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जेफ बेजॉस और सत्या नडेला: दो ग्लोबल दिग्गज भारत में


मुम्बई,(एजेंसी) 05 अक्टूबर । इस हफ्ते दुनिया के दो बड़े बिजनेस लीडर्स अमेजॉन डॉट कॉम के फाउंडर जेफ बेजॉस और माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला का भारत में होना एक दिलचस्प संयोग रहा।

बिजनेस के इन दीवानों की शख्सियत, कामयाबी के सफर और बिजनेस स्ट्रैटिजी पर एक खास नजर:

Amezen  Jef Begaas

जेफ बेजॉस
फाउंडर और सीईओ, अमेजॉन डॉट कॉम
जन्म: 12 जनवरी, 1964
जन्म स्थान: न्यू मेक्सिको, अमेरिका
शिक्षा: बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग
शिक्षण संस्थान: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी
सैलरी: 1.68 मिलियन डॉलर सालाना
नेट वर्थ: 30 बिलियन डॉलर
पत्नी: मकेंजी बेजॉस

कामयाबी का सफर
फरवरी, 1995 में अमेजॉन डॉट कॉम की स्थापना से पहले 1994 तक भी बेजॉस कामयाबी के एक अहम पड़ाव पर खड़े थे। वह वॉल स्ट्रीट इनवेस्टमेंट बैंकर डीई शॉ एंड कंपनी में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट थे, लेकिन संतुष्टि न थी। मन में कुछ और करने की ललक थी। एक दिन इंटरनेट सर्फिंग के दौरान उन्होंने देखा कि इंटरनेट का यूज करने वालों की तादाद बहुत ही तेजी से बढ़ रही है। इन्हीं आंकड़ों में बेजॉस ने ऑनलाइन सामान बेचने की अपार संभावनाओं को भांप लिया। बस फिर क्या था! 1995 में सिएटल में अपने घर के गैरेज से ही बिजनेस शुरू कर दिया। कंपनी का नाम रखा गया अमेजॉन डॉट कॉम और शुरुआत की गई किताबें बेचने से। धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा और एक साल के अंदर कंपनी के कर्मचारियों की संख्सा 100 तक जा पहुंची और उसकी सेल करीब 15 मिलियन डॉलर। तीन साल में एम्प्लॉई की संख्या 3 हजार हो गई, वहीं सेल का आंकड़ा जा पहुंचा 610 मिलियन डॉलर पर। कंपनी ने खुद को दुनिया का सबसे बड़ा बुकस्टोर कहकर प्रचारित किया। इसके बाद म्यूजिक सीडी, फिर टॉयज और धीरे-धीरे बाकी सामान भी कंपनी ने ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया। दिलचस्प यह है कि स्थापना के तीन साल बाद तक कंपनी की सेल तो तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन उसका प्रॉफिट जीरो ही था। उस वक्त बेजॉस ने एक इंटरव्यू में कहा था – अगर लंबा खेलना है तो अभी हमें प्रॉफिट के बारे में नहीं सोचना चाहिए। 2007 में ई-बुक रीडर किंडल का लॉन्च, अगस्त 2013 में द वॉशिंगटन पोस्ट अखबार को खरीदना, ऐसी कई बड़ी घटनाओं के बलबूते बेजॉस ने तेजी से कामयाबी की नई इमारत लिखी।

भारत में स्ट्रैटजी
करीब 19 साल पुरानी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजॉन डॉट कॉम को भारत में अपना कारोबार शुरू किए अब एक साल से ज्यादा समय हो चुका है। जाहिर है, ई-कॉमर्स फील्ड का वल्र्ड लीडर होने के बावजूद अमेजॉन भारत में अभी एक शिशु की तरह है और अब इस शिशु को बड़ा करने की कोशिशें तेजी पकड़ रही हैं। इन्हीं कोशिशों के तहत पिछले दिनों बेजॉस भारत में थे। उन्होंने यहां 2 बिलियन डॉलर का इनवेस्टमेंट करने की घोषणा की, लेकिन ई-कॉमर्स के क्षेत्र में भारत में जो एफडीआई से जुड़े नियम हैं, वे उनके रास्ते का रोड़ा जरूर हो सकते हैं। ऐसी अड़चनों का सामना कंपनी अपनी स्ट्रैटिजी में थोड़ा सा चेंज लाकर करना चाहती है।

भारतीय कंपनियों के लिए खतरा!
क्या अमेजॉन का भारत पर ज्यादा ध्यान देना स्नैपडील और फ्लिपकार्ट जैसी भारतीयों ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए खतरा है? क्या अमेजॉन की आक्रामक नीतियां और भारतीय बाजार में डाली जा रही मोटी रकम इन कंपनियों को खा जाएगी? ये सवाल इसलिए उठता है क्योंकि जिस दिन फ्लिपकार्ट ने 1 बिलियन डॉलर भारतीय बाजार में लगाने की बात कही, उसके ठीक अगले ही दिन अमेजॉन ने भारतीय बाजार में 2 बिलियन डॉलर का इनवेस्टमेंट करने की बात कहकर अपने इरादे जाहिर कर दिए।
इमेजेज बाजार डॉट कॉम के फाउंडर और सीईओ संदीप माहेश्वरी कहते हैं – ‘‘यह सही है कि अमेजॉन बहुत बड़ी कंपनी है, लेकिन एक भारतीय बिजनेस कंपनी ही यहां के कस्टमर्स की जरूरतों और उनकी फीलिंग्स को अच्छी तरह से समझ सकती है इसलिए भारतीय कंपनियों को डरने की जरूरत नहीं है। कोई आश्चर्य नहीं है कि आने वाले समय में फ्लिपकार्ट और स्नैपडील जैसी कंपनियां अमेजॉन के पैर उखाड़ दें।‘‘

Satya Nadela

सत्यनारायण नडेला
सीईओ, माइक्रोसॉफ्ट
जन्म: 1967
जन्म स्थान: अनंतपुर, आंध्र प्रदेश, भारत
शिक्षा: बीटेक, एमएस, एमबीए
शिक्षण संस्थान रू मणिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी, मेंगलोर यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो
सैलरी: 1.2 मिलियन डॉलर सालाना
नेट वर्थ: 45 मिलियन डॉलर
पत्नी: अनुपमा नडेला

कामयाबी का सफर
अनुशासित, पढ़ाकू और गंभीर, भारतीय समाज में एक आदर्श स्टूडेंट की ऐसी छवि मानी जाती है, लेकिन स्टूडेंट लाइफ में सत्या ऐसे बिल्कुल न थे। क्रिकेट, म्यूजिक और डिबेट उनके शौक थे। पढ़ाई में वह कभी टॉप पर नहीं रहे। पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ समय तक सन माइक्रोसिस्टम्स में काम करने के बाद वह 1992 में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े और तब से इसी कंपनी के साथ हैं। माइक्रोसॉफ्ट में 21 साल के कार्यकाल में नडेला ने सर्वर ग्रुप से शुरुआत की थी। इसके बाद वह सॉफ्टवेयर डिविजन, ऑनलाइन सर्विसेज, आरएंडडी, ऐडवर्टाइजिंग प्लैटफॉर्म में गए और हेड बनकर सर्वर डिविजन में लौटे। सीईओ बनने से पहले तक नडेला कंपनी के क्लाउड सर्विसेज डिविजन में इग्जेक्युटिव वाइस प्रेजिडेंट थे।

शख्सियत
सीईओ के रूप में भी उनकी कामयाबी का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि 4 फरवरी को जब से उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ का पद संभाला है, तब से कंपनी के स्टॉक में 25.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सीईओ के रूप में उनकी नियुक्ति से साफ संदेश दिया गया कि कंपनी डिवाइस और सर्विस पर फोकस करना चाहती है। उनके लिए यह एक बड़ा चैलेंज था कि गूगल जैसे प्रतिद्वंद्वियों और कुछ स्टार्ट-अप्स पर कंपनी हावी रहे। नडेला ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जो कंपनी के इतिहास में पहली बार हो रहे थे।

कामयाबी के मंत्र –
अपने हालिया भारत दौरे के दौरान सत्या ने तमाम स्टूडेंट्स से भी मुलाकात की और उन्हें कामयाबी के टिप्स दिए।
स्टूडेंट्स को नए बिजनेस मॉडल और नए डिजाइन जो खासतौर से भारत के लिए बनाए जा रहे हैं, उन पर नजर रखनी चाहिए।
आप जो भी काम करें, उससे प्यार करें, उसे अपना समझकर करें। ऐसा करने से कामयाबी आपको अपने आप मिलेगी।
दूसरी तमाम चीजों के साथ साथ युवाओं में इंजीनियरिंग स्किल्स भी होनी चाहिए। यह स्किल किसी चीज को बनाने में बड़ी काम आती है।
भारतीय युवा आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरपूर हैं। इन युवाओं से बातें करना मुझे बहुत पसंद है।
विदेशों में भी मैं भारतीय स्टूडेंट्स से मिलता हूं, तो मुझे उनके भीतर गजब का आत्मविश्वास और उम्मीद नजर आती है।


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