Tuesday , 21 September 2021
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निर्भया केस: सुप्रीम कोर्ट ने घटना को ‘सुनामी ऑफ शॉक’ कहा


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप केस में फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के चारों गुनहगारों की फांसी की सजा बरकरार रखी है. सुप्रीम कोर्ट निर्भया गैंगरेप को ‘सुनामी ऑफ शॉक’ करार दिया. कोर्ट ने पुलिस के सभी सबूतों को माना और कहा कि घटना को सुनते हुए लगता है कि ये किसी दूसरे ग्रह की घटना है. सुप्रीम कोर्ट से पहले निचली अदालत और हाई कोर्ट ने दोषियों को फांसी की सज़ा दी थी

  • समाज में मैसेज देने के लिए किसी को फांसी नहीं दे सकते, ह्यूमन राइट्स की धज्जियां उड़ गयीं- एपी सिंह, दोषियों के वकील
  • दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा- न्याय नहीं हुआ, हम रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे
  • निर्भया फैसले पर आप ने कुमार विश्वास ने ट्वीट किया- ”बहन #Nirbhaya हम शर्मिंदा हैं कि हम सबके रहते ऐसा हुआ. ईश्वर तुम्हारी आत्मा को संतोष दे कि निर्मम गुनाहगारों को आख़िर उचित सज़ा मिली”
  • निर्भया की मां ने कहा- मैं कोर्ट और सभी साथ देने वालों को ध्नयवाद देती हूं. मैं सिर्फ यह कह सकतीं हूं कि देर है लेकिन अंधेर नहीं है. इस तरह के अपराध अब ना हों. इस तरह के अपराधों के खिलाफ हम लड़ते रहेंगे. आज सिर्फ मेरी बेटी को ही नहीं बल्कि देख की सभी बेटियों को न्याय मिला है.
  • निर्भया के पिता ने एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए कहा- निर्भया को न्याय पूरे समाज को न्याय है, हमें सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद थी. आज के फैसले के बाद हम खुश हैं, जनता और मीडिया का धन्यवाद करते हैं.
  • केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा- मुझे लगता है कि इस मामले में फैसला और जल्दी आना चाहिए था. लेकिन जो भी फैसला आया है वो स्वागत योग्य है.
  • फैसले के बाद समाजसेवी रंजना कुमारी ने कहा- आज लग रहा है कि निर्भया के लिए हमारा संघर्ष सफल रहा, ये एक ऐतिहासिक फैसला है. मैं फैसले से बहुत खुश हूं.
  • निर्भया केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कोर्ट में तालियां बजीं
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कठोर सजा नहीं सुनायी जाएगी तो समाज में संदेश कैसे जाएगा.
  • जस्टिस दीपक मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा- मैं और जस्टिस अशोक भूषण एक फैसले पर पहुंचे, जस्टिस भानुमति का फैसला अलग है. आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट में बहुमत के फैसले को माना जाता है.
  • जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- ये गुनाह इतना बर्बरता पूर्ण है कि इसमें फांसी की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती है.
  • तीन जजों की बैंच ने 2 बजकर 3 मिनट पर फैसला सुनाना शुरु किया.
  • निर्भया के माता-पिता ने कोर्ट रूम में फैसले को सुना और फैसले के बाद उनके चेहरे संतोष के भाव दिखायी दिए.
  • सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप केस में फैसला सुनाया, दोषियों की फांसी की सजा बरकरार
  • सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुनाने की प्रक्रिया शुरू
  • सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए बैठे जज, जल्द ही आ सकता है फैसला
  • निर्भया के माता पिता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, माता पिता की मांग फांसी की सजा बरकरार रहे.

16 दिसंबर 2012 को हुआ क्या था?

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16 दिसंबर 2012 को 23 साल की फिजियोथेरेपी छात्रा निर्भया अपने एक दोस्त के साथ फिल्म लाइफ ऑफ़ पाई देखने गई. रात साढ़े 9 बजे वो दिल्ली के मुनिरका में एक चार्टर बस में सवार हुई. बस में सवार ड्राइवर समेत 6 लोग दरअसल मौज-मस्ती के इरादे से निकले थे. उन्होंने चलती बस में निर्भया का गैंगरेप किया और उसके दोस्त की जमकर पिटाई की.

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गैंगरेप के दौरान निर्भया के साथ जानवरों से भी बदतर बर्ताव किया. उसके गुप्तांग में लोहे का सरिया तक डाला गया. जिससे उसकी आंत बाहर निकल आई थी. अस्पताल में दो हफ्ते इलाज के बाद भी  निर्भया को बचाया नहीं जा सका. और आखिरकार 29 दिसंबर 2012 को उसकी मौत हो गयी थी.

इससे पहले कोर्ट कार्यवाही में क्या हुआ?
इस मामले में निचली अदालत ने 10 सितंबर 2013 को फैसला सुनाया था. उसने 4 दोषियों मुकेश, विनय, पवन और अक्षय फांसी की सजा दी थी. इन चारों को बलात्कार, अप्राकृतिक यौनाचार, डकैती और हत्या का दोषी माना गया. 13 मार्च 2014 को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस सज़ा को बरकरार रखा था. इस मामले में कुल 6 आरोपी थे. एक आरोपी राम सिंह की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी. जबकि एक आरोपी नाबालिग था. इसलिए, उसे बाल सुधार गृह भेजा गया. वो 3 साल सुधार गृह में बिताकर रिहा हो चुका है.

 

 

 


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