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योगी सरकार ने की गैर जरुरी सरकारी छुट्टियों की ‘छुट्टी’


छुट्टियों का आनंद कौन नहीं लेना चाहता. लेकिन यूपी राज्य के सरकारी कर्मचारी इस मामले में ज्यादा खुश किस्मत थे, क्योंकि उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां सबसे अधिक सरकारी छुट्टियां घोषित हैं, और हो भी क्यों नहीं, यहां जातीय और धार्मिक राजनीतिक समीकरण को साधने के लिए महापुरुषों के नाम पर सरकारी छुट्टियों की घोषणाएं रेवड़ियों के बांटे जाने की तरह की गई. लेकिन अब यह छुट्टियों का सुख छीनने वाला है, क्योंकि नए सीएम आदित्यनाथ योगी ने 15 छुट्टियों को खत्म करने का फैसला किया है.

गौरतलब है कि अंबेडकर जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि महापुरुषों के जन्मदिन की छुट्टी के बजाय उस दिन महापुरुषों की जिंदगी के बारे में बच्चों को बताया जाना चाहिए, जिससे वे उनकी जिंदगी से प्रेरणा हासिल ले सकें. अपनी इच्छा को साकार रूप देते हुए योगी आदित्यनाथ अपनी चौथी कैबिनेट बैठक में महापुरुषों के जन्मदिन और पुण्यतिथि पर होने वाली सभी छुट्टियों को खत्म कर दिया. हालांकि जिन महापुरुषों की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश होता है वो छुट्टियां चलती रहेंगी.

आश्चर्यजनक बात है कि यूपी में जो अतिरिक्त छुट्टियां दी गई वे केवल वर्ग विशेष को संतुष्ट करने के लिए दी गई थी. मिसाल के तौर पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के जन्मदिन की छुट्टी बिहार में नहीं है,लेकिन यूपी में होती है. इसका स्पष्ट उद्देश्य उनकी जाति के लोगों को खुश करना होता है. कर्पूरी ठाकुर की छुट्टी नाई समाज को, अंबेडकर परिनिर्वाण की छुट्टी दलितों को, परशुराम जयंती की छुट्टी ब्राह्मणों को, चंद्रशेखर जयंती की छुट्टी राजपूतों को, ख्वाजा गरीब नवाज के जन्मदिवस की छुट्टी सुन्नियों को हजरत अली के जन्मदिन की छुट्टी शियाओं को, निषादराज के जन्मदिन की छुट्टी पिछड़ों को, इसी तरह छठ की छुट्टी पूर्वी यूपी वालों को खुश करने को की गई थी. अब यह सब छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. निश्चित ही योगी आदित्यनाथ का यह निर्णय दूरगामी लाभ को देखते हुए उचित कहा जा सकता है.


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