Tuesday , 21 September 2021
Home >> My View >> एनपीए वसूलने का इरादा

एनपीए वसूलने का इरादा


नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) यानी फंसा हुआ कर्ज वर्षों से भारतीय बैंकिंग सेक्टर की बड़ी मुसीबत बना हुआ है। इससे कैसे उबरा जाए, इस पर काफी चर्चा हुई है। लेकिन इसका कोई समाधान सामने नहीं आया। प्रभावित बैंकों को सरकार वित्त मुहैया कराए, एक रास्ता यह जरूर सोचा गया। लेकिन इस दिशा में मामूली कदम ही उठाए गए। वैसे भी उस उपाय से कर्ज लेकर उन्हें ना लौटाने की प्रवृत्ति का हल नहीं निकलता। यह तभी संभव है, जब कर्ज ना लौटाने वाली कंपनियों को दंडित करने का प्रावधान सामने आए। अब ऐसा होने की आशा जगी है। केंद्र ने बैंकिंग विनियमन कानून में संशोधन का स्वागतयोग्य निर्णय लिया है। पहले इसके लिए अध्यादेश लाया जाएगा। अध्यादेश में क्या प्रावधान होंगे, इसका विवरण अभी नहीं दिया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि परंपरा के मुताबिक जब किसी प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है, तो उसके ब्योरे का खुलासा उस पर मंजूरी से पहले नहीं किया जाता। लेकिन सरकारी सरकारी सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित कानून का ढांचा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और बैंकिंग विनियमन अधिनियम के अनुरूप है।

अनुमान है कि अध्यादेश जारी होने के बाद बैंक कर्ज वसूली पर कारोबारी नजरिए से व्यावहारिक फैसले लेने की स्थिति में होंगे। साथ ही जांच एजेंसियां ऐसे मामलों की जांच कर सकेंगी। यानी वे परख सकेंगी कि कर्ज देने की प्रक्रिया पारदर्शी और ईमानदार थी या नहीं। इसके अलावा एनपीए के मामलों में भारतीय रिजर्व बैंक को सरकारी बैंकों की ओर से हस्तक्षेप करने का अधिकार मिलेगा। रिजर्व बैंक की निगरानी में कई निरीक्षण समितियों का गठन होगा, जो दिए गए कर्ज की मात्रा के आधार पर एनपीए के मामलों में हो रही प्रगति की निगरानी करेंगी।

ये तमाम प्रावधान अस्तित्व में आए, तो कहा जा सकता है कि एनपीए से निपटने का एक वैधानिक ढांचा कायम होगा। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2016-17 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एनपीए में लगभग एक लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक ये रकम 6.06 लाख करोड़ रुपए हो गई। वैसे जिन कर्जों की वापसी की समय-सारणी दोबारा तय की गई है या जिन्हें बैंकों ने माफ कर दिया है, उन्हें भी जोड़ें तो कुल एनपीए करीब साढ़े नौ लाख करोड़ रुपए तक होने का अनुमान है। ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या कितनी गंभीर है।

क्या प्रस्तावित कानून इससे निपटने में पर्याप्त होगा? यह संभव है अगर केंद्र सरकार इस मोर्चे पर दृढ़ निश्चय दिखाए। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने उन लोगों के नाम बताने से इनकार किया था, जिन पर बड़ी मात्रा में कर्ज बकाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सरकार से कड़े सवाल पूछे थे। अब चूंकि सरकार वैधानिक पहल कर रही है, तो अपेक्षित है कि वह कर्जदारों के नाम सार्वजनिक करने की हिचक तोड़े। उससे कर्ज वसूली की प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी व लोगों का बैंकिंग व्यवस्था में फिर भरोसा बहाल होगा।


Check Also

आज का राशिफल 31 मार्च 2021, जानिए कैसा रहेगा आज आपका दिन

मेष-आनंददायक जीवन गुजरेगा लेकिन स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रखें। प्रेम में दूरी बनी रहेगी। व्‍यवसायिक सफलता …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *