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भूटान में जोरदार स्वागत से गद्गद् हुए मोदी


Modi Bhutan

थिंपू,एजेंसी-16 जून। भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर रविवार को भूटान पहुंचे नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत हुआ। स्वागत से अभीभूत मोदी ने कहा कि इससे दोनों देशों के आपसी रिश्ते की गर्माहट का पता चलता है।
दोनों पड़ोसी देशों ने व्यापक साझीदारी के विकास पर ध्यान दिया और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को प्रगाढ़ करने के उपायों पर चर्चा की।
भारतीय समयानुसार दिन के 11:10 बजे मोदी यहां पारो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे जहां भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोब्गे ने परंपरागत भूटानी परंपरा के तहत मोदी के गले में खाड़ा लपेटकर स्वागत किया।
कड़ी सुरक्षा और भारी तामझाम के साथ मोदी का काफिला राजधानी की ओर बढ़ा जहां उनकी यात्रा को लेकर हिमालय की गोद में बसे इस पड़ोसी देश में स्कूली बच्चों से लेकर टैक्सी चालकों तक सभी का उत्साह स्पष्ट झलक रहा था। भारतीय नेता का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए सैकड़ों स्कूली छात्र/छात्राएं दोनों देशों का झंडा थामे कतार में खड़े थे।
भूटान से अपने पहले विदेशी दौरे की शुरुआत को मोदी ने स्वाभाविक चुनाव बताया।
भूटान सरकार ने मोदी की सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था कर रखी थी और इसके तहत थिंपू के प्रवेश और निकास मार्ग पर आवा-जाही को प्रतिबंधित कर दिया गया था। सोमवार को मोदी के रवाना होने तक कुछ प्रमुख जगहों पर वाहनों के आवागमन पर बंदिश जारी रहेगी। मोदी के आगमन के समय सुबह में पुलिस ने अधिकांश मार्गो पर लोगों की आवाजाही भी रोक दी थी।
भारत और भूटान ने रविवार को दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच व्यापक सहयोग विकसित करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। मोदी ने दोनों देशों के बीच करीबी और दोस्ताना संबंध को ‘बी टू बी’ या ‘भारत टू भूटान’ संबंध करार दिया।
पहुंचने के करीब घंटे भर बाद मोदी भूटान के सरकारी सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की। इसके बाद मोदी ने प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोब्गे के साथ बातचीत की। अधिकृत सूत्रों के मुताबिक मोदी ने भारत को भूटान का विशेष साझीदार माने जाने पर संतोष जाहिर किया। तोब्गे ने मेजबान के सम्मान में एक भोज रखा था।
भूटान नरेश से मुलाकात से पहले मोदी का पारंपरिक स्वागत किया गया। राजधानी के उत्तरी छोर पर स्थित सरकारी सचिवालय ताशिच्चोएदजोंग के विस्तृत प्रांगण में परंपरागत परिधान में सजे वादकों ने वाद्ययंत्र बजाकर स्वागत किया तो भूटानी नर्तकों ने वहां का लोकनृत्य पेश किया। इस रंगारंग स्वागत समारोह में परंपरागत वाद्ययंत्र बड़े झांझ की ताल पर ध्वज वाहकों का लय के साथ थिरकने ने चार चांद लगा दिया।
बंद गले के कुर्ते और पाजामे में मोदी औपचारिक सलामी गारद में भावुक नजर आए।
गर्मजोशी से स्वागत के लिए भूटानी नेतृत्व का आभार जताते हुए मोदी ने कहा, “इससे हमारे द्विपक्षीय रिश्ते की गर्मजोशी झलकती है।”
सूत्रों ने कहा, “प्रधानमंत्री ने इस बात पर संतोष जाहिर किया कि भारत को भूटान का विशेष साझीदार माना जाता है। इसके अलावा मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि उनकी सरकार न केवल इस मजबूत बंधन की देखभाल करेगी, बल्कि उसे मजबूती भी प्रदान करेगी।”
सूत्रों ने कहा, “दोनों पक्षों की बैठक का प्रारंभिक जोर दोनों देशों के बीच विस्तृत साझीदारी के विकास और आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के उपायों पर रहा।”
द्विपक्षीय संबंधों को बी टू बी संबंध करार देते हुए मोदी ने व्यापक शैक्षणिक संपर्क की संभावना पर जोर दिया और भारत में पढ़ने वाले भूटानी छात्रों की छात्रवृत्ति दोगुनी करने का सुझाव दिया।
मोदी ने यह भी कहा कि भारत डिजिटल लाइब्रेरी (पुस्तकालय) स्थापित करने में मदद करेगा। इस पुस्तकालय से भूटानी छात्रों को 20 लाख पुस्तकें और पत्र-पत्रिकाएं मुहैया हो सकेंगी।
मोदी ने भारत के आर्थिक सहयोग से बने भूटान के सर्वोच्च न्यायालय के नए भवन का उद्घाटन किया। सोमवार को वह भूटान के पूर्व नरेश जिग्मे सिंघे वांगचुक से मुलाकात करेंगे और संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे।
यात्रा के समापन से पहले वह 600 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना की आधारशिला रखेंगे।
इस यात्रा में मोदी के साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित दोभाल ओर विदेश सचिव सुजाता सिंह भी भूटान गए हैं।


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