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बुरे फंसे ‘मनमोहन सिंह’,विजय माल्या का गारंटर बनकर


vijay_malya_20_05_2016पीलीभीत। विभिन्न बैंकों के हजारों करोड़ रुपये के डिफाल्टर और शराब कारोबारी विजय माल्या के लिए स्वीकृत एक लोन के मामले में पहले एक किसान को गारंटर ठहरा दिया। उसके दो बैंक खाते भी सीज कर दिए। लेकिन मामला पकड़ में आया तो बैंक बैकफुट पर आ गया। जांच में साफ हुआ कि किसान का विजय माल्या से कोई लेना-देना नहीं था। न ही किसी ऋण में जमानत ही दी।

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के बिलसंडा ब्लॉक क्षेत्र के गांव खजुरिया नबीराम निवासी मनमोहन सिह किसान हैं। आठ एकड़ कृषि भूमि है। बकौल मनमोहन, वह मुंबई नहीं गए। विजय माल्या को नहीं जानते। बैंक ऑफ बड़ौदा की नांद गांव में स्थित शाखा में उनका बचत खाता है। दूसरा बैंक खाता उन्होंने फसली ऋण के लिए खुलवा रखा है। इस खाते से उन्होंने रबी सीजन के लिए चार लाख रुपये का ऋण लिया था।

गेहूं की फसल तैयार होने के बाद उन्होंने फसली ऋण का ब्याज करीब 32 हजार रुपये जमा कर दिए। इस बीच उनके दोनों बैंक खाते सीज कर दिए गए। बैंक से पूछताछ करने पर बताया गया कि हजारों करोड़ रुपये के डिफाल्टर विजय माल्या का कोई लोन स्वीकृत हुआ था, जिसमें उन्हें गारंटर दर्शा दिया गया। शाखा प्रबंधक मांगेराम कहते हैं कि मनमोहन जैसा छोटा किसान इतने बड़े कारोबारी के भारी भरकम ऋण का गारंटर कैसे बन सकता है। उन्होंने इस बाबत ई-मेल भेजकर रीजनल कार्यालय को स्थिति से अवगत करा दिया। शुक्रवार को रीजनल कार्यालय से आदेश प्राप्त हो गया है कि संबंधित किसान के दोनों खातों से रोक हटा दी जाए।

 

यह था मामला

पिछले साल सितंबर में नांद शाखा के प्रबंधक के पास मुंबई रीजन दफ्तर से मेल आया कि किसान मनमोहन सिह माल्या के एक लोन में गारंटर हैं। उनका खाता सीज कर दिया जाए। मेल पर संज्ञान लेते हुए शाखा प्रबंधक ने किसान के दोनों खाते सीज कर दिए। हालांकि, इस दौरान यह साफ नहीं हो सका कि आखिर मुंबई ब्रांच के पास मनमोहन का खाता संख्या व नाम पहुंचा कैसे? इस बाबत बैंक अधिकारी भी चुप्पी साधे हैं। संकेत, गारंटर के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े के लग रहे हैं।

 

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