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दोस्ती साबित करें मोदी तो राजनीति से ले लूंगा संन्यास: अहमद पटेल


Ahmed patel

नई दिल्ली,एजेंसी-3 मई। बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी द्वारा दूरदर्शन को दिए इंटरव्यू पर विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। मोदी द्वारा प्रियंका गांधी को कथित रूप से ‘बेटी जैसी’ कहने वाले हिस्से को काटे जाने के नाम पर शुरू हुई जुबानी जंग के बाद अब यह पता चला है कि इंटरव्यू के उस हिस्से को भी काट दिया गया, जिसमें मोदी ने सोनिया गांधी के करीबी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल को अपना ‘अच्छा दोस्त’ कहा था।

मोदी का यह इंटरव्यू दिखाने से पहले उस हिस्से को काट दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि अहमद पटेल उनके अच्छे दोस्त रहे हैं, लेकिन अब उनके कॉल उठाना बंद कर दिया है। हालांकि, शुक्रवार को अहमद पटेल ने मोदी के दावे को बेबुनियाद और हास्यास्पद करार दिया।

उन्होंने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा,’मैं ऐसे इंसान से खुद की किसी भी प्रकार की नजदीकी से साफ इनकार करता हूं, जो देश को बांटने जा रहा है। अगर यह साबित हो जाए कि मैं नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद कभी उनके घर या दफ्तर गया था तो मैं राजनीतिक जीवन से संन्यास ले लूंगा।’

अहमद पटेल ने यह भी कहा, ‘नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद मैं उनसे सिर्फ एक बार मिला हूं। वह मुलाकात भी वर्ष 2008 में अहमदाबाद में हुए सीरियल धमाकों के बाद एयरपोर्ट पर हुई थी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘जिस आदमी के अपनी ही पार्टी में कोई मित्र नहीं हैं, वह चिर-प्रतिद्वंद्वियों से मित्रता का दावा कर रहा है। अगर वह लालकृष्ण आडवाणी को भोजन पर आमंत्रित नहीं कर सकते, तो वह मुझे कैसे बुला सकते हैं?’

इससे पहले इंटरव्यू में मोदी ने कहा, ‘अहमद भाई कांग्रेस में मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से रहे हैं, लेकिन अब नहीं। मेरी उनसे अच्छी दोस्ती रही है और मैं चाहता था कि यह ऐसे ही बनी रहे… लेकिन अब वह मुझसे दूरी बनाए रखते हैं और मेरे कॉल भी नहीं लेते हैं।’ मोदी ने कहा, ‘हम उन्हें बाबू भाई बुलाते थे और कई बार उनके यहां खाना खाने भी जाता था।’

इस बारे में जब हमने अहमद पटेल से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, ‘यह चुनाव का वक्त है और लोग कुछ भी बोलते हैं। मैं वैसे तो इस पर कुछ नहीं बोलता, लेकिन यह उनकी कुटिल चाल का हिस्सा है, इसलिए मैं यह बता देना चाहता हूं कि जहां तक मुझे याद है मैंने एक बार 1980 में उनके साथ खाना खाया था। यह बात दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी को पता थी। मैं पहले भी इस बात को स्पष्ट कर चुका हूं। उनके 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने उनके साथ एक कप चाय तक नहीं पी है।’

 


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