Thursday , 23 September 2021
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कमाल की कमांडो ट्रेनिंग ने 41 की उम्र में दिलाई सेना की नौकरी


फिलाडेल्फिया निवासी एंटोनी जोसेफ ड्रेक्सल बिडल की गिनती उन धनवानों में होती थी, जिनके पास बेशुमार दौलत थी। इसी कारण वे अपना ज्यादातर समय नाटकों के मंचन, खुद की रचनाओं के प्रकाशन, धार्मिक गतिविधियों और खेलकूद को दे पाते थे। एंटोनी एक अच्छे एथलीट और शौकिया मुक्केबाज भी थे। लेकिन एंटोनी को असल शोहरत उनकी अमेरिकी मरीन कमांडो को ट्रेनिंग के कारण मिली।

वे कमांडो को यह ट्रेनिंग देते थे कि खाली हाथ कैसे दुश्मन पर हमला बोलें। वे कमांडो के ग्रुप को खुद पर बंदूक और उस पर लगे धारदार चाकू से हमला करने को कहते और थोड़ी ही देर में वे ना केवल बच निकलते, बल्कि हमलावर कमांडो को निहत्था भी कर देते।

उनकी इस स्टाइल के सभी कायल थे, लेकिन उनकी शैली को व्यावहारिक नहीं माना गया। अपनी इसी बाजीगरी के कारण एंटोनी को 1917 में 41 साल की उम्र में मरीन्स में नौकरी मिली, क्योंकि वे अपने वरिष्ठों को यह समझाने में कामयाब हो गए थे कि बॉक्सिंग को लड़ाई का एक जरिया बनाया जा सकता है। 1919 में वे मेजर और 1934 को लेफ्टिनेंट बने। उन्होंने तकरीबन 4 हजार कमांडोज को ट्रेनिंग दी।

 


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