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काटजू विवाद : सरकार न्यायाधीश नियुक्ति की प्रणाली देने के पक्ष में


Katju
नई दिल्ली,एजेंसी-23 जुलाई। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मरक डेय काटजू के न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के आरोपों पर मंगलवार को संसद में हंगामा होने पर सरकार ने न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रणाली सुधारने की पुरजोर वकालत की। काटजू ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश आर. सी. लाहौटी से इस मुद्दे पर सवालों की बरसात की। डीएमके के प्रमुख एम. करुणानिधि ने काटजू पर तीखा हमला बोलते हुए ‘गुप्त दबावों’ में आरोप लगाने का आरोप लगाया और सवाल किया कि आखिर इतने समय तक उन्होंने चुप्पी क्यों साधे रखी।
काटजू के ब्लाग में विवाद में स्पष्ट रूप से घसीटे गए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीएनएन-आईबीएन न्यूज चैनल को कहा कि पूर्व कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने सबकुछ साफ कर दिया है और उन्हें इसपर और कुछ नहीं कहना है।
भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मरक डेय काटजू के न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के आरोपों पर मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में हंगामा हुआ और कार्यवाही बाधित हुई। सरकार ने स्वीकार किया यह घटना वास्तव में घटी थी।
काटजू ने रविवार को अपने ब्लॉग में लिखा कि मद्रास उच्च न्यायालय के एक अतिरिक्त न्यायाधीश को संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) के कार्यकाल में नियुक्त कर लिया गया, जबकि उनके खिलाफ गुप्तचर ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
एआईएडीएमके के सदस्यों ने अपने चिर प्रतिद्वंद्वी डीएमके पर उच्च न्यायालय में न्यायाधीश की नियुक्ति में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। यह घटना वर्ष 2004 की है और उस समय काटजू मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे।
एआईएडीएमके के सदस्य यह जानना चाहते थे कि क्या डीएमके ने संप्रग सरकार को न्यायाधीशों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का दबाव बनाया था? एआईएडीएमके इस मामले से संबंधित डीएमके के मंत्रियों के नाम जानने का दाबाव बनाए हुए थे।
इस मुद्दे पर एआईएडीएमके के सदस्यों के हंगामे के बीच कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में कहा, “2003 में कॉलेजियम की कुछ आपत्तियां थीं और उसने कुछ जांच कराने के बाद यह फैसला किया कि इस न्यायाधीश को नहीं लिया जा सकता।”
प्रसाद ने बाद में कहा कि संप्रग शासन के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा एक स्पष्टीकरण मांगा गया था कि न्यायाधीश की सिफारिश क्यों नहीं की जा सकती। “कॉलेजियम ने फिर कहा कि इनकी किसी भी सूरत में सिफारिश नहीं की जा सकती।”
प्रसाद ने कहा कि बाद में कानून मंत्री ने कॉलेजियम को एक नोट लिखा जिसके बाद इसने कहा कि इस मामाले पर कुछ विस्तार से विचार किया जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियां करने के लिए सरकार एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन करना चाहती है ताकि न्यायिक नियुक्तियों की प्रणाली में सुधार आ सके।
चूंकि एआईएडीएमके के सदस्य अध्यक्ष की आसंदी के समीप तक पहुंच गए, अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने पहले 15 मिनट के लिए और फिर 2 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।
राज्यसभा में एआईएडीएमके के सदस्यों केा हंगामे के कारण प्रश्नकाल के दौरान 10 मिनट के लिए कार्यवाही रुकी रही।


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