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उपहार सिनेमा पीड़ित के परिवार वालों ने कहा ‘नहीं हुआ न्याय’


नई दिल्ली। उपहार सिनेमा त्रासदी में पीड़ितों के परिवार वालों को लगता है कि गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले से उन्हें न्याय नहीं मिला है। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को मामले में फैसला सुनाते हुए रियल एस्टेट कारोबारी गोपाल अंसल को एक साल की सजा सुनाई है। ‘एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ उपहार ट्रैज्डी’ (एवीयूटी) के सदस्यों का कहना है कि उनका न्याय प्रणाली से विश्वास उठ गया है।

एवीयूटी की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने कहा, “हम बेहद हताश हैं, न्याय नहीं हुआ। हमें सर्वोच्च न्यायालय से मात्र एक साल की सजा दिए जाने की उम्मीद नहीं थी। हम लंबे समय से इसके लिए लड़ रहे हैं, लेकिन अब हमारा देश की न्याय प्रणाली से विश्वास उठ गया है।”

उपहार सिनेमा त्रासदी में मरे 59 लोगों के परिवार वाले 20 वर्ष से उपहार सिनेमा के सह-मालिकों गोपाल अंसल और सुशील अंसल को सजा दिलाने के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे थे।

एवीयूटी के एक अन्य सदस्य नवीन साहनी ने कहा, “सबसे आश्चर्यजनक तो यह रहा कि अदालत ने सुशील अंसल को बरी कर दिया, वह भी सिर्फ इसीलिए कि वह 75 वर्ष के हो चुके हैं। जबकि कुछ ही दिन पहले सर्वोच्च न्यायालय ने एक 93 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ सजा सुनाई है। दंड अपराधी की आयु के आधार पर नहीं दिया जा सकता।”

 13 जून, 1997 को दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा हाल में फिल्म के प्रदर्शन के दौरान भीषण आग लग गई थी, जिसमें 59 लोगों की मौत दम घुटने से हो गई थी, जबकि भगदड़ में 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। नीलम और शेखर कृष्णमूर्ति के दोनों बच्चों की हादसे में मौत हो गई थी और नवीन साहनी ने अपनी बेटी खो दी थी।
 

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