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माँ और बेटी दोनों को एक ही लड़की से हुआ इश्क…..


jkgk,holgolh]_574fd82a5e5fcएजेंसी/ पंजाब : कहते है की प्यार अंधा होता है लेकिन इंसान प्यार के जूनून में इतना गिर सकता है की वह अपने ही कलेजे के टुकड़े का खून कर दे. मां और बेटी को एक ही लड़के से प्यार हो गया. यह बात मां को बर्दाश्त नही हुई और उसने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर अपनी ही बेटी को मौत के घाट उतार दिया.

पंजपीर नगर में 23 मई को 17 वर्षीय युवती दीक्षा कंबोज कि लाश पंखे पर लटकती हुई मिली. पुलिस इस मामले को आत्महत्या मानकर चल रही थी. लेकिन जब इस मामले में तफ्तीश आगे बढ़ी तो रिश्तों कि चिंदियाँ बिखर गई. महज 7 दिनों में पुलिस ने इस मामले का पर्दाफाश करते हुए अपराधियों को बेनकाब कर दिया.

मुजरिम कोई और नहीं बल्कि दीक्षा की मां व उसका प्रेमी विजय ही निकला जिसका नाम ब्लेड से दीक्षा ने भी अपने हाथ पर गोदा हुआ था यानी विजय को मंजू रानी के साथ-साथ उसकी बेटी दीक्षा भी प्यार करती थी. यह बात मां को बर्दाश्त नहीं हुई जिसके चलते प्यार में अंधी हुई मां ने अपने आशिक के साथ मिलकर अपनी ही बेटी को मौत के घाट उतार दिया तथा इसका सारा आरोप दीक्षा के दादा-दादी, ताया-ताई व बुआ आदि पर लगा दिया, जिनके बारे में हत्या से 3 दिन पूर्व मंजू ने दीक्षा को इमोशनली ब्लैकमेल करके उससे एक सुसाइड नोट लिखवा लिया था जिसमें इन सभी के नाम लिखे होने के साथ-साथ इन्हें अपनी मौत का कारण बताया था.

एस.पी.(डी) नरेन्द्र पाल सिंह वङ्क्षडग व नगर थाना प्रभारी बलकार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शिकायत करने वाला ही अपराधी निकला. उनके मुताबिक 27 वर्षीय विजय पहले सऊदी अरब में काम करता था. इस दौरान उसकी फेसबुक पर मंजू के साथ दोस्ती हो गई. सऊदी अरब में वीजा खत्म होने के बाद विजय रेवाड़ी हरियाणा के निकट स्थित अपने गांव माईम चला आया लेकिन एक जनवरी 2015 को मंजू ने विजय को अपने घर बुला लिया. जिसके बाद से विजय उनके घर रहने लगा तथा दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी स्थापित हो गए. एक दिन दीक्षा ने अपनी मां को विजय के साथ आपत्तिजनक हालत में भी देख लिया था लेकिन शातिर विजय ने दीक्षा को भी अपने प्रेम जाल में फंसा लिया और उससे शादी तक करने का वायदा कर लिया.

दीक्षा का विजय के प्रति बढ़ता प्रेम उसकी मां को भी नजर आने लगा जो कि उसके बर्दाश्त से बाहर था इसलिए मंजू ने दीक्षा को डिप्रैशन की गोलियां देनी शुरू कर दीं तथा एक साजिश के तहत उससे एक सुसाइड नोट भी लिखवा लिया. 23 मई को जब मंजू ने ब्लेड से दीक्षा के हाथ पर विजय लिखा देखा और उसके साथ उसने खून से लिखी हुई एक चिट्ठी भी देखी तो वह अपने आपे से बाहर हो गई और उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर दीक्षा का गला घोंट कर उसे मार डाला तथा उसकी लाश को पंखे पर लटका दिया ताकि यह मामला आत्महत्या का लगे. दीक्षा से सुसाइड नोट मंजू पहले ही लिखवा चुकी थी जिसके जरिए वह अपने ससुराल पक्ष की सारी जायदाद पर कब्जा करना चाहती थी.


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