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क्या जन लोकपाल फिर बनेगा चुनावी मुद्दा?


Jan Lokapal
खबर इंडिया नेटवर्क न्यूज़- रतन मणि लाल। कांग्रेस के लिए राजनीतिक सरदर्द कम होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। जहां चार राज्यों में विधान सभा चुनाव में पार्टी को हार का मुह देखना पड़ा, वहीँ मंगलवार 10 दिसंबर से सामजसेवी अन्ना हज़ारे महाराष्ट्र में अपने गांव रालेगण सिद्दी में जनलोकपाल के लिए अनिश्चितकालिन अनशन पर बैठने जा रहे है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की खस्ता हालत सबके सामने आ गई है, लेकिन दिल्ली में कांग्रेस को इतने बुरे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी। यहाँ मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा था, लेकिन आम आदमी पार्टी ने खुद को दूसरे नबंर की पार्टी साबित करते हुए कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेल दिया।
पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल और अन्ना हज़ारे ने सबसे पहले जन लोकपाल मुद्दे पर दिल्ली से देशव्यापी आंदोलन चला कर लोगों के बीच अपनी विश्वसनीयता बनायी थी। उसके बाद जहां हज़ारे ने चुनावी राजनीति से अलग रहने की घोषणा करते हुए लोकपाल को लेकर अलग आंदोलन चलाये रखा, वहीँ केजरीवाल ने तंत्र से जुड़ कर उसे बदलने की नीति अपनाते हुए पार्टी बनायी और दिल्ली का विधान सभा चुनाव लड़ा।
अब स्थितियां फिर उसी मुकाम पर आ गयी हैं। जहां केजरीवाल अपने आप में एक राजनीतिक ताक़त बन कर कोंग्रेस के लिए मुसीबत बन गए हैं वहीँ हज़ारे इस बार दिल्ली से दूर अपने गाँव में इस मुद्दे पर अनशन पर बैठ गए हैं। सोनिया गांधी और पीएम मनमोहन सिंह पर आश्वासन के बाद भी धोखा देने का अरोप लगाते हुए अन्ना ने कहा कि केन्द्र सरकार मुझे और जनता के साथ धोखा कर रही है।
जिस तरह से दिल्ली में कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर केजरीवाल ने शीला दीक्षित सरकार को उखाड़ फेंका ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले अन्ना का आंदोलन कांग्रेस के खिलाफ देश के मूड को और बिगाड़ सकता है। अन्ना ने दिल्ली के चुनाव नतीजों के दो दिन बाद ही अपना अनशन शुरु कर दिया है। देश का मूड वैसे ही कांग्रेस के खिलाफ लग रहा है। ऐसे में अन्ना के अनशन ने भ्रष्टाचार और लोकपाल को एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बना दिया है। देखना यह है कि कांग्रेस और केंद्र की सर्कार अब इस से कैसे निबटती है।
संसद में केंद्रीय मंत्री नारायणस्वामी में यहाँ कहा तो ज़रूर कि केंद्र सरकार जन लोकपाल बिल को इस सत्र में पास करवाएगी, लेकिन मौजूदा रूप में ऐसा बिल पास होने की उम्मीद कम ही है। नारायणस्वामी ने कहा कि केंद्र की सरकार इस बिल पर चर्चा कर इसी पास करने के लिए कटिबद्ध है , और उन्होंने भरोसा दिलाने की कोशिश की कि इस मामले में सरकार गम्भीर है।
हज़ारे का कहना है कि उनका अनशन र्फाज्य सभा में बिल पास होने तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में कई बार वादे कर चुकी है और इस बार यदि बिल पास नहीं हुआ तो वे प्राण त्याग देंगे।
उनकी नाराज़गी इस बात पर भी है कि प्रधान मंत्री दंगा विरोधी बिल पास करने के लिए तो सारे प्रयास कर रहे हैं लेकिन लोकपाल के लिए उनकी कोई गम्भीरता नज़र नहीं आती।


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