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जासूसी कांड पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने


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शिमला,एजेंसी-3 मई | गुजरात में एक महिला की जासूसी कराने के आरोप की जांच का मुद्दा शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बनती नजर आई। कांग्रस नीत केंद्र सरकार ने जहां मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग गठित किए जाने की घोषणा की वहीं भाजपा ने कहा है कि अंतिम समय में बुरी नीयत से लिए गए किसी भी फैसले को अगली सरकार नहीं ढोएगी।

केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने शुक्रवार को शिमला में कहा कि गुजरात में एक महिला की जासूसी कराने के आरोप की जांच के लिए केंद्र सरकार शीघ्र ही एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति करेगी। आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर एक महिला की जासूसी की गई।

शिंदे ने यहां संवाददाताओं से कहा, “सरकार जल्दी ही एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को जासूसी कांड की जांच करने के लिए नियुक्ति करेगी।” उन्होंने कहा, “केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जासूसी कांड की जांच करने के लिए एक न्यायाधीश की नियुक्ति करने का फैसला लिया है..इस मामले में काम जारी है।”विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा नेता मोदी ने महिला की गतिविधि पर नजर रखने का आदेश दिया था।

शिंदे ने कहा, “मैं इस बात से डरा हुआ हूं कि जब एक मुख्यमंत्री महिला की जासूसी करा सकता है तो उस स्थिति में देश की महिलाओं का क्या होगा जब वही शख्स प्रधानमंत्री बन जाएगा।”यह पूछे जाने पर कि इस घड़ी किसी न्यायाधीश की नियुक्ति आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं माना जाएगा, उन्होंने कहा, “नहीं ऐसा नहीं होगा। इस संबंध में फैसला आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले ही ले लिया जा चुका था।”

उधर जासूसी कांड की सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने की शिंदे की घोषणा के थोड़ी देर बाद ही भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा कि केंद्र में बनने वाली अगली सरकार को मौजूदा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा अंतिम समय में बुरी मंशा से लिए गए फैसलों की समीक्षा करने का अधिकार होगा। इस आम चुनाव में अपनी जीत पक्की समझ रही भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को सत्ता के करीब देख हताश होने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नीत संप्रग मान चुकी है कि वह सत्ता में नहीं लौट रही है और इसीलिए उसने हाल के दिनों में तीन असफल प्रयास किए हैं। पहला दो नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति, दूसरा लोकपाल की नियुक्ति के लिए तलाश समिति का कोरम पूरा करने का प्रयास और तीसरा जासूसी कांड की जांच के लिए न्यायाधीश की नियुक्ति। उन्होंने कहा, “मुझे इस बात पर पूरा संदेह है कि इन कदमों में से कोई भी सिरे चढ़ सकेगा।”

उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा, “यदि इसके बाद भी ऐसा किया जाता है तो भावी सरकार को बुरी नीयत से लिए गए ऐसे अंतिम समय के फैसले की समीक्षा करने का अधिकार होगा।”


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