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मोदी के दम से बढ़ सकती इंडिया की ग्रोथः विष्व बैंक


नई दिल्ली ,(एजेंसी) 07 अक्टूबर । विष्व बैंक ने कहा है कि ‘मोदी डिविडेंड‘ यानी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार बनने से सेंटिमेंट में आए सुधार के कारण भारत की इकनॉमिक ग्रोथ साल 2015-16 में बढ़कर 6.4 प्रतिषत हो सकती है। बैंक ने कहा है कि मोदी सरकार को पिछली सरकार के मुकाबले ज्यादा मार्केट-फ्रेंडली माना जा रहा है और इसके चलते कारोबारियों का उत्साह बढ़ सकता है।

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विष्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट ‘साउथ एशिया इकनॉमिक फोकस‘ में कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था समूचे दक्षिण एशिया क्षेत्र के उत्पादन में 80 पर्सेंट योगदान करती है और 2014-15 में 5.6 प्रतिषत ग्रोथ हासिल कर यह 2015-16 में 6.4 प्रतिषत की रफ्तार से बढ़ेगी।‘

देश की इकनॉमिक ग्रोथ के स्रोतों में अस्वाभाविक रूप से एक व्यक्ति विशेष का उल्लेख करने के अलावा रिपोर्ट में परंपरागत तरीका ही अपनाया गया है। इसमें कहा गया है कि दरमियानी तौर पर इकॉनमी की हालत बेहतर करने के लिए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स करने होंगे और माइक्रो-इकनॉमिक मैनेजमेंट में बुद्धिमानी दिखानी होगी।

भारत के भीमकाय पड़ोसी का जिक्र करते हुए वल्र्ड बैंक ने कहा कि चीन की ग्रोथ अगले साल सुस्त होकर 7.2 प्रतिषत रह जाएगी। इसी साल अप्रैल में वर्ल्ड बैंक ने इसके 7.5 प्रतिषत रहने का अनुमान लगाया था। बैंक को यह भी नहीं लग रहा है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए वहां का फेडरल रिजर्व जो कुछ कर रहा है, उससे पीछे हटने पर भारत के लिए कोई खतरा है। बैंक का कहना है कि इंडियन इकॉनमी अपनी हालत संभालने के लिहाज से पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी है।

नई सरकार की ओर से पॉलिसी मैटर्स पर हाल में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की इकनॉमिक ग्रोथ साल 2016-17 में बढ़कर 7 प्रतिषत तक पहुंच जाएगी। सरकार ने रेलवे और रक्षा क्षेत्र में एफडीआई के लिए दरवाजे और खोले हैं, प्लानिंग कमिशन का वजूद खत्म कर उसकी जगह एक इकनॉमिक एडवाइजरी बॉडी बनाने की बात की है और फाइनैंशल इन्क्लूजन की दिशा में कदम बढ़ाया है। साथ ही, लैंड एक्विजिशन के नियम सरल किए हैं और श्रम कानूनों में बदलाव किए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नई सरकार के रुख के चलते प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ने की उम्मीद है और क्रूड की घटती कीमतों से प्राइवेट सेक्टर की कॉम्पिटीशन करने की क्षमता भी बढ़ेगी। रिपोर्ट में हालांकि कहा गया है कि इस ग्रोथ पोटेंशल को हासिल करने के लिए भारत को और ज्यादा आर्थिक सुधार करने होंगे।

विष्व बैंक ने दो अलग-अलग रिपोर्ट्स में कहा कि साउथ एशिया में इकनॉमिक ग्रोथ के साल 2015 में बढ़कर 6 प्रतिषत होने की संभावना है और इसकी वजह भारत होगा। दूसरी ओर, चीन की जीडीपी ग्रोथ में सुस्ती के कारण ईस्ट एशिया की इकनॉमिक ग्रोथ 2015 में घटकर 6.9 प्रतिषत रह जाएगी।


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