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बीएमसी नहीं करेगी कैंपा कोला पर कार्रवाई


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मुंबई,एजेंसी-21 जून। मुंबई के वर्ली स्थित कैंपा कोला सोसायटी के अवैध फ्लैट को खाली करवाने के लिए बीएमसी आज कोई कार्रवाई नहीं करेगी। पुलिस ने सोसायटी के बाहर से इंतजाम हटाए। हालांकि कैंपा कोला परिसर से निवासियों को हटाने में प्रतिरोध का सामना कर रही निकाय संस्था ने उसे उच्चतम न्यायालय का आदेश लागू करने से रोकने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही बल प्रयोग के इस्तेमाल के पहले आज निवासियों को एक बार फिर अवैध फ्लैट छोड़ने के लिए समझाने का प्रयास करने का फैसला किया गया है।

शुक्रवार को दो बार बैरेंग लौटने के बाद शनिवार को एक बार फिर बीएमसी अधिकारी कैंपा कोला सोसाइटी में बिजली और पानी के कनेक्शन काटने पहुंचे हैं। हालांकि आज भी सोसाइटी के बाशिंदों ने अधिकारियों को सोसाइटी के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। अधिकारी सोसाइटी के बाहर खड़े हैं। पुलिस ने कैंपा कोला परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी है। बीएमसी के अधिकारियों अनुसार यदि सोसाइटी के लोग कोर्ट की शरण में जाएं तो यहां होने वाली कार्रवाई रोकी जा सकती है। आज भी सोसाइटी के लोग हवन कर रहे हैं।

संभावना जताई जा रही है कि आज भी सोसाइटी में किसी तरह की कोर्रवाई नहीं हो सकती। हालांकि कैंपा कोला सोसाइटी के लोगों पर सरकारी काम में दखल देने और गलत इरादे से जमा होने का केस दर्ज कर लिया गया है। बीएमसी इस मामले में आगे कार्रवाई करेगी। कैंपा कोला परिसर से निवासियों को हटाने में प्रतिरोध का सामना कर रही निकाय संस्था ने उसे उच्चतम न्यायालय का आदेश लागू करने से रोकने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही बल प्रयोग के इस्तेमाल के पहले आज निवासियों को एक बार फिर अवैध फ्लैट छोड़ने के लिए समझाने का प्रयास करने का फैसला किया गया है।

वर्ली पुलिस के मुताबिक, बृहन्नमुंबई महानगरपालिका (एमसीजीएम) अधिकारियों ने दक्षिण मुंबई के अवासीय परिसर में घुसने के नाकाम प्रयास की वीडियो रिकार्डिंग के साथ कल शाम पुलिसकर्मियों से संपर्क किया, ताकि अवैध फ्लैटों को जरूरी आपूर्ति रोकी जाए।

वर्ली पुलिस थाने के एक अधिकारी ने कहा, ‘एमसीजीएम ने कल देर रात हमसे संपर्क किया और सोसाइटी के निवासियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने निवासियों द्वारा परिसर में घुसने से रोकने को लेकर अपने नाकाम प्रयास का वीडियो फुटेज भी मुहैया कराया।’ उन्होंने बताया कि वीडियो रिकार्डिंग की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने कहा, ‘निकाय की ओर से हमें मुहैया कराए गए फुटेज की जांच करने के बाद हम आगे की कार्रवाई शुरू करेंगे। आज, हम एमसीजीएम अधिकारियों के साथ कानून और व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करेंगे। अगर निवासी उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करते हैं तो हम तत्काल कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।’ उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 353, धारा 341, धारा 141, धारा 142, धारा 143 धारा 145 धारा 149 और मुंबई पुलिस कानून की विभिन्न धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया गया है।

प्रशासन द्वारा दी गई फ्लैटों को स्वत: खाली करने की समय सीमा कल खत्म हो गई। वर्ली में इमारत को खाली कराने के लिए एमसीजीएम अधिकारी वहां पहुंचे तो वहां का द्वार बंद था और लोग नारे लगा रहे थे ‘हमें इंसाफ चाहिए।’

इससे पहले मुंबई की कैंपा कोला सोसाइटी में नोटिस मिलने के बाद भी घर खाली ना करने वालों को जबरन खाली कराने के लिए कैंपा कोला पहुंची बीएमसी की टीम को कल बैरंग वापस लौटना पड़ा था। बीएमसी अधिकारियों को लोगों द्वारा सोसाइटी का गेट न खोलने के कारण वापस लौटना पड़ा।

बीएमसी अधिकारी सोसाइटी के अवैध फ्लैटों में बिजली, गैस, पानी कनेक्शन काटने आए थे, लेकिन लोगों द्वारा गेट नहीं खोलने पर बीएमसी अधिकारी अंदर नहीं जा सके। सोसाइटी में रह रहे लोग अपने सामान को तो शिफ्ट कर चुके हैं लेकिन रह अब भी सोसाइटी में ही रहे हैं। बीएमसी की टीम के पहुंचने से पहले सोसाइटी के लोगों ने गेट पर हवन किया और विरोध जताया।

गौरतलब है कि कैंपा कोला सोसायटी में 102 फ्लैट अवैध हैं जिनको खाली करने की मियाद 12 जून को शाम 5 बजे ही खत्म हो गई थी। 1981 में कैंपाकोला की जमीन पर बिल्डिंग बनाने की इजाजत तीन बिल्डर्स यूसुफ पटेल, बीके गुप्ता और पीएसबी कंस्ट्रक्शन को मिली थी। 1983 में बिल्डर ने 5-5 मंजिलों की 9 इमारतें बनाने का प्लान बीएमसी को सौंपा गया, जिसे मंजूरी मिल गई।

पांच मंजिल की मंजूरी के हिसाब से बिल्डर ने निर्माण कार्य शुरू किया. लेकिन बीएमसी के नोटिस के बावजूद बिल्डर ने अवैध रुप से कई फ्लैट्स बना डाले। 1989 तक सारी बिल्डिंग बनाकर लोगों को फर्जीवाड़े की बात बताए बिना सारे फ्लैट्स बेच डाले।

जब फ्लैट बिक गए तब बीएमसी ने अपनी रिपोर्ट दी और कहा कि बिल्डर ने गैरकानूनी निर्माण किया है। इसके बाद मामला कोर्ट में गया। पहले सिविल कोर्ट, फिर हाईकोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट। लेकिन उन लोगों को कोई राहत नहीं मिली जिन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई एक अदद छत लेने में लगा दी।


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