Home >> Breaking News >> कैंसल ब्लॉक्स से कंपनियां निकाल सकती हैं कोयला: सुप्रीम कोर्ट

कैंसल ब्लॉक्स से कंपनियां निकाल सकती हैं कोयला: सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली ,(एजेंसी) 17 अक्टूबर । सुप्रीम कोर्ट ने जिन कंपनियों को कोल ब्लॉक्स 6 महीने के अंदर बंद करने के लिए कहा है, उसने इस दौरान उनके कोयला निकालने और उसे बेचने पर रोक लगाने से मना कर दिया है। चीफ जस्टिस एच एल दत्तू की अगुवाई वाली बेंच ने गुरुवार को कहा कि कोर्ट ने कंपनियों को कामकाज बंद करने के लिए जो समय दिया है, उस दौरान कोयला निकालने से वह उन्हें नहीं रोक सकता।

SUPREAM COURT OF INDIA

बेंच ने कहा, ‘उनके पास लाइसेंस था, जिसे एक दिन में कैंसल कर दिया गया। इस बीच उन्हें कोयला निकालने की इजाजत दी गई। कोर्ट ने उनसे 6 महीने में कामकाज बंद करने के लिए कहा है। इस बीच कंपनियां कोयला निकाल सकती हैं।श् सुप्रीम कोर्ट ने वकील मनोहर लाल शर्मा की याचिका खारिज करते हुए कहा, श्क्या कोर्ट को अब यह कहना चाहिए कि कंपनियां 200 टन कोयला ही निकालें?‘ शर्मा ने याचिका में मांग की थी कि कंपनियों को रद्द कोल ब्लॉक्स से कोयला निकालने से रोका जाए।

इससे पहले शर्मा की याचिका पर अदालत ने 218 में से 214 कोल ब्लॉक्स कैंसल कर दिए थे। उसने सिर्फ सरकारी कंपनियों एनटीपीसी और सेल का एक-एक ब्लॉक रहने दिया। अदालत ने रिलायंस पावर को अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट्स के लिए दिए गए दो कोल ब्लॉक्स भी कैंसल नहीं किए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकार उन 42 कोल ब्लॉक्स का कब्जा अपने हाथ में ले सकती है, जिनमें कामकाज शुरू हो चुका है। इसके साथ ही अदालत ने कामकाज बंद करने के लिए कंपनियों को 6 महीने की मोहलत दी थी। अदालत ने लाइसेंस की अवधि के दौरान निकाले गए कोयले पर 295 रुपये प्रति टन की पेनाल्टी भी लगाई है। पेनाल्टी चुकाने के लिए भी कंपनियों को 6 महीने का वक्त दिया गया है।

गुरुवार को शर्मा ने आरोप लगाया कि जिन कंपनियों के ब्लॉक्स कैंसल हुए हैं, वे कोयला निकालकर उसे बाजार में बेच रही हैं। शर्मा ने याचिका में कहा था कि कंपनियों पर लगाई गई पेनाल्टी और कोयले के मार्केट रेट में बहुत बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा था कि कोयले का मार्केट रेट 3,000-6,000 रुपये प्रति टन है। शर्मा के मुताबिक, कंपनियां कैंसल्ड ब्लॉक्स से तेजी से कोयला निकाल रही हैं और उसे बाजार में बेच रही हैं। वे 6 महीने की मियाद पूरी होने से पहले इस तरह से पूरा फायदा उठाना चाहती हैं।

शर्मा ने आरोप लगाया था कि इन ब्लॉक्स से रोज 1,000 से ज्यादा ओवरलोडेड ट्रक दिन-रात कोयला ढो रहे हैं। सरकार यह दर्ज नहीं कर रही है कि कितना कोयला निकाला जा रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की मिसाल देते हुए दावा किया था कि वहां कोई चेकपोस्ट नहीं है। इसलिए कितना कोयला निकाला जा रहा है, इसका रिकॉर्ड नहीं रखा जा सकता। शर्मा के मुताबिक, इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो सकता है।


Check Also

तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने कोरोना वैक्सीन लगवाई

तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा मैक्लोडगंज स्थित अपने निवास से करीब सवा साल बाद बाहर आए। शनिवार …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *