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हंगामे के बीच अनुपूरक बजट पेश, सदन कल तक के लिए स्थगित


लखनऊ,(एजेंसी)18 अगस्त। मानसून सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया जिसके चलते प्रश्न प्रहर नहीं हो सका। भारी शोर शराबे व वेल में मौजूद विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच दोनों सदनों में अनुपूरक बजट पेश किया गया। एजेंडे के कुछ अन्य विधायी कार्य निपटाने के बाद सदन मंगलवार 11 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

विधान सभा व विधान परिषद को मंगलवार तक स्थगित किए जाने के बावजूद भाजपा सदस्य वेल में धरने पर बैठ गए। भाजपा विधान मंडल दल के नेता सुरेश कुमार खन्ना का कहना था कि कानून व्यवस्था सहित अनेक ज्वलंत मुद्दों को लेकर पूरा प्रदेश उद्धेलित है और सदन में इन सभी विषयों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। इसके लिए सत्र को कम से कम दो सप्ताह तक चलाया जाना चाहिए लेकिन सरकार इन मुद्दों पर बहस से बचना चाहती है इसलिए सत्र की अवधि कम रखी गई है।

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सोमवार को विधान सभा की कार्यवाही शुरू होते ही बसपा, भाजपा, कांग्रेस व रालोद के सदस्य वेल में आ गए और सदन सरकार विरोधी नारों से गूंज उठा। सदस्यों के हाथों में सरकार विरोधी नारों से लिखे हुए बैनर थे। विपक्षी सदस्यों द्वारा लहराए जा रहे बैनरों में ‘कानून व्यवस्था ध्वस्त है, यूपी की जनता त्रस्त हैÓ, ‘गुंडे माफिया व अपराधी चला रहे सरकार सपा की, ‘अखिलेशजी होश में आओ, जंगलराज पर रोक लगाओ जैसे नारे लिखे हुए थे।

विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय की हंगामा न करने की अपील बेअसर होने पर उन्होंने 11.05 पर कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद कार्यवाही शुरू होने पर भी नजारा वही था जिस पर स्पीकर ने सदन 12.20 तक स्थगित कर दिया। प्रश्न प्रहर के हंगामे की भेंट चढ़ जाने के बाद जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विपक्षी सदस्यों के बदस्तूर जारी हंगामे के बीच अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। हंगामा जारी रहा लेकिन विधान सभा अध्यक्ष ने एजेंडे के आइटम बिंदुवार निपटाने शुरू कर दिए और इसके बाद सदन को मंगलवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

उधर, विधान परिषद की कार्यवाही भी विपक्षी दलों के हंगामे की भेंट चढ़ गई। 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बसपा, भाजपा, कांग्रेस और रालोद के सदस्य हाथों में बैनर लेकर सभापति गणेश शंकर पांडेय के आसन के सामने आकर सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। बसपा सदस्य कागज की टोपियां पहने हुए थे जिन पर नारे लिखे हुए थे। बसपा दलितों को जमीन बेचने का अधिकार देने, ध्वस्त कानून व्यवस्था व बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार पर हमलावर रही तो वहीं भाजपा ने दैवी आपदा से प्रभावित किसानों को मुआवजा न मिलने और सरकारी भर्तियों में धांधली को लेकर सरकार को घेरा। कांग्रेस ने गन्ना किसानों का बकाया मूल्य भुगतान और डीजल-पेट्रोल पर न्यूनतम वैट की वसूली व महंगाई के मुद्दों को उठाया।

रालोद ने किसानों के बकाये गन्ना मूल्य का भुगतान न होने को लेकर विरोध जताया। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। फिर कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दल सदन के वेल में आकर नारेबाजी करने लगे जिससे सभापति को सदन की कार्यवाही दोपहर 12.20 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। फिर कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दल के सदस्य सभापति के आसन के सामने आकर जोरशोर से नारेबाजी करने लगे।

हंगामे के बीच ही नेता सदन अहमद हसन ने वित्तीय वर्ष 2015-16 का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। इसके बाद नेता सदन ने ‘सफाई कर्मचारी नियोजन और शुष्क शौचालय सन्निर्माण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1993 के निरसन को लेकर संकल्प प्रस्तुत किया। सभापति ने इस पर सदन की सहमति प्राप्त की। इस संकल्प को सोमवार को ही विधान सभा की भी सहमति मिल गई। हंगामें के बीच ही एजेंडे का कामकाज निपटाकर सभापति ने सदन की कार्यवाही मंगलवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी हालांकि भाजपा सदस्य इसके बाद भी विरोधस्वरूप वेल में देर तक बैठे रहे।


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