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खूनी दास्तान : जिसके इशारो पर हुए करोड़ों क़त्ल


क्या आपको पता है हिटलर पुजारी बनना चाहता था, क्या आप जानते है हिटलर एक पेंटर था, क्या आप जानते है हिटलर एक लड़की से बेइंतहा प्यार करता था, क्या आप इस बात पर यकीं करेंगे की हिटलर की भी एक पुजारिन थी, हम यकीन से तो नहीं कह सकते की हिटलर से जुडी कितनी बातो की आपको जानकारी है, लेकिन एक बात हम यकीन से कह सकते है की हिटलर की नफरत और यहूदियों का कत्लेआम दुसरे विश्वयुद्ध की सनक के बारे में आपको जरूर पता होगा. जानिए हिटलर की खुनी दास्तान की कुछ अनकही बातें और तस्वीरें जिसे देखकर आप जान जायेंगे की कैसे हिटलर ने पूरी दुनिया को नर्क में धकेल दिया था. 

खौफ और दरिंदगी का दूसरा नाम हिटलर 

हिटलर एक ऐसा तानाशाह जिसने 12 साल की हुकूमत में पूरी दुनिया को जर्मनी के पीछे चलने का सपना देखा था, हिटलर जिसने जर्मनी की जनता को यहूदियों से नफरत और जंग से दुनिया हासिल करने का भरोसा दिलाया, हिटलर जिसने अपने बेहद आक्रामक अंदाज से इतिहास के पन्नो में स्याही की जगह खून से इबारत लिख डाली. 20 अप्रैल 1889 को हिटलर का जन्म ऑस्ट्रिया में हुआ था, हिटलर जिसका मतलब है जिद्दी, कठोर, निडर, और सख्त. अपनी माँ क्लारा और पीता अलाइस के 6 बच्चो में हिटलर चौथी संतान था, हिटलर के बारे में कहा जाता है कि हिटलर बचपन में मासूम सा दिखता था, पढ़ाई में कमजोर हिटलर 8 साल की उम्र में ही पादरी बनने के सपने देखने लगा था, लेकिन पिता की जिद थी कि हिटलर तकनिकी शिक्षा हासिल करे. पिता की सोच और सपने के खिलाफ हिटलर ने जैसे ही कदम उठाने कि कोशिश की उस पर पिता कहर बनकर टूट पड़े, जबरदस्त पिटाई ने हिटलर को जिद्दी बना दिया, हिटलर लगातार मार खाने से खूंखार हुए जा रहा था, हिटलर जब सिर्फ 17 साल का था तो उसके पिता की 3 जनवरी 1903 को मौत हो गई. 

जब टीचर ने हिटलर को दफा हो जाओ कहा

पिता की मौत के बाद हिटलर पूरी तरह बेकाबू हो गया स्कूल में हिटलर की खतरनाक हरकतों की वजह से उसे निकाल दिया गया, लेकिन पेंटिंग से हिटलर के लगाव ने उसके लिए कॅरियर का दरवाजा खोल रखा था, और साल 1907 में अकादमी ऑफ़ फाइन आर्ट्स में एडमिशन लेने के लिए, वो विएना पहुंच गया लेकिन यहाँ हिटलर की किस्मत ने धोखा दे दिया, हिटलर को यहूदी टीचर ने बोला तुम्हे अकादमी ऑफ़ फाइन आर्ट्स में एडमिशन नहीं मिल सकता है, क्योंकि तुम्हारी पेंटिंग में सिर्फ पहाड़ो और नदी नालो की तस्वीरें है. तुम इंसानो की तस्वीरें नहीं बना सकते इसलिए यहाँ से दफा हो जाओ. हिटलर को इस अपमान ने अंदर तक हिलाकर रख दिया, और यही से उसके अंदर यहूदियों के खिलाफ नफरत का बीज पड़ गया. 

हिटलर की माँ को डॉक्टर ने जहर दे दिया था 

इसी बीच 21 दिसम्बर 1960 को हिटलर की 47 वर्षीय माँ क्लारा की कैंसर से मौत हो गई. अपनी माँ को बेइंतहा प्यार करने वाला हिटलर माँ की मौत से पूरी तरह टूट गया. हिटलर इस बात से बेहत ही गुस्से में था कि जो डॉक्टर उसकी माँ का इलाज कर रहा था वो एक यहूदी था. एक किताब में दावा किया गया है कि हिटलर मान बैठा था कि यहूदी डॉक्टर एडवर्ड ब्लोच ने उसकी माँ को जहर दे दिया है और वही उसकी माँ का कातिल है, यहूदियों से नफरत की एक बहुत बड़ी वजह इस बात को भी माना जाता है, 

हिटलर की किस्मत का टर्निंग पॉइंट

अगस्त 1914 को बवेरिया के राजा की वजह से हिटलर बवेरिया रेजिमेंट में भर्ती हो गया बस यही से हिटलर की किस्मत बदल गई. प्रथम विश्व युद्ध के धमाकों के बीच हिटलर ने जमकर मोर्चा संभाला हिटलर अपनी जिदंगी में पहली बार जंग के मैदान में खुश था, बारूद और खून की महक ने हिटलर के अंदर फौलाद को जन्म दे दिया था, हिटलर जंग के मैदान से 50 बार जिन्दा वापस लौटकर आया था जो प्रथम विश्व युद्ध में किसी चमत्कार से कम नहीं था. सन 1918 को हिटलर को मैडल से सम्मानित किया गया, लेकिन जंग में इतनी दिलेरी दिखाने के बाद भी उसे सेना में अधिकारी नहीं बनाया गया. क्योंकि यहूदी सेना अधिकारियों को लगता था कि उसके अंदर अफसर बनने की काबिलियत नहीं है. 

धाकड़ भाषणों ने हिटलर को बनाया पार्टी मुखिया

जर्मनी प्रथम विश्व युद्ध में हार चूका था, हिटलर इस हार से तड़प उठा, हिटलर ने इस हार को यहूदियों की चाल बताया. हिटलर के अंदर बदला लेने कि आग दहक उठी थी, 1919 तक हिटलर ने फौज छोड़कर नाजी पार्टी ज्वाइन कर ली 29 जुलाई 1921 तक हिटलर के धाकड़ भाषणों ने उसे नाजी पार्टी का मुखिया बना दिया, लेकिन अब तक के संघर्षो से हिटलर बेचैन हो उठा था. मंजिल तक पहुंचने की रफ़्तार काफी धीमी थी. 30 जनवरी 1933 को हिटलर जर्मनी का चांसलर बन गया. हिटलर की नाजी पार्टी अब इतनी ताकतवर हो गई थी कि उसने विरोधियों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया, हिटलर के खिलाफ उठी हर आवाज़ को कुचल दिया गया. 2 अगस्त 1934 को राष्ट्रपति पोल हिंडेनबर्ग की मौत के बाद हिटलर को जर्मनी कि सत्ता हासिल हो गई. 

 पूरी दुनिया ने जो कभी सोचा नहीं वो कर दिया

हिटलर अब वो करने जा रहा था जिसके बारे में दुनिया ने कभी सोचा भी नहीं था. हिटलर ने सबसे पहले यह तय कर लिया था कि वो पोलेंड को जर्मनी का हिस्सा बनाकर रहेगा. हिटलर जंग की तैयारी में लग गया. हिटलर के इटली तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी की नजदीकी ने हिटलर के मिशन में आग में घी डालने का काम किया. नाजीवाद और फ़ासीवाद के इस पॉवर ने पुरे यूरोप को चूनौती दे दी. दुनिया इससे पहले हिटलर के इरादों को पूरी तरह से समझ पाती हिटलर ने 1 सितम्बर 1939 को पोलेंड पर सुबह 5 बजकर 35 मिनट पर हमला कर दिया. यह दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो चुकी थी, हिटलर की सेना ने पोलेंड पर इतने जबरदस्त हमले किये कि महज 18 दिन की लड़ाई में पोलेंड बर्बाद हो गया. हिटलर यही नहीं रुका उसने पोलेंड से यहूदियों का सफाया करना शुरू कर दिया. 

खून की होली खेलने में माहिर हिटलर की SS फौज

हिटलर की SS फौज ने पोलेंड में कत्लेआम करना शुरू कर दिया. यहूदियों को चुन-चुनकर मारा जाने लगा. एक भी यहूदियों पर ना कोई रहम ना कोई जज्बात सिर्फ खून की होली खेलने में माहिर SS फौज ने गांव के गांव बर्बाद कर दिए. छोटे छोटे मासूम बच्चो को भी नहीं बख्शा गया. फौजी ट्रको में यहूदियों को ठूस-ठूस कर भरा गया और मारने से पहले उनसे उनकी ही कब्र खुदवाई गई. हिटलर का सख्त आदेश था कि एक भी यहूदी छूटना नहीं चाहिए, हिटलर कि SS फौजो का चीफ हेनरिक हिमलर यहूदियों का क़त्ल करने में माहिर था, आपको जानकर आश्चर्य होगा और ऐसा माना जाता है कि हिमलर ने 60 लाख यहूदियों का क़त्ल कर दिया था, जिसमे 15 लाख तो बच्चे ही थे. इस पुरे ऑपरेशन को फाइनल सॉलूशन नाम दिया गया जो बाद में हॉलोकॉस्ट के नाम से जाना गया. हिटलर के इस खून खराबे ने यहूदियों कि एक तिहाई का सफाया कर दिया था. 

अपनी जिद के लिए बच्चो को बनाया कातिल

एक बहुत ही बड़ी बात वो यह है कि पोलेंड पर हमला करने से पहले कई साल पहले एक ऐसा स्कूल खोला था जहा मासूम जर्मन बच्चो को माहिर कातिल बनाया गया. एक-एक बच्चे का ब्रेनवाश किया जाता और उन्हें कतारों में पढ़ाया जाता था और कहा जाता था कि यहूदी शैतान का रूप है जिन्हे मारना बहुत ही जरुरी है. इन बच्चो को यह भी सिखाया जाता था कि तुम कैसे पहचानोगे कि कौन यहूदी है और कौन जर्मन इसके लिए बच्चो को चेहरे और आँखों के नमूने दिखाए जाते. ताकि यहूदी की हत्या के वक़्त उनसे कोई गलती ना हो. इन्हे खतरनाक फौजी बनाने के लिए ऊँची-ऊँची पहाड़ियों से कूदा दिया जाता था, पूरी ट्रैनिग में उन्हें एक ऐसा योद्धा बना दिया जाता था जिसके दिमाग में सिर्फ और सिर्फ हिटलर के लिए वफादारी होती है. हिटलर ने अपने मसूंबो को पूरा करने के लिए जिस तरह जर्मन का इस्तेमाल किया था, वैसा इस्तेमाल पहले किसी तानाशाह ने नहीं किया था. 

एक खूबसूरत हसीना इवा ब्राउन
 
दुनिया के इस क्रूर तानाशाह के जीवन के कुछ दिलचस्प पहलू भी है. कहा जाता है कि “मोहब्बत और जंग में सब कुछ जायज होता है” हिटलर का जो जूनून है और जिंदगी थी वो इस कहावत से काफी मेल खाती थी. जंग उसका जूनून था और मोहब्बत उसकी मंजिल. हिटलर की कातिलाना सोच और उसके रुतबे को देखकर क्या कोई लड़की उससे प्यार करने की हिम्मत भी कर सकती थी, इसका जवाब है हाँ….एक ऐसी खूबसूरत हसीना जो महज 17 साल की उम्र में 23 साल बड़े हिटलर से प्यार कर बैठी, जर्मनी के म्युनिक में 6 फ़रवरी 1912 को पैदा हुई इवा ब्राउन दिखने में बहुत ही खूबसूरत थी, हिटलर ने कभी भी खुलेआम इवा ब्राउन के प्यार का जवाब नहीं दिया, लेकिन हिटलर इस हसीना को काफी चाहने लगा था. सिर्फ 2 साल की मुलाकात में इवा ब्राउन हिटलर से शादी करने की जिद करने लगी, लेकिन हिटलर ऐसे अहम् मौको पर कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता था जिससे उसके मिशन को नुकसान पहुंचे. हिटलर की रहस्य्मय जिंदगी को समझना इवा के बास की बात नहीं थी. 

इवा ब्राउन ने 2 बार आत्महत्या की फिर भी बच गई

कुछ लोगो का मानना है कि हिटलर ने कई मौको पर कह दिया था कि उसकी शादी तो जर्मनी से हो चुकी है. वो किसी से भी शादी नहीं करेगा लेकिन इवा ब्राउन भी अपनी जिद की पक्की थी उसने सोच लिया था कि वो हर हाल में हिटलर से शादी करके ही रहेगी. 1 नवंबर 1932 को 20 साल की इवा ब्राउन ने आत्महत्या करने कि कोशिश की उसने अपने पिता की पिस्तौल से खुद को गोली मार ली लेकिन इवा ब्राउन बच गई. हिटलर इवा के इस कदम से सकते में आ गया लेकिन हिटलर ने इसके बावजूद इवा ब्राउन की जिद के सामने अपने हथियार नहीं डाले. हिटलर की बेरुखी देखकर इवा ने दोबारा आत्महत्या करने की कोशिश की और 18 मई 1935 को इवा ने नींद की गोली की ओवरडोज ले ली. लेकिन वो फिर बच गई. हिटलर पर इस बार गहरा असर पड़ा और वो इवा की बेपनाह प्यार का कायल हो गया. उसने इवा को भरोसा दिलाया की वो उससे शादी जरूर करेगा. लेकिन कब और कहा इसके बारे में हिटलर ने कुछ नहीं बताया. 

हिटलर की जिंदगी से जुडी 2 और औरतों का रहस्य

हिटलर की जिंदगी से सिर्फ इवा ब्राउन जुडी थी सिर्फ ऐसा नहीं था. जूलिया-कोटेरिअस और सावित्री देवी मुखर्जी हिटलर कि एक ऐसी पुजारन जिसका रहस्य आज भी बरकरार है. फ्रांस के लॉयन में 30 सितंबर 1905 को पैदा हुई सावित्री एक टीचर, लेखक और माहिर राजनेता थी. सावित्री ने एक भारतीय असित कृष्ण मुखर्जी से शादी कर ली थी. सावित्री का दावा था कि हिटलर भगवान विष्णु का अवतार कल्कि है. जो दुनिया का भला करने के लिए पैदा हुआ है. सावित्री हिटलर को अपना गुरु मानती थी, लेकिन साल 1945 में नाजियों की तबाही से सावित्री देवी बिखर गई और वो गुमनामी कि जिंदगी जीने लगी. 22 अक्टुंबर 1982 को 77 साल की उम्र में सावित्री देवी की इन्फेक्शन से मौत हो गई. और उसका हिटलर को भगवान बनाने का सपना अधूरा रह गया. हिटलर से जुडी इन दोनों महिलाओ का उसकी जिंदगी में कितना असर पड़ा ये आज भी रहस्य बना हुआ है. 

हिटलर का आखरी वक़्त   

सबसे बड़ी बात यह है कि हिटलर की जुबान में वो ताकत थी कि जोश भर देती थी लेकिन हिटलर में जिद भी कूट-कूटकर भरी थी. हिटलर के खूंखार इरादों के खिलाफ दुनिया उसको जान चुकी थी और इसी के साथ हिटलर का वक़्त भी आखिर आ चूका था शुरू-शुरू में हिटलर ने खूब जीत का स्वाद चखा लेकिन हार का सामना भी करना पड़ा, जब हिटलर को महसूस हुआ कि जर्मनी की हार निश्चित है तो उसने 30 अप्रैल 1945 में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. कहा तो ये भी जाता है कि मरने से पहले हिटलर ने इवा ब्राउन से शादी कर ली थी. लेकिन इवा ब्राउन ने भी जहर खरकर आत्महत्या कर ली थी. 

वैसे हिटलर का जमाना तो चला गया लेकिन हिटलर के साम्राज्य का डर आज भी लोगो के जेहन में जिन्दा है. हमारा मानना है कि इतिहास को ना तो बदला जा सकता है और ना ही इतिहास से मुँह मोड़ा जा सकता है, जरूरत इस बात की है कि अच्छे इतिहास को याद करके खुश हुआ जाए और खुनी इतिहास को जानकर उससे सबक लिया जाए. आज दुनिया भर के देशो में हथियार की होड़ को खत्म करना होगा ताकि आने वाले समय में दुनिया को किसी और दूसरे हिटलर का सामना कभी भी ना करना पड़े.   


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