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मुलायम भी खेल रहे मुस्लिम कार्ड


Muslim and mulayam

मुरादाबाद,एजेंसी-10 अप्रैल। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने बृहस्पतिवार को यहां चुनावी रैली में मुस्लिम मतों के लिए अपना अंतिम अस्त्र चलाया। जामा मस्जिद पार्क में उन्होंने न केवल मुसलमानों व किसानों को सगा भाई बताया, बल्कि तीसरे मोर्चे में खुद की भूमिका को स्पष्ट करते हुए इसका एक बड़ा कारण भी मुसलमानों को ही ठहराया।
उन्होंने समझाते हुए कहा तीसरे मोर्चे को समर्थन किसी पद को पाने के लिए नहीं, बल्कि मुस्लिमों के लिए करूंगा। समर्थन के बदले साल भर के अंदर मुस्लिमों की समस्याओं का समाधान चाहूंगा। फिर समर्थन की बात को आगे बढ़ाऊंगा। मुस्लिमों को किसानों के साथ जोड़ मुलायम ने किसान एवं मुसलमान को सगा भाई करार दिया। उन्होंने जवानों पर तो कुछ नहीं बोला, लेकिन देश के विकास में मुसलमानों तथा किसानों को अस्सी फीसद के योगदान का श्रेय दे दिया। उन्होंने कहा कि किसान अगर अन्न पैदा करता है तो मुसलमान सिलाई से लेकर कढ़ाई का काम करता है। विश्व की अस्सी फीसद शिल्पकारी मुस्लिम हाथों से ही होती है। फिर भी मुसलमानों की दशा दलितों से भी गई गुजरी है।
उन्होंने सच्चर कमेटी का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमानों को सहयोग की जरूरत है जो केवल सपा कर सकती है। इसके लिए तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी। सरकार तब बनेगी जब यूपी मजबूत होगा और यूपी तब मजबूत होगा जब मुलायम सिंह यादव का हाथ मजबूत होगा।
अपने लिए वोट मांगते हुए मुलायम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अस्सी सीटे हैं और गुजरात में 26 सीटें। 26 सीट वाला 80 सीट को आंख नहीं दिखा सकता। उन्होंने गोधरा का नाम लिए बगैर कहा कि वहां की महिलाओं को बेइज्जत किया गया। मुस्लिमों का कत्लेआम किया गया। इसके लिए वहां के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी दोषी हैं। सपा किसी भी कीमत पर उनको पीएम नहीं बनने देगी। इसपर और जोर देते हुए मुलायम ने कहा कि अब तो कांग्रेस भी कहने लगी है कि मोदी को अगर कोई रोक सकता है तो वह मुलायम सिंह यादव हैं।
सपा मुखिया ने कहा कि 20 वर्ष में केंद्र में किसी एक दल की सरकार नहीं बनी। इस बार भी नहीं बन रही है। न तो भाजपा की और न कांग्रेस की। सरकार तीसरे मोर्चे की बनेगी जो मुसलमानों-किसानों के लिए काम करेगी। इससे पहले मुलायम ने अमरोहा की सभा में आजम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि विरोधी आजम के बयान पर हमलावर हो रहे हैं। आजम खां ने कुछ भी गलत नहीं कहा है। हर लड़ाई में मुसलमानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। पहली लड़ाई में शहीद अब्दुल हमीद का नाम अभी तक लोगों को याद है।


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