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वाराणसी : मुख़्तार अंसारी नहीं लड़ेंगे चुनाव


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लखनऊ/वाराणसी,एजेंसी-11 अप्रैल। उत्तर प्रदेश में पूर्वाचल के बाहुबली नेता और विधायक मुख्तार अंसारी वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रत्याशी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगे। गुजारात के मुख्यमंत्री मोदी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के अलावा इस सीट पर कांग्रेस की ओर से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अजय राय मैदान में हैं, जिनके खिलाफ 17 मुकदमे दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) ने यहां से कैलाश चौरसिया को उम्मीदवार बनाया है।
कौमी एकता दल के राष्ट्रीय संरक्षक अफजाल अंसारी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि मुख्तार अंसारी वाराणसी सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि किसी साझा उम्मीदवार को वह अपना समर्थन देंगे। बयान में अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वह ‘साझा उम्मीदवार’ कौन होगा।
बयान में हालांकि यह कहा गया है कि धर्मनिरपेक्ष दलों से बातचीत हो रही है और किसी साझा उम्मीदवार को समर्थन दिया जाएगा।
पिछले आम चुनाव में मुख्तार अंसारी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को कड़ी टक्कर दी थी और वह केवल 18 हजार मतों से चुनाव हारे थे। मुख्तार के राह से हट जाने के बाद अब इस सीट पर मोदी, केजरीवाल, अजय राय और कैलाश चौरसिया के बीच चौकोना मुकाबला त्रिकोणात्मक संघर्ष देखने को मिलेगा। अगर कोई साझा धर्मनिरपेक्ष उम्मीदवार घोषित होता है तो मोदी को कड़ी टक्कर मिल सकती है।
मोदी अगर जीत जाते हैं तो उन्हें दो में से एक सीट छोड़नी ही होगी। कयास लगाया जा रहा है कि मोदी अपने गृह प्रदेश गुजरात की वडोदरा सीट न छोड़कर वाराणसी की सीट ही छोड़ेंगे और ऐसे में यहां कुछ ही समय बाद फिर से चुनाव होगा।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही कौमी एकता दल ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मुलायम सिंह को पत्र लिखकर एक साझा उम्मीदवार खड़ा किए जाने की मांग की थी, लेकिन किसी की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद कौमी एकता दल ने फैसला लिया कि मुख्तार अंसारी को मैदान से हट जाना चाहिए, ताकि धर्मनिरपेक्ष मत बंटने न पाए। मुख्तार और अजय राय में पुरानी दुश्मनी है, इसलिए राय को अल्पसंख्यकों का मत मिलने की संभावना कम है। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद सपा से चिढ़े अल्पसंख्यक मतदाता चौरसिया को शायद ही पसंद करेंगे। ऐसे में केजरीवाल को साझा उम्मीदवार ‘मान लिए जाने’ की पूरी संभावना है।


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