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शीर्ष अधिकारियों की जांच में सरकार की मंजूरी जरूरी नहीं


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नई दिल्ली,एजेंसी-6 मई | सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम की धारा 6ए को अमान्य घोषित कर दिया और कहा कि शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ जांच के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी नहीं है। धारा 6ए के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को संयुक्त सचिव और भ्रष्टाचार के मामले में जांच से पूर्व सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर.एम.लोढ़ा, न्यायमूर्ति ए.के.पटनायक, न्यायमूर्ति सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय, न्यायमूति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलिफुल्ला की संवैधानिक पीठ ने कहा कि धारा 6ए भेदभाव करती है और नौकरशाही को दो तरह के अधिकारियों के बीच बांटकर उच्च पदों पर नियुक्त अधिकारियों का बचाव करती है। इसलिए यह अमान्य घोषित की जाती है। न्यायालय ने कहा कि सरकार एक को छोड़कर दूसरे का बचाव नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि भ्रष्ट कर्मचारी, भ्रष्ट कर्मचारी होता है और भ्रष्टाचार देश का दुश्मन है। न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बातें कहीं।


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