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दंगों में मोदी की क्या गलतीः टोनी एबट


नई दिल्ली,(एजेंसी) 06 सितम्बर । ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबट ने शुक्रवार को कहा कि नरेंद्र मोदी को 2002 के दंगों के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए क्योंकि वह उस वक्त महज एक ‘पीठासीन अधिकारी‘ थे जो ‘अनगिनत जांचों’ में पाक साफ साबित हो चुके हैं।

Tony-Abbott

एबट ने एक इंटरव्यू में कहा कि मेरी समझ है कि इसको लेकर अनगिनत जांचें हो चुकी हैं और मोदी हमेशा पाक साफ साबित हुए। निश्चित तौर पर मेरे लिए यही पर्याप्त है। इस मुद्दे पर अपने विचार रखते हुए ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा कि वह स्वीकार करते हैं कि कभी-कभी जब भयावह चीजें होती हैं तो ‘हम (नेता) पीठासीन होते हैं।’

मोदी ने मंजूर किया न्योता :

मोदी और एबट ने आपसी बातचीत के दौरान अफगानिस्तान और मध्यपूर्व के ताजा हालात पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री एबट ने प्रधानमंत्री मोदी को नवंबर के मध्य में ऑस्ट्रेलिया में होने वाली जी-20 शिखर बैठक में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण दोहराया जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार कर लिया।

टोनी एबट ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ शिष्टमंडल स्तर की बातचीत के पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की थी। भारत के साथ परमाणु सहयोग समझौता सम्पन्न करने पर राष्ट्रपति मुखर्जी ने टोनी एबट से अपनी खुशी जाहिर की। मुखर्जी ने कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ेगा।

प्रधानमंत्री एबट भारत के दो दिन के दौरे पर गुरुवार को सुबह मुम्बई पहुंचे थे। शुक्रवार सुबह उन्होंने नई दिल्ली में राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर राष्ट्रपति भवन पहुंचे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी उनसे मुलाकात की। वह उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी से भी मिले।

11वीं सदी की चुराई हुई मूर्तियां लौटाईं :

ऑस्ट्रेलियाई पीएम टोनी एबट ने देवी देवताओं की दो प्राचीन मूर्तियां नरेंद्र मोदी को सौंपी। इन मूर्तियों को तमिलनाडु के मंदिरों से कथित तौर पर चुराया गया था और इन्हें ऑस्ट्रेलिया की आर्ट गैलरी की ओर से खरीदा गया था। मोदी के साथ बैठक के दौरान, एबट ने मूर्तियां लौटाईं जिनमें से एक 11वीं-12वीं शताब्दी के चोल वंश की नटराज की मूर्ति है। दूसरी मूर्ति 10वीं सदी की है जिसमें शिव के अर्धनारीश्वर रूप को दिखाया गया है। दोनों मूर्तियां तमिलनाडु के मंदिरों से कथित तौर पर चुराई गई थीं और भारत ने मार्च में उन्हें लौटाने को कहा था।


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