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प्रशांत भूषण ने कहा, नहीं बता सकता व्हिसलब्लोर का नाम


नई दिल्ली,(एजेंसी) 19 सितम्बर। सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा पर 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के आरोपियों के संपर्क में रहने का आरोप लगाने वाले एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने गुरुवार को इस मामले में व्हिसलब्लोअर का नाम सुप्रीम कोर्ट को बताने से इनकार कर दिया। एनजीओ ने कहा था कि सीबीआई डायरेक्टर के रेजिडेंस के एंट्री रजिस्टर के डिटेल्स बता रहे हैं कि वह आरोपियों के संपर्क में थे।

prashant bhushan

इस पर पिछली सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने एनजीओ से कहा था कि वह उन लोगों के नाम बताए, जिन्होंने उसे इस मामले में जानकारी दी थी। हालांकि, गुरुवार को एनजीओ ने कहा कि अगर वह व्हिसलब्लोर के नाम का खुलासा कर देगा, तो इस बात का खतरा है कि उसे शारीरिक रूप से चोट पहुंचाई जाए या उसे प्रताडि़त किया जाए। एनजीओ ने दलील दी कि नाम का खुलासा करना एक गलत परंपरा होगी।

हालांकि, एनजीओ की इस दलील से सीबीआई डायरेक्टर के लिए आसानी हो जाएगी और उनका यह दावा मजबूत हो सकता है कि एंट्री रजिस्टर में गलत डिटेल्स दिखाए गए हैं। सिन्हा के वकील विकास सिंह ने पिछली सुनवाई में कहा था कि रजिस्टर में 10 पर्सेंट एंट्रीज सही हो सकती हैं, लेकिन बाकी सब गलत हैं।

उन्होंने एनजीओ को चुनौती दी थी कि वह व्हिसलब्लोअर का नाम बताए। उन्होंने कहा था कि किसी को तो रजिस्टर के लिए जिम्मेदारी लेनी होगी और अगर उसमें फर्जी नाम लिखे गए हैं तो उसको फिर उसके नतीजों का सामना करना होगा। पिछली सुनवाई में सीबीआई के वकील की दलील स्वीकार करते हुए कोर्ट ने एनजीओ के वकील प्रशांत भूषण से उस व्हिसलब्लोअर का नाम एक सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा था, जिसने एंट्री रजिस्टर से जुड़ी जानकारी मुहैया कराई हो।

भूषण ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि उनके आवास पर लॉग बुक किन्हीं अज्ञात व्यक्तियों ने भेजी थी, हालांकि बाद में उन्होंने कहा था कि नाम का खुलासा करने के लिए उन्हें एनजीओ और व्हिसलब्लोअर से बात करनी होगी। गुरुवार को एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि सीबीआई की फाइल नोटिंग्स और कोर्ट के सामने पेश रिकॉर्ड्स के आधार पर यह तय किया जाए कि सिन्हा का आचरण बेदाग था। एनजीओ चाहता है कि सिन्हा को 2जी केस मामले से अलग कर दिया जाए।

एनजीओ ने कहा कि जहां तक एंट्री रजिस्टर में दर्ज नामों की बात है तो उनका वेरिफिकेशन सीबीआई डायरेक्टर के आवास के बाहर तैनात आईटीबीपी और सीबीआई के गार्ड्स से पूछताछ कर किया जा सकता है, जिनकी लिस्ट ओरिजिनल एंट्री रजिस्टर के साथ कोर्ट को सौंपी गई है।
एनजीओ ने कहा कि रजिस्टर सही हो या नहीं, इस तथ्य पर तो कोई सवाल ही नहीं है कि कई रसूखदार आरोपियों की मीटिंग सीबीआई डायरेक्टर के रेजिडेंस पर हुई थी।


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