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चीन के आगे ‘झुकी’ मोदी सरकार, तिब्बती कार्यक्रम रुकवाया


नई दिल्ली,(एजेंसी) 06 सितम्बर । चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग के 17 से 19 सितंबर तक भारत दौरे के वक्त यहां तिब्बती लोगों द्वारा दलाई लामा के लिए आयोजित एक आध्यात्मिक कार्यक्रम को भारत सरकार ने स्थगित करवा दिया है। दलाई लामा का यह कार्यक्रम 18 व 19 सितंबर को प्रस्तावित था लेकिन चीन की भावनाओं को देखते हुए अधिकारियों ने तिब्बती कार्यक्रम के आयोजकों से कहा कि यह समारोह चीनी राष्ट्रपति के स्वदेश लौटने के बाद करें। सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम के आयोजकों ने सरकार का आग्रह मान लिया है।

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सूत्रों ने बताया कि भारत में तिब्बत की निर्वासित सरकार का दफ्तर बंद करने का चीन का भारत पर पहले ही भारी दबाव है। इसे देखते हुए दलाई लामा का दिल्ली में मौजूद रहना और सार्वजनिक कार्यक्रम में मौजूद रहना चीन को नागवार गुजरता। चीन सरकार की ओर से पहले ही संकेत आ रहे हैं कि राष्ट्रपति शी चिन फिंग यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वार्ता के दौरान तिब्बत की निर्वासित सरकार का दफ्तर बंद करने को कहेंगे। उल्लेखनीय है कि 26 मई को मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री लोबसांग सांगे को भी निमंत्रित किया गया था। भारत सरकार अब तक तिब्बत की निर्वासित सरकार से दूरी बनाकर चलती रही है। लेकिन चूंकि लोबसांग सांगे को दलाई लामा का उत्तराधिकारी घोषित किया गया है, इसलिए चीन ने इसे नोटिस में लिया था कि राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर इसे मान्यता देने जैसा कदम उठाया गया।

अजीत डोभाल 8 को जाएंगे चीन:

राष्ट्रपति शी चिन फिंग के भारत आने के पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 8 सितंबर को सीमा मामलों पर अपने चीनी समकक्ष यांग च्ये छी से बात करने पेइचिंग पहुंचेंगे। इस दौरान वह राष्ट्रपति शी से भी मिलेंगे। अजीत डोभाल अपने चीन दौरे में राष्ट्रपति शी के भारत दौरे की तैयारी को अंतिम रूप देंगे। यहां राजनयिक सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति शी के भारत दौरे में सीमा मसले पर बात होगी। लेकिन चीन भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा कि भारत हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला स्थित तिब्बत की निर्वासित सरकार का दफ्तर बंद करवाए।

तिब्बत पर झक-झक:

चीनी पर्यवेक्षकों का कहना है कि भारत ने जब तिब्बत को चीन के राज्य के तौर पर मान्यता दी है तब निर्वासित सरकार को भारत में कामकाज करने और चीन विरोधी गतिविधियों को चलाने देने का क्या मतलब है, लेकिन भारत में इसके जवाब में यही कहा जाता है कि भारत में तिब्बती लोग शरणार्थी के तौर पर रहते हैं और तिब्बत में उनके लौटने के लिए अनुकूल माहौल चीन को बनाना चाहिए। राष्ट्रपति शी चिन फिंग के भारत दौरे में मुख्य तौर पर आर्थिक क्षेत्र में कई अहम समझौते होने की उम्मीद है। इसकी रूपरेखा वाणिज्य राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण के तीन दिनों के दौरे में तैयार की गई है।

चीन ने किया खारिज:

चीन ने राष्ट्रपति के पाक दौरे की खबर को सिरे से खारिज करते हुए इसे मात्र अफवाह बताया है। चीन के विदेश मंत्री क्विन गांग ने मीडिया से कहा कि हमने कभी आधिकारिक रूप से ये घोषणा नहीं की कि राष्ट्रपति पाकिस्तान के दौरे पर जानेवाले हैं। गौरतलब है कि शी चिन फिंग को इस महीने पाकिस्तान के अलावा भारत और श्रीलंका का दौरा करना था। बीच में ये खबरें आई थीं कि पाकिस्तान में आंदोलनों के कारण सरकार पर संकट को देखते हुए चीन के राष्ट्रपति वहां का दौरा रद्द कर चुके हैं। हालांकि तिब्बत को छोड़ दें तो भारत से उन्हें कोई विशेष शिकायत नहीं है लेकिन फिर भी कूटनीतिक विशेषज्ञ हर कदम फूंक फूंक कर चलना चाहते हैं।


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