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कर्नाटक व असम के राज्यपाल ने भी दिया इस्तीफा


Governors
नई दिल्ली,एजेंसी-17 जून। केंद्र सरकार द्वारा इस्तीफा देने के निर्देश की खबर के बीच मंगलवार को तीन राज्यों के राज्यपालों ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी एल जोशी, असम के राज्यपाल जे बी पटनायक और कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने आज इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में नियुक्त कई अन्य राज्यपाल अभी इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि जब इस बाबत दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और केरल की गवर्नर शीला दीक्षित से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह अफवाहों पर ध्यान नहीं देती हैं। इस बाबत वह फैसला तब ही करेंगी जब उन्हें कोई लिखित आदेश मिलेगा। इसी बीच असम के राज्यपाल जे बी पटनायक तथा कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने कहा है कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है।
केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्यपालों के इस्तीफे की बात कोई नई नहीं है। सत्ता परिवर्तन के बाद कोई भी सरकार अपने हितों को देख कर ही फैसले लेती है और बदलाव करती है। इससे पहले 2004 में कांग्रेस की सरकार बनने के दौरान भी राजग सरकार द्वारा नियुक्त कुछ राज्यपालों ने इस्तीफा दिया था। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी एल जोशी ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति भवन भेज दिया है। जोशी 28 जुलाई 2009 से यूपी के राज्यपाल थे। बताया जाता है कि इससे जोशी ने इस्तीफे से इन्कार किया था। जोशी इससे पहले दिल्ली के उपराज्यपाल भी रह चुके हैं।
सूत्रों की मानें तो ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि निकट भविष्य में यूपीए सरकार के दौरान नियुक्त किए गए अन्य राज्यपालों के इस्तीफे भी जल्द हो सकते हैं जिसमें पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल और मध्य प्रदेश के राज्यपाल शामिल हैं। हालांकि सूत्रों का ये भी मानना है कि एनडीए सरकार सिर्फ उन्हीं राज्यपालों को हटने के लिए दबाव बनाएगी, जिनकी पृष्ठभूमि राजनीतिक है। राजनीतिक पृष्ठभूमि से इतर राज्यपाल अपने पदों पर बने रह सकते हैं। बीएल जोशी के अलावा राजस्थान की राज्यपाल मारग्रेट अल्वा भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलीं हैं। उन्हें दिल्ली तलब किया गया था।
आपको बता दें कि भाजपा की ओर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा, लालजी टंडन, वीके मल्होत्रा समेत कई अन्य नेता भी राज्यपाल पद की दौड़ में शामिल हैं। संभावना यह भी जताई जा रही है कि अनुभव को देखते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह को भी राज्यपाल बनाया जा सकता है।


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