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ब्लैक मनी: नाम न बताने की मजबूरी गिनाता रहा केंद्र


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नई दिल्ली , (एजेंसी) 28 अक्टूबर । ब्लैक मनी मामले में मंगलवार को केंद्र सरकार को करारा झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह उन तमाम नामों को कोर्ट के सामने पेश करे जिनके बारे में विदेश से उन्हें जानकारी मिली है। अब इस बारे में केंद्र सरकार बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने सीलबंद लिफाफे में नाम पेश करेगी और फिर सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई करेगा।

पड़ी फटकार, पूरी लिस्ट सौंपेगी सरकार
मंगलवार को सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता राम जेठमलानी के वकील ने दलील दी कि केंद्र सरकार ने जो पिटिशन दाखिल की है वह दोबारा से मामले को खोलने की कोशिश है। केंद्र ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश पारित किया था उसमें बदलाव किया जाए क्योंकि विदेशों से हुई संधि के तहत सारे नामों का खुलासा नहीं हो सकता।

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि हम नाम नहीं छिपाना चाहते। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हमने एसआईटी बनाई है और मामले की छानबीन चल रही है। जिन मामलों में प्रॉसिक्यूशन शुरू हुआ है, उनका नाम हम कोर्ट को बता चुके हैं। हमने जिन देशों से डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस अग्रीमेंट (दोहरे टैक्सेशन से बचाव के समझौते) किए हैं, उनके मामले में नाम उजागर नहीं कर सकते।

जहां तक नाम बताने का सवाल है तो एसआईटी के सामने नामों को बताया जा चुका है। विदेशों में जो भी खाते खोले गए हैं, वे सारे अवैध नहीं हैं। हम देखते हैं कि अकाउंट अगर कानूनी तौर पर ठीक है या नहीं। अगर अकाउंट अवैध मिले तो आईटी ऐक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है।
हालांकि अटॉर्नी जनरल की इन दलीलों से सुप्रीम कोर्ट बिल्कुल संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि आपको विदेशों से जो भी नाम अकाउंट होल्डर के बारे में मिले हैं, उन्हें कोर्ट को बताएं। हम खुद केस को मॉनिटर कर रहे हैं। ऐसे में आपको हमें नाम बताने में क्या परेशानी है? हमने आपको ओपन कोर्ट में निर्देश दिया था कि आप नाम हमें बताएं, अब आप स्टैंड ले रहे हैं कि आप नाम उजागर नहीं करेंगे। आप इन लोगों को अंब्रेला से प्रोटेक्ट करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।

अटॉर्नी जनरल की इस दलील पर कि प्रॉसिक्यूशन शुरू होने के बाद नाम उजागर होगा तो कोर्ट ने कहा कि हमारे रहते यह सब नहीं हो पाएगा। अटॉर्नी जरनल के यह कहने पर कि अगर नाम उजागर किया गया तो भविष्य में किसी देश से संधि नहीं होगी, इस पर कोर्ट ने कहा कि आप चिंता न करें। केंद्र तमाम नामों की लिस्ट सुप्रीम कोर्ट के हवाले करे और हम देखेंगे कि छानबीन कैसे होगी और कौन करेगा। तब हम गोपनीयता को खुद देखेंगे। एक, दो करके नाम हमें न दें। हमें फ्रांस, जर्मनी और स्विस से मिले तमाम नामों के बारे में जानकारी के बारे में बताया जाए। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

तीन साल पुराना है आदेश: 4 जुलाई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी बैंकों में जमा ब्लैकमनी मामले की जांच और इसे वापस लाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की निगरानी के लिए एक हाई लेवल एसआईटी बनाने का निर्देश दिया था। साथ ही केंद्र को निर्देश दिया था कि वह उन नामों को बताए जिन्हें इस मामले की जांच के दौरान कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

अदालत का उक्त अंतरिम आदेश याचिकाकर्ता ऐडवोकेट रामजेठमलानी की याचिका पर आया था। जेठमलानी ने अपनी याचिका में मांग की थी कि सरकार को विदेशी बैंकों में जमा ब्लैक मनी वापस लाने का आदेश दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह एसआईटी के गठन के संबंध में तुरंत नोटिफिकेशन जारी करे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि तमाम सरकारी अधिकारी इस एसआईटी को सहयोग करें। इसके बाद 29 मई 2014 को केंद्र सरकार ने एसआईटी का गठन किया था।

इसी बीच 17 अक्टूबर को ब्लैक मनी मामले में एनडीए सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि जिन देशों के साथ भारत के डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस अग्रीमेंट (दोहरे टैक्सेशन से बचाव के समझौते) हुए हैं उनसे मिली जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता। जेठमलानी की ओर से केंद्र की इस दलील का विरोध किया गया और कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में ही अपने आदेश में कहा था कि केंद्र नामों का खुलासा करे।


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