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रेडियो के जरिये की मोदी ने रखी ‘मन की बात‘


नई दिल्ली, (एजेंसी ) 03 अक्टूबर । विजयादशमी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो के जरिए अपने ‘मन की बात‘ रखी। उन्होंने देशवासियों से अपने अंदर की 10 बुराइयों को खत्म करने, निराशा त्यागने और अपने सामर्थ्य, क्षमता और कौशल को बढ़ाकर इनका इस्तेमाल देश की प्रगति के लिए करने की अपील की। मोदी ने शेर और भेड़ की कहानी के जरिए आत्मबल का महत्व भी बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भेड़ के बीच शेर भी अपनी ताकत भूल जाता है। मोदी के भाषण का 24 भाषाओं में अनुवाद हुआ। रेडियो के अलावा दूरदर्शन पर भी इसका प्रसारण हुआ।

महात्मा गांधी की प्रिय खादी के उत्पादों के इस्तेमाल पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से कम-से-कम खादी के एक वस्त्र का उपयोग करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कहा कि अगर हम खादी की कोई एक चीज भी खरीदते हैं, यह चादर, रुमाल या कुछ भी हो सकता है, तो इससे गरीब परिवार के घर में दिया जलने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम में खादी ग्रामोद्योग भवन विशेष छूट दे रहे हैं, लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए। अपने ड्रीम मिशन का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ‘स्वच्छ भारत अभियान में देशभर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। हम सबको मिलकर देश से गंदगी का कलंक मिटाना होगा।‘

इसके साथ ही उन्होंने विशेष रूप से अशक्त बच्चों के बारे में समाज की जिम्मेदारी का बोध कराने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, ‘मुझे गौतम पाल नाम के व्यक्ति ने सुझाव दिया कि देश में कुछ स्पेशल चाइल्ड हैं, उनके लिए नगपालिकाओं को कुछ करना चाहिए। मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था तब मैंने स्पेशल बच्चों के साथ कुछ समय बिताया था। वह मेरे जीवन का बहुत इमोशनल अनुभव था।‘

रेडियो के जरिये समय-समय पर ‘मन की बात‘ रखने का वादा करते हुए मोदी ने नागरिकों से सुझाव मांगे। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्हें काफी संख्या में सुझाव मिल रहे हैं। एक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘मुझे एक सुझाव मिला है कि पाचंवी से बच्चों को स्किल डिवेलपमेंट के लिए ट्रेनिंग मिलना चाहिए। मैं इस सुझाव को बहुत उपयोगी मानता हूं।‘ उन्होंने कहा कि वह रेडियो पर ‘मन की बात‘ में पसंद आने वाले सुझावों का जिक्र करेंगे।

देश के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के लोगों से संपर्क साधने की कोशिश के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार रेडियो के जरिए लोगों को संबोधित किया है। करीब 15 मिनट के भाषण में मोदी ने कहा, ‘जब मैं सवा सौ करोड़ लोगों की बात करता हूं तब मेरा आशय खुद की शक्ति को पहचानने और मिलकर काम करने से होता है। हम विश्व के बेजोड़ लोग हैं। हम मंगल पर कितने कम खर्च में पहुंचे। हम अपनी शक्ति को भूल रहे हैं। इसे पहचानने की जरूरत है।‘

आकाशवाणी पर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने एक और कथा का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘एक बार एक राहगीर एक स्थान पर बैठ कर आते-जाते लोगों से रास्ता पूछ रहा था। उसने कई लोगों से रास्ता पूछा। इस पूरी घटना को दूर बैठे एक सज्जन देख रहे थे। कुछ देर बाद राहगीर ने खड़े होकर एक व्यक्ति से रास्ता पूछा।
इसके बाद वह सज्जन उसके पास आए और उसे रास्ता बताया।‘ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राहगीर ने उस सज्जन से कहा कि आप इतने समय से मुझे रास्ता पूछता देख रहे थे लेकिन क्यों नहीं बताया। तब उस सज्जन ने कहा कि इससे पहले तुम बैठकर रास्ता पूछ रहे थे और मुझे लगा कि तुम यूं ही रास्ता पूछ रहे हो। लेकिन जब तुम उठ खडे हुए तब मुझे लगा कि वास्तव में अपनी राह जाना चाहते हो।‘

उन्होंने कहा, ‘मेरा कहना है कि सवा सौ करोड़ देशवासियों में अपार सामर्थ्य है। इसकी सही पहचान कर अगर हम चलेंगे, तब हम विजयी होंगे। सवा सौ करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य और शक्ति से हम आगे बढ़ेंगे। यह देश सरकार का नहीं है। यह देश हम सबका है।‘ अंत में उन्होंने कहा, ‘रविवार को 11 बजे फिर आप सबसे बात होगी। आप सबसे अपने मन की बात कर मुझे बहुत अच्छा लगा। मेरे देश की ताकत किसानों से है, गरीबों से है, माताओं और बहनों से है। रेडियो के माध्यम से मैं पूरे समाज से जुड़ना चाहता हूं।‘


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