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इमारतो में सन्नाटा-माल में बहार


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शिवानी निगम/खबर इंडिया नेटवर्क-लखनऊ। जमाना बदल रहा है, सोच बदल रही है, पहनावा बदल चुका है और युग भी बदल रहा है। अब युवा इमामबाड़ा और रूमी दरवाजा भूल गये है। अब जगमगाते मालो ने उनकी जगह ले ली है। युवा ही नही व्यस्क भी मालो के शौकीन हो गये है और हो भी क्यो न, एक छत के नीचे पूरी दुनिया जो मिलती है। हम चिल्लाते है महंगाई है, महंगाई है लेकिन माल में घुसते ही महंगाई गायब हो जाती है। सरकार तो इन ऐताहासिक इमारतों का ख्याल रखती नही, हम लोगों के जहन से भी यह गायब हो चुके है। lucknow mall
मॉल कल्चर का नशा आज की इस पीढ़ी पर इस क़दर छाया है कि यह लखनऊ की तहज़ीब और यहाँ के ऐतिहासिक इमारतों को भूल चुके हैं। वही इस मसले में जाफर मीर अब्दुल्लाह कहते है कि ‘आज की पीढ़ी तड़क भड़क पसंद करती है इसलिए माल की तरफ भागती है। पुरानी इमारतें सिर्फ प्रेमी जोड़ो की जगह बन गर्इ है। आज युवा गाडि़याँ पाते ही नक्शे मारने लगते है और माल नक्शा मारने के लिए एक अच्छी जगह है। इन सब का जिम्मेदार मै बच्चो के माता पिता को मानता हूँ। इन ऐताहासिक इमारतों की तरफ अब रूख वही करते है जिनहे शांति और सुकून चाहिए होता है। हाँलाकि प्रेमी जोड़ो ने इन ऐताहासिक जगहों को अश्लील हरकते करने का स्थान बना दिया है और वहाँ के गार्ड भी कुछ पैसों में आँखे बन्द करने को तयार हो जाते है’।

वहीँ दूसरी ओर आज की युवा पीढ़ी तो इनके बारे में न तो जानती है और न ही जानना चाहती है। उनके लिए यह एक बोरिंग जगह से कम नहीं है। इन युवाओं के अपने बहाने और इनका अपना नजरिया बिलकुल अलग है । बी-टेक के छात्र अखिल कहते है कि ‘ब्रैंड का जमाना है इसलिए घूमना भी ब्रान्डेड जगह पसंद करता हूँ । पार्क में घूमने जाओ तो ऐसे लोग मिलते है जो समाज के लिए हानिकारक होते है’।
वही श्वेता कहती है कि लड़कियाँ माल में सुरक्षित महसूस करती है। दोस्तों के साथ मौज मस्ती के साथ अच्छा खाना भी हो जाता है, इसलिए मॉल्स ज्यादा पसंद है ।
इस विषय पर अनिल और रीता सिंह कहते है पुरानी इमारते अब पुरानी हो चुकी है। सरकार ने इनका ध्यान रखना छोड़ दिया है, उपर से हमारे बच्चों को मॉल्स ही पसंद है, इसलिए हम भी इनके साथ चले आते है।

यह साफ़ है कि लखनऊ और लखनऊ की पीढ़ी दो हिस्सों में बट चुकी है। पुरानी पीढ़ी इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा, भूल भूलर्इया और घंटा-घर पसंद करती है तो वहीँ आज की युवा पीढ़ी को सहारागंज, फन माल औऱ फीनिक्स ज्यादा पसंद है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि अंग्रेज जो विदेशों से आते है उन्हें ऐताहासिक इमारते ही लुभाती है। लखनऊ की ही युवा पीढ़ी और यहाँ की सरकार को इस मसले को गंभीरता से लेना होगा। यह ऐतिहासिक इमारते जो लखनऊ ही नहीं बल्कि इस देश कि शान हैं आज उन्हें ही नज़र अंदाज़ किया जा रहा है।


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