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राणे व हिमांता के इस्तीफे से कांग्रेस को झटका


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मुंबई,एजेंसी-22 जुलाई। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई है। सोमवार को महाराष्ट्र के असंतुष्ट उद्योग मंत्री नारायण राणे और असम के स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री हिमांता बिस्व शर्मा ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसी वर्ष महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होना है, ऎसे में एक मंत्री का इस्तीफा कांग्रेस के लिए जोरदार झटके जैसा है, पार्टी का हालांकि कहना है कि इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

उधर, असम में माना जा रहा है कि हिमांता राज्य में सरकार से असंतुष्ट कांग्रेस नेताओं को गोलबंदकर रहे हैं। वहीं नारायण राणे ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने निर्णय लेने में देरी की, जिससे लोगों में रोष है।

हिमांता ने कहा कि उन्होंने महसूस किया कि उनके लिए गोगोई के नेतृत्व में मानसिक, शारीरिक और राजनीतिक रूप से काम करना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि वह राज्य सराकार की जनविरोधी नीतियों का विधानसभा के अंदर और बाहर विरोध करते रहेंगे। हम विधानसभा में रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने जा रहे हैं। उन्होंने हालांकि कहा कि वह पार्टी व्हिप का पालन करेंगे। महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के बाद पिछले दो महीने में यह दूसरा मौका है, जब राणे ने सरकार से इस्तीफा दिया है।

राज्य कांग्रेस के प्रमुख मानिकराव ठाकरे ने इस मामले पर कहा कि वे राणे से बात करेंगे और उनकी शिकायतों को दूर करने का प्रयास करेंगे। वहीं भारतीय जनता पार्टी के राज्य प्रमुख देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि उन्हें राणे की तरफ से पार्टी में शामिल होने का कोई संकेत नहीं मिला है, लेकिन अगर ऎसा होता है, तो इस पर निर्णय लेने से पहले शिवसेना से परामर्श लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस से नाखुश हूं। जब मैं पार्टी में शामिल हुआ था, तो मुझसे कहा गया था कि मुझे छह महीने के अंदर मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। मैंने नौ साल तक इंतजार किया। पार्टी ने अपना वादा पूरा नहीं किया।

उन्होंने चव्हाण पर निर्णय लेने में देरी का आरोप लगाया और कहा कि लोगों के काम से संबंधित निर्णय शीघ्र नहीं लिए जा रहे हैं। प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है। लोगों की नाराजगी लोकसभा चुनाव परिणाम के रूप में दिख चुकी है।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने आगामी चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है और ऎसे में अच्छा प्रदर्शन कर पाना बेहद कठिन है। मैं एक ऎसी पार्टी का हिस्सा नहीं रहना चाहता, जो आगामी चुनाव में हारने वाली हो। इसलिए मैं पार्टी छोड़ रहा हूं। उन्होंने बेहद दुख के साथ कहा कि मैं अपने किसी भी सहयोगी को टिकट नहीं दिला पाया। मेरे लोगों के साथ न्याय नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि चव्हाण ने वादा किया है कि उन्हें वापस लौटाने के लिए वे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात करेंगे। इसके बाद ही मैं अगला कदम उठाऊंगा। राणे ने कहा कि चव्हाण ने उनसे कहा कि पार्टी को उनकी जरूरत है, लेकिन उन्होंने मंत्रालय में नहीं रहने की अपनी इच्छा से उन्हें अवगत करा दिया।

उन्होंने कहा कि मैंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है, लेकिन कांग्रेस में बना रहूंगा। हालांकि उन्होंने किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने या किसी अन्य पार्टी का गठन करने संबंधित अटकलों पर विराम लगा दिया है। इधर, शनिवार को कांग्रेस को उस वक्त झटका लगा था, जब राणे समर्थक सात निगम पार्षद शिवसेना में शामिल हो गए।

पार्टी की केंद्रीय और राज्य नेतृत्व के राणे मनाने की सारी कोशिश नाकाम रही। उनका इस्तीफा ऎसे समय में आया है, जबकि कुछ महीने बाद ही महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

इससे पहले भी उन्होंने 16 मई को इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त लोकसभा चुनाव की करारी हार का सामना कर रही पार्टी ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था और उन्हें पद पर बने रहने को कहा था।


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