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बंद मुक्त मणिपुर के नारे के साथ चुनाव जीतने की तैयारी में बीजेपी


दिल्ली से दूर सुदूर पूर्व मणिपुर में भी बीजेपी ने अपना परचम लहराने के लिए दिन रात एक कर दिया है। तीन बार के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता इबोबी सिंह को चौथी बार मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए पार्टी ने नारा दिया है, ‘ब्लॉकेड मुक्त और बंद मुक्त मणिपुर’ बनाने का। ये नारा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने हाल ही में दिल्ली में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में दिया था।

पिछले चुनावों में इसी ब्लौकेड ने घाटी बनाम दूसरे पहाड़ी इलाकों में राज्य बंट गया था और कमजोर विपक्ष के कारण कांग्रेस को जीत मिली थी। इस बार मणिपुर के प्रभारी और बीजेपी सांसद प्रह्लाद पटेल ताल ठोक कर कह रहे हैं कि इस बार मणिपुर बीजेपी के लिए पहली प्राथमिकता है। सितंबर में ही प्रभारी मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मंत्रिमंडल के अपने तमाम सहयोगियों को खत लिख कर दो दिन मणिपुर के लिए समय मांगा था। अब तक दर्जनों मंत्रियों के दौरे और सभाएं भी मणिपुर में हो चुकी हैं।

दिल्ली से दूर सुदूर पूर्व मणिपुर में भी बीजेपी ने अपना परचम लहराने के लिए दिन रात एक कर दिया है। तीन बार के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता इबोबी सिंह को चौथी बार मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए पार्टी ने नारा दिया है, ‘ब्लॉकेड मुक्त और बंद मुक्त मणिपुर’ बनाने का।
 

खुद पीएम नरेन्द्र मोदी इस महीने के अंत में इंफाल में एक बड़ी रैली को संबोधित करने वाले हैं। ये रैली 28 फरवरी को होगी। आने वाले दिनों में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी कम से कम दो बार मणिपुर जाएंगे। राज्य की चार सीटों के लिए दो चरणों में मार्च 4 और 8 को वोटिंग होगी। चुनावी दृष्टि से मणिपुर को तीन भाग में बांट ककर देख सकते हैं। 60 सीटों में 40 सीटें घाटी में हैं जो मैतेयी बाहुल्य इलाके हैं। 10 सीटों पर नागा और बाकि 10 सीटों पर कुकी लोगों का दबदबा है। लगभघ 3 सीटों पर नागा और कुकी बराबर की संख्या में हैं जहां नेपाली आबादी भी अच्छी संख्या में वोट करती है। आईएलपी आंदोलन यानि इनर पास के खिलाफ राज्य में आंदोलन अब तक जारी है। इस नियम के तहत इंफाल और घाटी क्षेत्र मे मणिपुर के लोगों से ही पास मांगने की कवायद शुरु की गयी। इसके खिलाफ आंदोलन भी चल रहा है। बीजेपी इसे मुद्दा बना रही है। उधर राज्य से सबसे बड़े जिले सेनापति को दो जिलों में बांट दिया गया। ये इंफाल कोहिमा राजमाग्र पर था और नागा कुकी की मिली जुली आबादी थी। इसे लेकर भी स्थानीय लोगों खासी नाराजगी है। तमाम स्थानीय मुद्दों की पहचान कर बीजेपी ने हर सीट पर इबोबी सिंह को टक्कर देने की तैयारी कर रखी है।

बीजेपी ने मणिपुर में कांग्रेस सरकार को पचखनी देने के लिए पीएम मोदी का नाम और विकास का मुद्दा ही जनता के सामने रखा है। पार्टी ने किसी चेहरे पर दांव नहीं लगाया है। सड़क परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी ने मणिपुर में हाईवे निर्माण और देश के दूसरे हिस्सों से जोडने वाली सड़के के निर्माण के लिए 22000 करोड की राशि का ऐलान किया है। एक ऐसा राष्ट्रीय राजमार्ग जो असम के सिलचल से सीधा मणिपुर के झिरिवाम से जुड जाएगा। इस पर काम शुरु हो चुका है और अगले दो सालों में इसका काम पूरा भी हो जाएगा। एक दूसरे हाईवे का काम भी शुरु हो चुका है जो इंफाल तक तो जाएगा ही और बाद में ये सड़क म्यांमार तक भी जाएगी।

इस नेशनल हाईवे की खास बात ये कि इसे रास्ते से नागा आंदोलन वाले इलाकों गुजरने से बचा जा सकेगा और ब्लौकेड का भी आवाजाही पर कोई असर नहीं होगा। मणिपुर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने वाली रेल का काम भी पूरा होने की कगार पर है। सिलचल से इंफाल तक की रेलवे लाईन बिछाने का काम वाजपेयी सरकार ने शुरु किया था। यानि विकास के मुद्दे पर 15 साल से चली आ रही कांग्रेस सरकार और उसके मुख्यमंत्री को हराने की मुहिम में बीजेपी पूरी तरह से जुटी है।

विकास के अलावे बीजेपी इबोबी सिंह सरकार के भ्रष्टाचार को भी बीजेपी मुद्दा बनाने में लगी है। बीजेपी के मणिपुर प्रभारी प्रह्लाद पटेल का दावा है कि पार्टी प्रचंड बहुमत से जीतेगी। पटेल को भरोसा है कि राज्य का वोटर मोदी के नाम और विकास के मुद्दे पर उन्हें ही वोट देगा।


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