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अखिलेश सरकार के बर्खास्त मंत्री अब कर रहे हैं बैकडोर से वापसी


लखनऊ, (एजेंसी) 27 अक्टूबर । लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए एक ओर जहां शनिवार को अखिलेश सरकार ने अपने 82 मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया, वहीं मई में बर्खास्त 36 मंत्रियों को बैकडोर से एंट्री कराने की तैयारी चल रही है। ये 36 दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री पार्टी के भीतर गड़बड़ी फैलाने के बाद बर्खास्त किए गए थे। आलम यह है कि कइयों की तो पहले ही सिफारिश पर बहाली हो चुकी है जबकि कई सिफारिश करवाने लखनऊ में करीबी नेताओं के यहां डेरा डाले हुए हैं। असल में नवंबर के पहले हफ्ते तक दर्जा धारी मंत्रियों की नई लिस्ट जो आनी है।
AKHILESH YADAV

गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों में हार के बाद सीएम अखिलेश यादव ने मई में 36 दर्जा प्राप्त मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद शनिवार को 82 मंत्रियों पर गाज गिरी और अब 16 ही पद पर बाकी हैं। मजेदार बात यह है कि मई में बर्खास्त मंत्रियों में से कई बहाल भी कर दिए गए हैं। कुछ तो सीधे एसपी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के दरबार में पहुंच गए और सीधे अपनी बहाली करा लाए थे। इनमें पश्चिमी यूपी के एक दर्जा प्राप्त मंत्री मुलायम के पास अपनी सफाई देने गए तो रोने लगे। कहने लगे कि हमने चुनाव में इतनी मेहनत की और हम पर ही गाज गिर गई।

मुलायम ने उन्हें भरोसा दिया कि अन्याय नहीं होगा। बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया। एक मंत्री के लिए एक बड़े मौलाना ने फोन कर दिया था तो उनकी बहाली हो गई थी। सबसे दिलचस्प वाकया तो उत्तर प्रदेश राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद की अध्यक्ष प्रो. सुरभि शुक्ला का रहा, जिन्हें तीसरी बार फिर से राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया गया। पार्टी के एक बड़े नेता की करीबी माने जाने वाली सुरभि को पहली दफा जनवरी, 2013 में दर्जा प्राप्त मंत्री बनाया गया। एक दिन बाद ही उन्हें इस पद से हटा दिया गया। इसके बाद फिर वह जोड़-तोड़ में जुट गईं।

इसके बाद उन्हें दोबारा दर्जा प्राप्त मंत्री बना दिया गया। चुनाव से पहले उन्होंने पूरे सुलतानपुर जिले में अपनी होर्डिंग लगवा दीं। नगर पालिका कर्मचारी इसे हटाने गए तो सुरभि के समर्थकों ने उन्हें मारा-पीटा। चुनाव बाद उन्हें फिर से हटा दिया गया, लेकिन बड़े नेता के कहने पर उन्हें दोबारा यह दर्जा वापस मिल गया। कुलदीप उज्जवल, आशु मलिक जैसे कई नेता बैकडोर से उस वक्त भी बहाल हो गए थे। अब यह फिर से वही दांव आजमाने में जुट गए हैं।

गाड़ी और गनर छिने: शनिवार शाम को जैसे ही दर्जा प्राप्त राज्यमंत्रियों की बर्खास्तगी का आदेश मिला उनकी गाड़ी और गनर की वापसी की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। राज्य सम्पत्ति अधिकारी राज किशोर यादव ने बताया कि इन सभी की गाड़ी वापस लेने की आदेश दे दिए गए हैं। कुछ ने तो खुद ही अपनी गाड़ी वापस कर दी है। इसके अलावा गनर की वापसी के लिए भी निर्देश भेज दिए गए हैं।

फिर बढ़ेगा खर्च: एक दर्जा धारी मंत्री पर डेढ़ से दो लाख रुपए प्रतिमाह खर्च हो रहे थे। अगर नवंबर के पहले सप्ताह में इन मंत्रियों का दर्जा दोबारा वापस लिया जाता है तो फिर से सरकार पर यह बोझ बढ़ेगा। अगर सभी मंत्रियों को बहाल किया जाता है तो सरकार पर करोड़ों का खर्च और बढ़ेगा।
मंत्रियों की धुकधुकी बढ़ी: शनिवार के एक्शन के बाद सीएम कैबिनेट के कई मंत्रियों की भी धुकधुकी बढ़ गई है। यह वे मंत्री हैं जिन्होंने लोकसभा चुनावों के साथ उपचुनावों में भी पॉजिटिव रिजल्ट नहीं दिया था। इनमें गाजीपुर, बलिया जिलों के मंत्रियों के अलावा उपचुनाव में लगाए गए कई मंत्री शामिल हैं। इनमें एक मंत्री तो उपचुनाव में विदेश में घूम रहे थे और बाद में प्रत्याशी ने इन पर गंभीर आरोप लगाए तो इन्हें खुद एसपी प्रमुख ने भी फटकार लगाई थी। एक मंत्री पूरे लोकसभा चुनावों में ब्राह्मणों के वोट हासिल करने के लिए सिर्फ हेलिकाप्टर लिए घूमते रहे पर बाद में वह ब्राह्मणों का वोट ही नहीं दिला सके। अब यह भी निशाने पर हैं।


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