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मल्टी ब्रैंड मल्टी ब्रैंड रिटेल में एफडीआई मंजूर नहीं: निर्मला सीतारमणरिटेल में एफडीआई मंजूर नहीं: निर्मला सीतारमण


नई दिल्ली ,(एजेंसी) 08 सितम्बर । कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा है कि ‘इंडिया मल्टी-ब्रैंड रिटेल ट्रेड में फॉरेन इनवेस्टमेंट को इजाजत नहीं देगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी सरकार इस बारे में कोई नोटिफिकेशन लाने की तैयारी नहीं कर रही है, क्योंकि इस तरह के कोई भी पेंडिंग ऐप्लिकेशंस नहीं हैं।‘

Nirmala Sita raman

नई सरकार के 100 दिनों के बारे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, ‘हम स्पष्ट हैं कि मल्टी-ब्रैंड रिटेल ट्रेड में एफडीआई को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। हम एमबीआरटी में एफडीआई को इजाजत नहीं देंगे। इस बारे में कोई भ्रम नहीं है।‘ सीतारमण ने कहा कि सरकार की ई-कॉमर्स पर एफडीआई पॉलिसी भी इसी तरह से है। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘हम ई-कॉमर्स में भी एफडीआई को मंजूरी नहीं देंगे, क्योंकि इस पर भी पॉलिसी मल्टी-ब्रैंड रिटेल वाली ही है।‘ उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जरूरत है कि क्या ई-कॉमर्स को खोले जाने से फॉरेन मल्टी-ब्रैंड रिटेलर्स को बैकडोर एंट्री मिलती है।
सीतारमण ने कहा कि उनकी पार्टी ने मल्टी-ब्रैंड रिटेल ट्रेड पर अपनी पोजीशन स्पष्ट कर दी है और अपने मैनिफेस्टो के बूते पर आम चुनावों में जीत हासिल की है। यूपीए सरकार ने फॉरेन इनवेस्टमेंट के लिए मल्टी-ब्रैंड रिटेल सेक्टर को खोल दिया था और सेक्टर में 51 फीसदी एफडीआई को इजाजत दे दी थी। बीजेपी ने इस पॉलिसी का विरोध किया था।
इंडिया में मल्टी ब्रैंड रिटेल सेक्टर राजनीतिक तौर पर काफी संवेदनशील मामला है। इस सेक्टर में बड़े स्तर पर किराना दुकानों का कब्जा है और लाखों लोगों को इससे रोजगार मिलता है। हालांकि, नई सरकार इस सेक्टर में एफडीआई के खिलाफ है, लेकिन इसने यूपीए सरकार के मल्टी ब्रैंड रिटेल ट्रेड में एफडीआई को इजाजत दिए जाने वाली पॉलिसी को खारिज करने की शुरुआत अभी तक नहीं है।
ी पर जीवन के लिये समुद्र बहुत जरूरी हैं। समय आ गया है कि इनका संरक्षण किया जाये। कृपया मेरे साथ इस मिशन में शामिल हों और इस पर दस्तखत करें।


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