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भारत, नेपाल सीमा कार्यकारी समूह पर सहमत


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काठमांडू,एजेंसी-15 जुलाई | भारत, नेपाल सीमा से संबंधित कुछ मुद्दों को सुलझाने तथा सीमा पर लगे खंभों के रखरखाव एवं मरम्मत के लिए महासर्वेक्षक स्तर पर एक सीमा कार्यकारी समूह गठित करने पर सहमत हो गए हैं।

नेपाल के अंग्रेजी समाचार पत्र ‘काठमांडू पोस्ट’ में मंगलवार को प्रकाशित एक रपट के मुताबिक , दोनों देशों के बीच हाल ही में बीडब्ल्यूजी बनाने पर राजनयिक स्तर पर बातचीत हुई है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के काठमांडू यात्रा के दौरान इसकी प्रक्रिया के बारे में घोषणा होने की संभावना है।

सुषमा स्वराज नेपाल के तीन दिवसीय दौरे पर 25 जुलाई को काठमांडू पहुंचेंगी। सुस्ता और कालापानी दो ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें लेकर भारत- नेपाल सीमा पर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।

इस समूह के तहत लंबे समय से टूटे पड़े सीमा स्तभों की मरम्मत की जाएगी और भारत- नेपाल सीमा के मानवरहित क्षेत्र डैश गज की सफाई भी होगी। जानकारी के मुताबिक, सीमा कार्यकारी समूह की पहली बैठक की मेजबानी नेपाल करेगा। दोनों पक्ष स्वीकृत नक्शे के मुताबिक क्षेत्र का दौरा करेंगे और अतिक्रमण और अन्य विवादों पर सुलह करेंगे।

साल 2007 में भारत-नेपाल के संयुक्त महासर्वेक्षकों ने भारत- नेपाल सीमा के 182 नक्शे तैयार किए थे। इनमें विावदास्पद सुस्ता (नवलपरासी) और कालापानी (धारकुला) शामिल नहीं थे। संयुक्त महासर्वेक्षकों ने भारत- नेपाल सीमा पर सीमा कार्यकारी समूह की स्थापना की सलाह भी दी थी।

नेपाल इस मुद्दे पर इंतजार की नीति अपनाए हुए है। इसका कहना है कि मौजूदा विवादों को सुलझाए बिना सीमा नक्शों का अनुमोदन करना देश के लिए मुश्किल होगा। भारतीय पक्ष का कहना है कि नक्शों पर हस्ताक्षर करके दोनों पक्षों में आत्मविश्वास पैदा होगा, जो सुस्ता और कालापानी के मुद्दे को सुलझा सकता हैं।

अनुमान है कि नेपाल- भारत सीमा पर 8,000 सीमा स्तंभ होने चाहिए, जिनमें से 640 स्तंभ नदियों पर या नदियों के किनारे होने चाहिए। जमीन पर, 1,240 स्तंभ गायब हो चुके हैं। लगभग 2,500 स्तंभों की मरम्मत करने और 400 नए स्तंभ लगाने की जरूरत है।


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