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ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने भी माना भारत को सुपरपावर


मुंबई ,(एजेंसी) 04 सितम्बर । देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से दो दिन के भारत दौरे की शुरुआत करते हुए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबट ने भारत को ‘उभरती लोकतांत्रिक महाशक्ति’ बताया और कहा कि इस देश में व्यापार के प्रचुर मौके हैं, जिनका हम अधिक से अधिक फायदा उठाना चाहते हैं।

Tony Abott

जब 33 साल पहले आए थे भारत:-
एबोट 1981 में तीन महीने की भारत यात्रा के दौरान ताज होटल गए थे और वहां लंच किया था। उस यात्रा का जिक्र करते हुए एबोट ने कहा कि यह रहस्यमय, आकर्षक, सम्मोहित करने वाला उपमहाद्वीप है। यह एक देश में पूरा विश्व है। मैंने रेलवे के थर्ड क्लास के कंपार्टमेंटों में सफर करते काफी समय बिताया। मैंने ऐसे होटलों में काफी समय बिताया, जहां एक रात का किराया दो रुपये हुआ करता था और मुझे लगता था कि मुझे अपना इलाज कराना पड़ेगा। ताज पर 33 साल पहले किए गए लंच का जिक्र करते हुए एबोट ने कहा कि आज का लंच उससे कम शानदार नहीं होगा।

आबे, एबोट और मोदी की नीतियों में साम्यता :-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिंजो आबे की तरह ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबोट की नीतियों और हितों में काफी समानता है। तीनों ही नेता जहां अपने देश की दक्षिणपंथी राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हैं। तीनों नेताओं के लिए जहां विदेशी रिश्तों में आर्थिक कूटनीति अहम है, वहीं चीन की विस्तारवादी नीति के खिलाफ विदेश नीति के रुख में खास समानता है।

मोदी सरकार बनने के बाद एबट सार्क देशों से इतर पहले ऐसे लीडर हैं, जिन्होंने भारत का दौरा किया। मुंबई के होटल ताज पैलेस में 30 सदस्यों वाले कारोबारी डेलिगेशन को संबोधन में एबट ने कहा कि यह (भारत) ऐसा देश है, जिसने बीते कुछ दशकों में अपनी प्रगति और विकास से दुनिया को चकित किया है । विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला यह देश, क्रय शक्ति के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी, स्पष्ट तौर पर उभरती हुई लोकतांत्रिक महाशक्ति और ऐसा देश है, जिसके साथ ऑस्ट्रेलिया के लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं। जहां तक मेरा सवाल है तो इस यात्रा का मकसद व्यापक विश्व में भारत की अहमियत को स्वीकार करना, ऑस्ट्रेलिया के भविष्य में भारत के महत्व को स्वीकार करना, भारत सरकार और उसके लोगों को यह जानकारी देना कि ऑस्ट्रेलिया के पास उसे और दुनिया को पेश करने के लिए क्या है और उसके मजबूत आधार पर निर्माण करना शामिल है।
एबट ने कहा कि 33 वर्ष पहले जब मैं एक टूरिस्ट के तौर पर भारत आया था, तब की तुलना में आज काफी बदलाव आ गया है। मुझे याद है कि मैंने तब मुंबई में अपने पहले ही दिन एक बैलगाड़ी को परमाणु ऊर्जा केंद्र चीजें ले जाते देखा था। खैर, 33 वर्ष बीत चुके हैं और भारत के शहरों में उतनी बैलगाडि़यां नहीं बची हैं और एनर्जी सेंटर । न्यूक्लियर पावर सेंटर पहले की तुलना में कहीं अधिक परिष्कृत हो गए हैं। इससे पहले एबट ने मोदी के इस आह्वान का जिक्र किया कि आइए और भारत में निर्माण करिए। ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा कि हम उस कथन की भावना और आशय के हिसाब से काफी करीब हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलिया के आसपास मौकों की कमी नहीं है, लेकिन भारत में प्रचुर मात्रा में अवसर उपलब्ध हैं। उनमें से ज्यादातर का इस्तेमाल करने का हमारा इरादा पक्का है। मुझे पता है कि आप सभी ने उनमें से अधिकतर का इस्तेमाल करने का दृढ़ निश्चय किया है। मैं अगले दो दिनों में आपके और भारतीय वार्ताकारों के साथ घनिष्ठता के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हूं।


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