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BJP ने दिये मिशन 2017 की तैयारी के संकेत


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लखनऊ,एजेंसी-27 मई। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल गठन में क्षेत्रीय व जातीय संतुलन साधते हुए उत्तर प्रदेश में भाजपा के मिशन-2017 की तैयारी के संकेत देने के साथ अपना एजेंडा लागू करने की राह भी आसान कर दी। 80 में से 73 संसदीय सीटें भाजपा की झोली में डालने वाले प्रदेश की सियासी ताकत को पहचानते हुए नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री के साथ मंत्रिमंडल का दूसरा पद भी यूपी को सौंपा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को मोदी के तुरंत बाद शपथ दिलाकर सरकार में उनकी अहमियत को बनाए रखा गया। राजनाथ सिंह देश के नए गृह मंत्री होंगे। अटल-आडवाणी की तर्ज पर ही मोदी-राजनाथ की जोड़ी को आगे कर यूपी में करीब डेढ़ दशक से चला आ रहा सियासी सूखा समाप्त करने की तैयारी है।
क्षत्रिय-ब्राह्मण का संतुलन साधने के लिए पहली बार लोकसभा चुनाव जीते अनुभवी नेता कलराज मिश्र को कैबिनेट में मंत्री बना कर उनको राजनाथ सिंह के साथ में खड़ा कर दिया। जाहिर है कि देवरिया से चुनाव जीते कलराज ही अब यूपी में भाजपा का ब्राह्मण फेस होंगे। इसके अलावा मेनका गांधी को मंत्रिमंडल में शामिल करके मोदी ने रुहेलखंड को प्रतिनिधित्व देने के साथ महिला कोटा भी पूरा किया। मेनका लगातार छह बार सांसद चुनी जा चुकी है।
कैबिनेट में उमा भारती का शामिल होना तय माना जा रहा था। उमा के मंत्री बनने से लोधी राजपूत वोटों पर पकड़ बनाने के साथ मोदी ने बुंदेलखंड में भाजपाई एजेंडे को लागू करने के संकेत दिए है। उमा के जरिए पिछड़ा कार्ड पुख्ता करने के साथ ही मोदी अपने ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा सफाई अभियान को मजबूती से लागू करेंगे।
रुहेलखंड क्षेत्र में जनाधार वाले नेता संतोष गंगवार की तरक्की के संकेत भी साफ हैं। अटल सरकार में मंत्री रहें गंगवार को नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्र प्रभार प्रदान करके उनकी अहमियत बढ़ाते हुए कुर्मी बिरादरी का समायोजन भी कर दिया। यूपी से दूसरे स्वतंत्र राज्यमंत्री बनाए गए पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह पहली बार सांसद निर्वाचित हुए। क्षत्रिय जाति से ताल्लुक रखने वाले वीके को राज्यमंत्री बनाने के पीछे पश्चिमी उप्र की भागीदारी बढ़ाना भी अहम वजह रही।
मंत्रिमंडल गठन में मुजफ्फरनगर दंगे का असर भी दिखा। सांप्रदायिक तनाव के दौरान जेल यात्रा करने वाले संजीव बालियान पहली बार चुनाव लड़े और रिकार्ड जीत हासिल की। बालियान को राज्यमंत्री बनाने से बागपत में रालोद प्रमुख अजित सिंह को हरा देने वाले सत्यपाल सिंह समर्थकों को मायूसी हाथ लगी परंतु भाजपा ने जाटों को लुभाने के लिए नया दांव चला है। गाजीपुर सीट पर मनोज सिन्हा की विजय चौंकाने वाली थी। सिन्हा को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने भूमिहार समाज का प्रतिनिधित्व पूरा करके पूवरंचल को मजबूत करने की कोशिश की।


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