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बीएल जोशी ने छोड़ा यूपी राजभवन, अजीज कुरैशी आज लेंगे शपथ


Governor UP

लखनऊ,एजेंसी-23 जून। निवर्तमान राज्यपाल बीएल जोशी ने आज राजभवन में गार्ड ऑफ आनर लेने के बाद लखनऊ छोड़ दिया। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद बीएल जोशी सीधे लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचने के बाद जयपुर रवाना हो गए। उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी आज शाम को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पद की शपथ लेने को दोपहर बाद लखनऊ पहुंचेंगे। जोशी ने 28 जुलाई 2009 को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का पद संभाला और पांच वर्ष की कार्यावधि पूरी करने से थोड़ा पीछे रह गए।
बीएल जोशी ने राजभवन से रवाना होते समय वहां पर कार्यरत सभी कर्मियों को धन्यवाद ज्ञापित किया और सभी से व्यक्तिगत रूप से मिले। उनकी शानदार विदाई समारोह में बीएल जोशी से परिवार के सदस्यों के साथ ही राजभवन उत्तर प्रदेश के सभी कर्मचारी मौजूद थे।
उत्तराखंड के राज्यपाल डा.अजीज कुरैशी सोमवार को दोपहर बाद अमौसी एयरपोर्ट पर उतरेंगे जहां वह पुलिस के सम्मान गार्ड की सलामी लेंगे। शाम छह बजे इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डा.डीवाई चन्द्रचूड़ राजभवन के गांधी सभागार में कुरैशी को राज्यपाल पद की शपथ दिलाएंगे। अजीज कुरैशी को बीएल जोशी के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। देखना दिलचस्प होगा कि यह जिम्मेदारी कब तक उनके पास रहती है।
साफ है कि जब तक नरेंद्र मोदी सरकार उत्तर प्रदेश के नियमित पूर्णकालिक राज्यपाल की तलाश नहीं कर लेती तब तक डा. कुरैशी के पास उत्तर प्रदेश का चार्ज रहेगा। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सबसे लंबे समय तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश शशिकांत वर्मा के पास रहा जिन्होंने यह जिम्मेदारी एक जुलाई 1972 से 13 नवम्बर 1972 तक निभायी। मोहम्मद शफी कुरैशी के पास पहली बार 1996 में ढाई महीने तक और दूसरी बार 1998 में करीब एक महीने तक यह जिम्मेदारी रही। वर्ष 2004 में सुदर्शन अग्रवाल के पास यह दायित्व केवल चार दिन रहा।
भारतीय गणतंत्र के इतिहास में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के रूप में सबसे लम्बी पारी बी.गोपाल रेड्डी की थी जो पांच साल दो महीने तक चली थी। केएम मुंशी, विश्वनाथ दास, सीपीएन सिंह और टीवी राजेश्वर ने भी बतौर राज्यपाल पांच साल गुजारे जबकि मोहम्मद उस्मान आरिफ और बीएल जोशी की पारी पांच साल से थोड़ा पहले ही समाप्त हो गयी। जोशी यूपीए सरकार द्वारा राज्यपाल नामित किए गए थे और कांग्रेस के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार को सपा और बसपा दोनों का समर्थन प्राप्त था लिहाजा जोशी के कार्यकाल में मायावती और अखिलेश सरकार से उनके रिश्ते मधुर बने रहे। बहरहाल अब देखना होगा कि मोदी सरकार किसे राज्यपाल बनाती है और प्रदेश की सपा सरकार से रिश्ते किस तरह के बनते हैं?


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