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राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश यूपी का जैन समुदाय


लखनऊ,(एजेंसी)24 अगस्त। राजस्थान हाईकोर्ट के जैन समुदाय की संथारा प्रथा के खिलाफ निर्णय को लेकर उत्तर प्रदेश में जैन समाज लामबंद हो गया है। राजस्थान में कल से शुरू हुआ जैन समुदाय का विरोध उत्तर प्रदेश तक आ गया है। वेस्ट यूपी के आगरा, मेरठ, बागपत, फिरोजाबाद के साथ अन्य जगह पर जैन समुदाय ने इन निर्णय के खिलाफ बाजार बंद रखा है। लोग काली पट्टी बांधकर जगह-जगह पर जुलूस निकालकर इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

आगरा के एत्मादपुर में राज्यस्थान हाईकोर्ट के जैन मुनियों के संथारा पर लगाई गई रोक के विरोध में समस्त व्यापारियों ने प्रतिष्ठान बंद रखे। इसके कारण शहर के मुख्य बाजारों में सन्नाटा पसरा है। जैन समुदाय के सैकड़ों पुरुषों के साथ महिलाएं व बच्चे भी काली पट्टी बांध कर मौन जुलुस निकाल रहे हैं। इन लोगों ने . उसके बाद एसडीएम को एक ज्ञापन भी सौंपा है। छीपीटोला में भी संथारा को आत्महत्या करार देने पर जैन समाज की सभा शुरू। जैन मुनियों के नेतृत्व में थोड़ी देर बाद जुलूस भी निकाला जाएगा।

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मेरठ में संथारा प्रथा को आत्महत्या बताने के विरोध में जैन समुदाय के लोगों ने आज अपना सारा कारोबार बंद रखा है। दुकानों के साथ इस समुदाय के सारे प्रतिष्ठान बंद हैं। यह लोग इस फैसले के खिलाफ शहर में जगह-जगह पर मौन जुलूस निकाल रहे हैं। फिरोजाबाद के टूंडला में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में जैन समुदाय ने दुकानें बंद कर जगह-जगह पर मौन जुलूस निकाला है।

टूंडला के सभी बाजार बंद हैं।
मैनपुरी में संथारा प्रथा पर रोक के विरोध में जैन समुदाय के लोगों ने बाजार बंद रखने के साथ ही बड़े जैन मंदिर से मौन जुलूस निकाला है। मथुरा में भी संथारा प्रथा रोकने के विरोध में जैन समाज के लोग मण्डी रामदास में एकजुट हो रहे हैं। इनका फैसला बाजार बंद रखने के साथ ही मौन जुलूस निकालने का है। इनका मानना है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने संथारा को आत्महत्या की श्रेणी में रखकर भयंकर अपराध किया है। आत्महत्या तनाव और कुंठा की स्थिति में की जाती है, जबकि संथारा प्रथा आस्था का विषय है। यह आवेश में किया कृत्य नहीं,बल्कि सोच-समझकर लिया गया व्रत है। बागपत के खेकड़ा में भी जैन समुदाय के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया है।

गोरखपुर में जैन समाज ने आज धर्म बचाओ आंदोलन के क्रम में मौन पद यात्रा निकाली। यह पदयात्रा टाउनहाल से निकलकर कलेक्ट्रेट तक पहुंची और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौापकर जैन धर्म को बचाने की मांग की। इससे पहले जैन समाज के लोग टाउन हाल पर एकत्र हुए। वक्ताओं ने कहा कि जैन धर्म इस समय संकट में है। उसे बचाने की सख्त जरूरत है। कानपुर में संथारा पर राजस्थान हाईकोर्ट के रोक लगाने के खिलाफ स्थानीय जैन समाज के लोगों ने मुख्य मार्गों पर मौन जुलूस निकाला।

क्या है ये संथारा
जैन समाज में यह हजारों साल पुरानी प्रथा है। इसमें जब व्यक्ति को लगता है कि उसकी मृत्यु निकट है तो वह खुद को एक कमरे में बंद कर खाना-पीना त्याग देता है। मौन व्रत रख लेता है। इसके बाद वह किसी भी दिन देह त्याग देता है।

कितना व्यापक है
वैसे इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन जैन संगठनों के मुताबिक हर साल 200 से 300 लोग संथारा के तहत देह त्यागते हैं। अकेले राजस्थान में ही यह आंकड़ा 100 से ज्यादा है।

क्या है फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने नौ वर्ष की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। जैन धर्म की सैकड़ों सालों से प्रचलित संथारा/सल्लेखना प्रथा को आत्महत्या के बराबर अपराध बताया। कोर्ट ने राज्य सरकार को संथारा पर रोक लगाने का आदेश देते हुए कहा है कि संथारा लेने और संथारा दिलाने वाले, दोनों के खिलाफ आपराधिक केस चलना चाहिए।

संथारा लेने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 309 यानी आत्महत्या का अपराध का मुकदमा चलना चाहिए। संथारा के लिए उकसाने पर धारा 306 के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। निखिल सोनी ने 2006 में याचिका दायर की थी। उनकी दलील थी कि संथारा इच्छा-मृत्यु की ही तरह है। इसे धार्मिक आस्था कहना गलत है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुनील अंबवानी और जस्टिस वीएस सिराधना की बेंच ने अप्रैल में सुनवाई पूरी कर ली थी। फैसला अब आया है।

कोर्ट ने गलत क्यों माना
कोर्ट ने जिस याचिका पर ये फैसला दिया, उसमें कहा गया था कि संथारा सती प्रथा की ही तरह है। जब सती प्रथा आत्महत्या की श्रेणी में आती है तो संथारा को भी आत्महत्या ही माना जाए। अदालत ने इस तर्क को माना है। कोर्ट ने कहा कि जैन समाज यह भी साबित नहीं कर पाया कि यह प्रथा प्राचीनकाल से चली आ रही है।


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