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आखिर नेहरू और गांधी हैं किसके?


नई दिल्ली (एजेंसी) 07 अक्टूबर । राजनीतिक दलों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समझना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन-सा होता जा रहा है। वे कब, कहां और कौन सा दांव खेल दें, कोई नहीं जानता। सोमवार को हरियाणा की रैली में कांग्रेस पर हमला करते करते जब वह चाचा नेहरू (14 नवंबर), इंदिरा गांधी (19 नवंबर) जैसे प्रतीक चिह्नों का जिक्र करने लगे तो राजनीतिक हलकों में फिर खलबली मच गई। राजनीतिक पंडितों ने इसके भी मायने तलाशने शुरू कर दिए।

Nehru & Gandhi ji

इनका जिक्र तो मोदी ने सोमवार को पहली बार किया, लेकिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जिक्र वे कई बार कर चुके हैं। इस पर कांग्रेस भी नींद से जाग गई है। उसे लगने लगा है कि जिसकी विरासत पर उसका हक था, उसे कोई गैर कांग्रेसी कथित सांप्रदायिक शख्स कैसे छीन सकता है। नतीजा यह हुआ कि अपनी राजनीतिक हैसियत बचाने के लिए कांग्रेस ने भी मोदी पर तीखे हमले शुरू कर दिए। पर अब सवाल यही है कि बापू की विरासत पर किसका हक है। जानकार इसे मोदी का एक और मास्टर स्ट्रोक मान रहे हैं।

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी जब बनारस की जनता को धन्यवाद करने पहुंचे, तो वहां उन्होंने सबसे पहले साफ-सफाई के मुद्दे को उठाया था। यह भी उनका अप्रत्याशित स्ट्रोक था। वहां से उनका सफाई पर लगातार फोकस रहा और 2 अक्टूबर को जब उन्होंने वाल्मीकि बस्ती से क्लीन इंडिया कैंपेन लॉन्च की तो बापू स्वतरू उनसे कनेक्ट हो गए।

मोदी का फंडा यह है कि कोई भी कदम उठाओ, आवाज जहां तक हो सके, गूंजनी चाहिए। इस कैंपेन को भी ‘हाई पिच‘ पर लॉन्च किया गया। इसका असर भी देखने को मिला और पूरे देश में साफ सफाई के प्रति जागरूकता देखी गई। संदेश ऊपर से नीचे की तरफ ही प्रभावी ढंग से जाता है, ये बात मोदी अच्छी तरह जानते हैं। अब तक 2 अक्टूबर के दिन राजघाट पर बापू को रस्मी श्रद्धांजलि और भजन कार्यक्रमों तक ही सीमित कर दिया गया था। सवाल यही है कि जिस देश में सफाई के मोर्चे पर गांधी फेल हो गए, मोदी उसमें कितने सफल हो पाते हैं।

अभी से टारगेट में है 2019
मोदी ने एक बार कहा था कि 2024 तक उन्हें कोई राजनीतिक खतरा नहीं है। ये उनकी दूरदर्शी सोच ही कही जाएगी। 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती होगी और उसी साल आम चुनाव भी होंगे। अभी से ऐसा लगने लगा है मानो बापू को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए ही मोदी का आविर्भाव हुआ हो। उन्होंने इस मौके को भुनाने की पहल कर दी है। वह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि साल भर पहले से देश में जश्न शुरू हो जाएंगे। स्वच्छता अभियान भी इससे जुड़ेगा। इसके लिए कमिटियां भी गठित कर दी गई है। मोदी के मन की थाह नहीं ली जा सकती लेकिन ये भी है कि कौन जाने इसी मार्फत गांधी की लार्जर दैन लाइफ इमेज पूरे विश्व में स्थापित हो जाए।

मोदी का गांधी मूवमेंट

27 मई: गांधी से शुरू
प्रधानमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद नरेन्द्र मोदी 27 मई को जब साउथ ब्लॉक स्थित ऑफिस पहुंचे तो सबसे पहले महात्मा गांधी की तस्वीर को ही प्रणाम किया। नरेन्द्र मोदी ने इसे ट्वीट भी किया।

17 सितंबर: साबरमती आश्रम में
चीन के प्रेजिडेंट शी चिनफिंग को लेकर जब मोदी अहमदाबाद स्थित बापू के साबरमती आश्रम ले गए तो फिर राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। ऐसा पहले शायद ही हुआ हो। वहां दोनों के माध्यम से इतिहास तरोताजा हो गया। चरखा , गीता , आश्रम आदि लोगों के जेहन में फिर छा गए।

28 सितंबर: मैडिसन स्क्वेयर
मोदी ने न्यू यॉर्क के मैडिसन स्कवेयर पर जुटे हजारों भारतीयों के बीच गांधी को स्थापित कर दिया। वह ज्यादातर सिर्फ गांधी और उनकी विरासत पर ही चर्चा करते रहे। इसे अमेरिकी मीडिया ने भी सराहा। अमेरिकी विदेश मंत्री जान केरी ने तो उन्हें नया गांधी तक कह डाला।

चुनाव प्रचार में भी फोकस
हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार में मंच से मोदी ने जब ये कहा कि कांग्रेस को सिर्फ गांधी छाप नोटों से मतलब है , गांधी से नहीं , तो उन्होंने लोगों के सेंटिमेंट्स पर हिट किया। यानी मोदी की खूबी मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की रहती है। इतिहास पुरुषों और राष्ट्रीय नेताओं को लेकर कांग्रेस पर उनका कटाक्ष लोगों में मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ ऊंचा कर देती है।

संघ भी गांधी के साथ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की मैग्जीन ‘ द ऑर्गनाइजर ‘ के ताजा अंक के कवर पर भी महात्मा गांधी छाए हैं। कवर पर गांधी को एक झाड़ू और टोकरी लिए हुए दिखाया गया है और इसके साथ लिखा गया है ,‘मिशन इंपॉसिबल ‘। इसमें स्वच्छ भारत अभियान , सफाई पर बापू के फोकस और धर्म परिवर्तन पर बापू के विचारों का जिक्र है। संघ की मैग्जीन का बापू पर फोकस कहीं न कहीं मोदी इफेक्ट के कारण भी है।

और भी हैं विरासतें
मोदी के पटेल
आम चुनाव से पहले नरेन्द्र मोदी देश के पहले होम मिनिस्टर और लौह पुरुष के रूप में विख्यात सरदार पटेल को कांग्रेस से हाईजैक कर चुके हैं। वह पटेल की गुजरात में विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति बनाने की घोषणा भी कर चुके हैं।

राधाकृष्णन के नाम पर
इस साल शिक्षक दिवस पर नरेन्द्र मोदी ने लीक से हटकर बड़ा आयोजन करते हुए देशभर के स्कूलों के स्टूडेंट्स से बात की।

अब नेहरू की बारी है ?
सोमवार को हरियाणा में रैली में मोदी ने चैंकाते हुए पंडित नेहरू की 125 वीं जयंती को जोरदार अंदाज में मनाने की घोषणा कर सबको चैंका दिया। साथ ही उसे इंदिरा गांधी से जोड़ दिया। उन्होंने घोषणा की कि यह आयोजन 14 से 19 नवंबर के बीच में होगा। इस दौरान भी फोकस सफाई पर ही होगा। मोदी ने नेहरू को चाचा नेहरू बताते हुए उनके बाल प्रेम का भी जिक्र किया।


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