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मोदी को लेकर असमंजस में अमेरिका


Obama Modi
वाशिंगटन,एजेंसी-15 मई। भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं के मद्देनजर अमेरिका असमंजस की स्थिति में फंस गया है. उसे यह समझ नहीं आ रहा कि जिस व्यक्ति को उसने वर्षो से वीजा देने के मामले में प्रतिबंधित कर रखा है, उसके साथ अब संपर्क और सहयोग की बात कैसे करे. अमेरिका के कई अधिकारियों ने हालांकि समय-समय पर कहा है कि उनका देश भारतीय जनता द्वारा चुने गए किसी भी नए नेता के साथ काम करने को तैयार है, लेकिन मोदी को वीजा देने के मुद्दे पर अभी भी वे पूरी सतर्कता बरत रहे हैं.

अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता जेन साकी ने मंगलवार को एक बार फिर किसी व्यक्ति और पद के बीच में अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की.

उन्होंने कहा कि राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम 1952 के तहत ए1 वीजा के लिए पात्र हैं. लेकिन ‘कोई भी व्यक्ति स्वत: अमेरिकी वीजा का पात्र नहीं हो जाता.’

उन्होंने कहा, “अमेरिकी कानून राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों सहित दूसरे देशों के सरकारी अधिकारियों, व्यक्तियों को खास संभावित अस्वीकार्यता आधारों से छूट देता है.”

लेकिन उनसे जैसे ही पूछा गया कि यदि मोदी प्रधानमंत्री बनते हैं तो क्या अमेरिका उन्हें वीजा जारी करेगा, उन्होंने इसके बारे में अनुमान जाहिर करने से इनकार कर दिया, लेकिन तत्काल कहा, “हम भारत की नई सरकार के साथ काम करने को उत्सुक हैं.”

वाशिंगटन हालांकि मोदी के भारत का प्रधानमंत्री बनने की स्थिति से सामना करने की तैयारी महीनों से कर रहा है, क्योंकि भारत को वह 21वीं सदी की एक निर्णायक साझेदारी मानता है.

इसके पहले राष्ट्रपति ओबामा स्वयं कह चुके हैं कि ‘चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद नई सरकार के गठन का इंतजार कर रहे हैं और नई सरकार के साथ आने वाले वर्षो में उसी रूपांतरकारी तरीके से घनिष्ठ रूप से काम करने को उत्सुक हैं.’

तत्कालीन अमेरिकी राजदूत नैंसी पॉवेल की नई दिल्ली से वापसी को भी मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना से जोड़ा गया था.

यही नहीं कई अमेरिकी विशेषज्ञ भी मोदी से संपर्क स्थापित करने की वकालत करते आ रहे हैं, खासतौर से व्यापारियों की लॉबी इस मुद्दे पर सक्रिय है.

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में दक्षिण एशिया के विशेषज्ञ, एश्ली जे. टेलिस ने मंगलवार को कहा कि मोदी को निर्वाचित हो जाने के बाद ओबामा को चाहिए कि वह मोदी को फोन कर बधाई दें और उसके बाद अमेरिकी कैबिनेट का कोई सदस्य या कोई उच्च अधिकारी भारत का दौरा करे.

लेकिन यहीं पर अमेरिका-भारत व्यापार परिषद के पूर्व अध्यक्ष रोन सोमर्स ऐसा नहीं चाहते कि अमेरिका मोदी से मेल-मिलाप के लिए इतना इंतजार करे.

उल्लेखनीय है कि वाशिंगटन ने 2002 के गुजरात दंगों में मोदी की कथित भूमिका एवं संलिप्तता के कारण 2005 में उन्हें व्यावसायिक वीजा देने पर प्रतिबंध लगा दिया था.


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