Home >> Breaking News >> मोदी का कद बढ़ाएगा‘ मॉम‘

मोदी का कद बढ़ाएगा‘ मॉम‘


नई दिल्ली ,(एजेंसी) 26 सितम्बर । मंगल की कक्षा में पहुंचने वाला पहला एशियाई देश बनने से भारत का कद और ऊंचा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब अमेरिका की धरती पर शुक्रवार को कदम रखेंगे तब विश्व के नेता उन्हें एक नई तकनीकी और सामरिक ताकत के तौर पर भी देखेंगे। मंगलायन की सफलता को चीन, ऑस्ट्रेलिया सहित कई विदेशी ताकतों ने नोटिस में लिया और इसके लिए भारत को बधाई दी है।

mission of marsh

भारत के लिए सबसे अहम बात यह है कि मंगल ग्रह की सफलता से भारत को अब विश्व समुदाय दूसरे नजरिए से देखेगा। मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करना भारत की एक महान वैज्ञानिक उपलब्धि तो है लेकिन सामरिक दुनिया में भी भारत का मान बढ़ेगा।

विकसित देशों की होड़ में भारत

अहम बात यह है कि भारतीय मंगलयान अमेरिकी मार्स सेटेलाइट के मंगल की कक्षा में पहुंचने के दो दिनों बाद पहुंचा लेकिन इस पर होने वाले खर्च में दस गुना का फर्क रहा। भारत ने अपने मंगलयान पर करीब 450 करोड़ खर्च कर यह सिद्ध किया है कि विश्व अंतरिक्ष बाजार में भारत अब बाकी विकसित देशों से होड़ कर सकता है।

विकासशील देशों को सेटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में डालने के लिए उन्हें यूरोपीय, अमेरिकी, रूसी या अब चीनी अंतरिक्ष एजेंसियों की शरण में जाना पड़ता है लेकिन अब भारत व्यावसायिक दर पर बाकी देशों के सेटेलाइट छोड़ने वाला देश बनकर उभरेगा। विश्व अंतरिक्ष बाजार में चीन ने पहले ही प्रवेश कर विकसित देशों के साथ होड़ शुरू कर दी है लेकिन अब चीन के साथ भारत ने भी होड़ करने की क्षमता सिद्ध की है।

फिलहाल भारत अपने अंतरिक्ष केन्द्रों से साल में एक या दो अंतरिक्ष राकेट भेज सकता है लेकिन दूसरे देशों के सेटेलाइट छोड़ने का ऑर्डर लेने के लिए भारतीय अंतरिक्ष संगठन (इसरो ) को कई स्पेस लॉन्च स्टेशन स्थापित करने होंगे। इसके लिये भारी निवेश की जरूरत है लेकिन इससे न केवल भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्रा का अरबों डालर का बड़ा बिजनेस हाथ लगेगा बल्कि भारत में कुशल इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की भी मांग काफी बढ़ेगी।

सैन्य ताकतों की क्षमता भी की

मंगल ग्रह तक अपने राकेट को भेज कर भारत ने अपनी यह क्षमता भी सिद्ध की है कि सैनिक दुनिया में भी भारत बड़ी सैन्य ताकतों के साथ कदम ताल कर सकता है। मंगलयान जिस पीएलएलवी राकेट से छोड़ा गया है, उसी तकनीकी क्षमता के आधार पर भारत पृथ्वी के किसी भी कोने तक जाने वाला इंटर कंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) छोड़ सकता है। अंतरिक्ष ताकत बनने में भारत रूस और फ्रांस जैसे देशों के सहयोग से इनकार नहीं कर सकता लेकिन हाल तक अमेरिका ने भारत के अंतरिक्ष संगठन पर इसलिए प्रतिबंध लगाया था कि भारत इसकी बदौलत एक सैन्य ताकत भी बन जाएगा।


Check Also

आइए जानते हैं महेश नवमी से सबंधित अहम बातों के बारे में…

हिंदू पंचांग के मुताबिक, प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *