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चार दिन बाद आएंगे अच्छे दिन : पासवान


Paswan
रायपुर,एजेंसी-2 जुलाई। केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान का कहना है कि चार दिन बाद, यानी चार जुलाई के बाद अच्छे दिन आने वाले हैं, इस दिन देशभर के मुख्यमंत्रियों और खाद्यमंत्रियों की दिल्ली में बैठक है। दूसरी ओर, राजग संगठन से जुड़े प्रदेश प्रभारी जगतप्रकाश नड्डा का मानना है कि महंगाई पर काबू पाने में कम से कम एक माह का वक्त लगेगा। पासवान ने संकेत दिया है कि 4 जुलाई के बाद देश और प्रदेश की जनता के अच्छे दिन आएंगे। 4 जुलाई को देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और खाद्य मंत्रियों की बैठक होगी। बैठक में देश में तेजी से बढ़ रही महंगाई को काबू में करने की रणनीति तैयार होगी। इसके बाद केंद्र और राज्य की सरकारें, जो कार्रवाई करेंगी उससे रोजमर्रा की जरूरतों वाले सामान के दाम जमीन पर आ जाएंगे।
पासवान ने कहा कि देश में आलू-प्याज की कोई कमी नहीं है। कम बारिश के आसार को देखते हुए लोगों ने जमा करना शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों पर सरकार की नजर है। 4 की बैठक के बाद उन पर कार्रवाई शुरू होगी।
राजधानी स्थित न्यू सर्किट हाउस में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में पासवान ने कहा कि मोदी सरकार ने जो वादा किया है, उसे पूरा करेगी। जमाखोरी और कालाबाजारी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पासवान ने कहा कि आलू-प्याज, शक्कर, रसोई गैस जैसी रोजमर्रा की जरूरतों का सामान देश में पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन ऐसे उत्पादों के लिए राष्ट्रीय मंडी नहीं है। इसका परिणाम यह हो रहा है किसी राज्य में प्याज-आलू सड़ रहे हैं, किसानों की लागत भी वसूल नहीं हो रही है, वहीं दूसरे राज्यों में इसकी कमी पड़ रही है और दाम आसमान पर पहुंच रहे हैं। इस पर नए सिरे रणनीति तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि देश में फूड सिक्योरिटी बिल 20 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू ही नहीं हो पाया है। बिल में इसे 365 दिनों में देश के सभी राज्यों में लागू करने कहा गया था। यह अवधि 4 जुलाई को खत्म हो रही है, इसकी अवधि तीन महीने बढ़ा दी गई है, जिससे बाकी राज्यों में भी इसे लागू कर दिया जाएगा। बिल पहले से लागू करने के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ की तारीफ की।
पासवान प्रदेश में धान का समर्थन मूल्य यानी एमएसपी 2100 रुपए प्रति क्विंटल करने के सवाल को टाल गए। उनका कहना था कि इस बारे में मुख्यमंत्री के पत्र को देखने बाद विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि एक राज्य में एमएसपी अधिक होने पर बाकी राज्यों के लोग वहां पहुंचकर अपना अनाज बेचने लगते हैं, जिससे दूसरे राज्यों में परेशानी बढ़ने लगती है।


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