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भारतीय टीम टी-20 की तरह गंभीरता से ले टेस्ट मैचों को


Indian team
नई दिल्ली,एजेंसी। पूरी दुनिया में किसी भी क्रिकेट खिलाड़ी से पूछ लीजिए, वह टेस्ट क्रिकेट को ही सबसे गंभीर और महत्वपूर्ण बताएगा। आज लेकिन परिस्थितियां बदल चुकी हैं। कोई खिलाड़ी भले खुलकर न कह सके, लेकिन वे जानते हैं कि टी-20 क्रिकेट में उनका प्रदर्शन कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुका है।

यह भले ही बेतुका लगे लेकिन युवा खिलाडिम्यों को लगने लगा है कि टी-20 में चमकदार प्रदर्शन कर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना कहीं आसान हो चुका है। भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी और उनका कोई भी साथी खिलाड़ी हालांकि यह मानने को तैयार नहीं होगा कि टी-20 की वजह से उनकी टेस्ट खेलने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ा है।

दूसरी ओर भारत को पहला आईसीसी टी-20 विश्व कप विजेता, आईसीसी विश्व कप-2011 विजेता और चैम्पियंस ट्रॉफी-2013 की विजेता बनाने के लिए और भारत को टेस्ट विश्व वरीयता में भारत को शीर्ष पर पहुंचाने के लिए भारतीय क्रिकेट प्रशंसक अभी भी धौनी की तारीफ ही करेंगे।

इंग्लैंड के खिलाफ इनवेस्टेक टेस्ट सीरीज में भारतीय खिलाड़ी बिल्कुल नौसिखिए नजर आए। भारतीय टीम के अधिकांश खिलाड़ी टी-20 की उपज हैं और इसीलिए वे टेस्ट क्रिकेट की बारीकियों से अनभिज्ञ ही नजर आए। भारत के पिछले इंग्लैंड दौरे की ही तरह इस बार भी इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने 0-1 से पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी करते हुए लगातार तीन जीत हासिल की और 3-1 के बड़े अंतर से सीरीज पर कब्जा कर लिया।

भारतीय टीम तो लगातार दो मैचों में पारी के अंतर से हारी। वास्तव में यह सीरीज भारत के लिए कुछ सबक लेने वाला है कि उन्हें अधिकांश टेस्ट सीरीज अपने घरेलू मैदानों पर ही खेलने चाहिए ताकि वे लगातार अपनी विपक्षी टीमों को हरा सकें। पिछले वर्ष अक्टूबर में दिग्गज भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की विदाई श्रृंखला के लिए वेस्टइंडीज को भारत दौरे पर बुलाया गया था और दो महीने बाद फिर से वेस्टइंडीज भारत के दौरे पर आ रही है।

निश्चित तौर पर वेस्टइंडीज का आगामी भारत दौरा इंग्लैंड से मिली हार को भुलाने में मरहम सा काम करेगा और अपने क्रिकेट प्रशसंकों को इस भुलावे में भी रखेगा कि वे आस्ट्रेलिया दौरे के लिए फॉर्म में लौट चुके हैं। भारत दौरे से ठीक पहले इंग्लैंड को उन्हीं के घर में श्रीलंका द्वारा हराए जाने को कैसे समझा जा सकता है। श्रीलंका ने स्पिन गेंदबाजी के दम पर इंग्लैंड को हराया था, तो क्या भारत के पास उस स्तर के स्पिन गेंदबाज नहीं हैं।

फिर सलामी बल्लेबाज शिखर धवन भले करिश्माई बल्लेबाजी न कर सके हों, पर उनका जुझारू रवैया सबने देखा। बावजूद इसके धवन को बिठाकर गौतम गंभीर को क्यों शामिल किया गया? भारतीय टीम आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर कभी भी अपेक्षानुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाती। ध्यान रहे कि क्रिकेट पूर टीम पर निर्भर करता है न कि एक-दो स्टार खिलाडिम्यों के बल पर।

मौजूदा दौरे पर तो भारतीय प्रशंसकों को थोड़ा सांत्वना देने के लिए पिछली बार की तरह राहुल द्रविड़ भी नहीं थे। द्रविड़ ने पिछले दौरे पर तीन शतक लगाए थे। गौरतलब है कि टी-20 में न तो शतकों की जरूरत होती है और न ही देर तक टिके रहने की। ध्यान से देखा जाए तो टी-20 क्रिकेट में स्लिप क्षेत्ररक्षक भी कम ही मौकों पर खड़े किए जाते हैं।

भारत ने अपने प्रदर्शन से एक बात साफ कर दी है कि वे क्रिकेट के लघु रूप के विशेषज्ञ हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनकी जल्दबाजी तो देखिए कि इंग्लैंड में अपनी आखिरी पारी में वे टी-20 से सिर्फ नौ ओवर ही अधिक खेलते हैं।

क्या किया जा सकता है? मौजूदा टेस्ट खिलाडियों को भारत-ए टीम में शामिल कर उन्हें ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड का अधिक से अधिक दौरा करने का मौका दें। दूसरी ओर हाल ही में भारत-ए टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाडियों को राष्ट्रीय टीम में मौका दें और उनमें भी कुछ खिलाडियों को अगले वर्ष होने वाले आईसीसी विश्व कप के उद्देश्य से विशेष रूप से तैयार करें।

कप्तान धौनी तो बल्लेबाज के तौर पर खुद को कुछ हद साबित कर ले गए, लेकिन विकेटकीपर के तौर पर वे असफल ही नजर आए। और विकेटकीपिंग पर सवाल उठते ही उनकी कप्तानी पर भी तलवार लटकने लगेगी।


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