भारत सरकार के पत्र योजना का संपादन किया. मुंबई से प्रकाशित प्रसिद्ध अंग्रेज़ी साप्ताहिक इल्लस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया के और न्यू डेल्ही के संपादक वे 1980 तक थे.

उनके प्रसिद्ध उपन्यासों में शामिल हैं- डेल्ही, ट्रेन टू पाकिस्तान, दि कंपनी ऑफ वूमन. वर्तमान संदर्भों और प्राकृतिक वातावरण पर भी उनकी कई रचनाएं हैं. दो खंडों में प्रकाशित सिखों का इतिहास उनकी प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति है. साहित्य के क्षेत्र में पिछले सत्तर वर्ष में खुशवंत सिह का विविध आयामी योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है.

साल 1947 से कुछ सालों तक खुशवंत सिंह जी ने भारत के विदेश मंत्रालय में विदेश सेवा के महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. साल 1980 से 1986 तक वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे.


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