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सरकार गठन में ‘सलाह’ दे सकता है RSS


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नई दिल्ली/जयपुर,एजेंसी-19 मई। जहां नरेन्द्र मोदी ने सरकार के गठन के लिए सलाह-मश्विरा का सिलसिला तेज कर दिया है, आरएसएस ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह सलाह दे सकता है, लेकिन साथ ही उसने साफ किया है कि वह किसी रिमोट कंट्रोल की भूमिका नहीं निभाएगा और नए भाजपा मंत्रिमंडल या पार्टी के कामकाज में कोई दखलअंदाजी नहीं करेगा।

उधर, भाजपा ने भी दावा किया कि मोदी सरकार के गठन में आरएसएस की कोई भूमिका नहीं होगी। उधर आरएसएस कार्यालय ‘केशव कुंज’ में गतिविधियों में इजाफा हुआ है और वहां भाजपा नेताओं का तांता लगा है।

मोदी पहले ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिल चुके हैं और लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने तथा भाजपा को अपने बल पर पूर्ण बहुमत मिलने के बाद से पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और अनेक वरिष्ठ नेता आरएसएस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं।

आरएसएस के राष्ट्रीय प्रवक्ता राम माधव ने जयपुर में कहा, संघ ने लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत पर भाजपा को, और न ही मोदीजी को कोई दिशानिर्देश दिया है। आरएसएस राजनीति में और सरकार में कोई भूमिका निभाने के लिए कभी कोई रिमोट कंट्रोल नहीं रखता।

माधव ने कहा, लोकसभा चुनाव में जीते जनप्रतिनिधि संघ के विचार को जानते हैं और वे जानते हैं कि कैसे काम किया जाए और उसकी विचारधारा को कैसे आगे बढ़ाया जाए। ऐसा कुछ नहीं है कि आरएसएस सरकार के कामकाज में और राजनीति में हस्तक्षेप करेगा। बहरहाल, अगर आवश्यक हुआ तो संघ सुझाव दे सकता है। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने इससे इनकार किया कि सरकार गठन में आरएसएस की कोई भूमिका है।

नायडू ने कहा कि पार्टी नेतृत्व के बीच सलाह-मश्विरे के बाद सरकार का गठन किया जाएगा। उन्होंने आरएसएस के शीर्ष नेताओं के साथ भाजपा नेताओं की मुलाकात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। यह पूछने पर कि क्या सरकार गठन में संघ की भूमिका है, नायडू ने कहा कि ए सवाल ही नहीं उठता। संघ ऐसे मसलों में कभी हस्तक्षेप नहीं करता।

आरएसएस नेता भैयाजी जोशी से मिल कर आ रहे नायडू ने कहा कि हम स्वयंसेवक हैं। हम संघ मुख्यालय अपने वरिष्ठों से मिलने आते हैं। ये हमारे जीवन का हिस्सा है। इसमें कोई बड़ी बात नहीं है।

आरएसएस प्रवक्ता ने कहा कि हिंदू दक्षिणपंथी संगठन कभी राजनीतिक भूमिका नहीं निभाता, सिर्फ स्थिर और टिकाऊ विकल्प को लाने के लिए काम करता है।

राममाधव ने कहा कि जो जनप्रतिनिधि लोकसभा के लिए चुने गए है। वे संघ की विचारधारा को अच्छी तरह से जानते हैं और उन्हें पता है कि इस विचारधारा को किस तरह से आगे ले जाना है। उन्होंने राम मंदिर और धारा 370 के बारे में पूछे गए प्रश्न का जबाब देते हुए कहा कि भाजपा ने साफ तौर पर अपनी प्राथमिकताओं के बारे में घोषणापत्र में उल्लेख किया है। ऐसे मुद्दों को पार्टी में सही समय पर लिया जाएगा।

माधव ने कहा कि संघ मोदी सरकार को लाने का श्रेय नहीं लेती है, लेकिन मतदान प्रतिशत बढाने में उनका भी योगदान रहा है। जनता ने केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि विचार के परिवर्तन के लिए वोट दिया है।

सशक्त विपक्ष की अनुपस्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि लोकसभा में कोई विपक्ष नहीं है। लोकसभा के सभापति को ही तय करके विपक्षी दल के बारे में घोषणा करनी होगी।

उन्होंने कहा कि इस देश में 35 साल से कम लोगों की संख्या लगभग साठ प्रतिशत है। युवाओं का देश है। इस देश को वैकल्पिक सरकार नहीं, वैकल्पिक विचार चाहिए। इस देश को एक नई दिशा चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस देश को दुनिया के सामने ताकत से प्रस्तुत करने वाला एक नेतृत्व चाहिए। महिलाओं के सम्मान में सबसे पहले बोलने वाला संगठन आरएसएस है। माधव ने एक प्रश्न के जवाब में केन्द्र की अगली सरकार को रिमोट कंट्रोल से निर्देशित करने से इंकार कर दिया।


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