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ऐसे सुधरा निवेश का माहौल, 3 साल में मोदी सरकार के 5 गेमचेंजर फैसले


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 मई 2014 को जब शपथ ली तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सेंस्टिव इंडेक्स सेंसेक्स 15 महीनों के निचले स्तर 25,000 के नीचे बंद हुआ. लेकिन इसके बाद भारतीय शेयर बाजार के इस इंडेक्स को पर लग गए. पहली बार जब मार्च 2015 में सेंसेक्स ने 30,000 का आंकड़ा पार हुआ तो उसे मोदी सरकार की तब तक घोषित की जा चुकी नीतियों का समर्थन माना गया. अब एक बार फिर संसेक्स 30,000 के जादुई आंकड़े को छू चुका है. माना जा रहा है कि यह मोदी सरकार के अबतक के कार्यकाल की नीतियों पर देशी-विदेशी निवेशकों द्वारा मिल रहे समर्थन का नतीजा है.

ये हैं तीन साल में मोदी के 5 गेमचेंजर
1. राजनीतिक स्थिरता: 2014 में आम चुनावों में जीत के बाद से देश की प्रमुख पार्टी बीजेपी ने लगातार एक के बाद एक चुनाव जीत कर साफ संकेत दिया है कि देश में राजनीतिक स्थिरता का दौर शुरू हो चुका है. ऐसे में विदेशी निवेशकों समेत भारतीय निवेशकों को बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश करने का साहस मिल रहा है.

2. डिजिटल होता भारत: केन्द्र सरकार द्वारा बीते तीन साल से डिजिटल इंडिया की दिशा में बढ़ाए जा रहे कदम से देश के ज्यादातर सरकारी मंत्रालय पूरी तरह से डिजिटल हो चुके हैं. केन्द्र और राज्य सरकार के कई डिपार्टमेंट डिजिटल प्रक्रिया को पूरा करते हुए पूरी तरह से पारदर्शी कार्यपद्दति की
और बढ़ चुके हैं.

3. नोटबंदी से बैंक मालामाल: 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के फैसले के बाद देश के सभी बैंकों के खजाने पूरी तरह से भरा है. वहीं रिजर्व बैंक लगातार बैंकों से उम्मीद कर रहा है कि वह अपने ब्याज दरों में अहम कटौती कर देश में कारोबारी तेजी की शुरुआत करने में अपना योगदान करे.

4. आर्थिक सुधार: केन्द्र सरकार ने देश में एक टैक्स व्यवस्था लागू करने की दिशा में अहम कदम बढ़ा लिया है. सरकार की तैयारी 1 जुलाई से देश में जीएसटी लागू करने की है जिसके बाद जानकारों के मुताबिक अर्थव्यवस्था में तेजी आने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय संस्थाओं का मानना है कि जीएसटी लागू होने के बाद भारत की जीडीपी में दो फीसदी की बढ़त दर्ज हो सकती है. वहीं तीन साल के दौरान केन्द्र सरकार ने कालेधन पर लगाम लगाने के साथ-साथ देश को स्वतंत्र कारोबार करने की दिशा में आगे बढ़ाया है जिसके चलते बाजार जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार की नीतियों पर सवार शेयर बाजार नई उंचाइयों के लिए तैयार हो रहा है.

5. रघुराम राजन की जिद: केन्द्र में मोदी सरकार बनने के पहले से ही देश की मौद्रिक नीति पर आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का अहम प्रभाव रहा. राजन ने वैस्विक सुस्ती के बीच और यूरोप में ब्रक्जिट से संभावित उथल-पुथल के चलते ब्याज दरों पर अपनी पकड़ मजबूत रखी. इसके चलते आज मोदी सरकार के पास सबसे अहम आंकड़ा यह है कि देश में महंगाई पर सरकार की पूरी तरह से पकड़ बरकरार है. गौरतलब है कि मार्च 2017 में देश की खुदरा महंगाई दर 3.8 फीसदी रही जो कि मार्च 2015 के स्तर से 1.5 फीसदी कम है. वहीं 2016 में अच्छे मानसून ने केन्द्र सरकार के लिए आंकड़ों को संभालने का काम किया.


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