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अमित शाह को बुलाने के लिए उद्धव के छूटे पसीने


मुंबई ,(एजेंसी) 05 सितम्बर । शिवसेना आजकल ज्यादा ही परेशान नजर आ रही है। पार्टी गुरुवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के मुंबई दौर के दौरान उन्हें मातोश्री लाने के लिए एंड़ी-चोटी का जोर लगाती नजर आई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे का समझौता अटक गया है। ऐसे में शाह का मुंबई दौरा बेहद अहम है।

Uddav Thakery

षिव सेना और बीजेपी सहमति नहीं बनने की सूरत में अकेले चुनाव लड़ने की भी बात कर रही हैं। शाह के मातोश्री दौरे से दोनों पार्टियों के बीच जमी बर्फ पिघल सकती है। इसी वजह से सेना ने शाह का मातोश्री दौरा सुनिश्चित करने के लिए काफी जोर लगाया। यह सेना की परेशानी को जाहिर करता है। उद्धव ठाकरे की इतनी कोशिशों के बाद अमित शाह ने अंतिम वक्त में अपनी योजना बदली और मातोश्री जाने का फैसला किया। उद्धव ने अमित शाह को फोन कर तल्खी कम की और शाह को मातोश्री आने का आग्रह किया। शाह, उद्धव से मिलने देर रात गए। उद्धव और शाह के बीच क्या बात हुई अभी साफ नहीं है।

बीजेपी के एक नेता ने बताया,‘ षिवसेना चाहती है कि शाह, उद्धव ठाकरे से बात करें, ताकि सीटों के बंटवारे से जुड़े गतिरोध का हल निकाला जा सके। उद्धव बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से बात कर सेना का पक्ष रख सकते हैं कि उनकी पार्टी क्यों ज्यादा सीटों के लिए दबाव बना रही है। उनका यह भी कहना था कि बीजेपी के कुछ नेता इसी वजह से उद्धव और शाह की मुलाकात नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘हम सेना को इस मसले पर ठंडा रिस्पॉन्स देना चाहते थे। उद्धव इसलिए मुलाकात करना चाहते हैं, ताकि शाह बीजेपी की राज्य इकाई को सीटों के बंटवारे पर समझौते के लिए राजी कर सकें।’

शाह के दौरे से बीजेपी में भी विभाजन खुलकर सामने आ गया है। दो दिनों पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने कहा था कि शाह अपने मुंबई दौरे में उद्धव से मुलाकात करेंगे। हालांकि, बीजेपी नेता विनोद तावड़े ने गुरुवार को कहा कि बीजेपी अध्यक्ष शिष्टाचार मुलाकात के लिए मोतोश्री जाएंगे। बीजेपी नेताओं ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष उद्धव से मिलेंगे, लेकिन वह सीटों के बंटवारे को लेकर किसी तरह का आश्वासन नहीं देंगे, क्योंकि उन्हें पता है कि बीजेपी की ज्यादा सीटों की डिमांड पूरी तरह से सही है।

इन तमाम घटनाक्रमों के बीच सेना अपनी पार्टी की जीत संभावनाओं को बढ़ाने पर भी काम कर रही है। लोकसभा चुनावों के बाद से ही शिवसेना बीजेपी को नजरअंदाज करते हुए खुद से चुनावी वादों का ऐलान करती रही है। सेना के इन अभियानों का मकसद आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी के मुकाबले ज्यादा सीटें हासिल करना है।


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